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चौरास पुल निर्माण में आएगी तेजी
ब्यूरो/अमर उजाला, श्रीनगर
Updated Tue, 05 Apr 2016 09:47 PM IST
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निर्माण के दौरान ध्वस्त हुए चौरास मोटर पुल के पुनर्निर्माण के लिए केंद्र सरकार की ओर से 26.91 करोड़ रुपये मंजूर होने से निर्माण में तेजी आने की उम्मीद बंधी हैं।
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केंद्रीय गढ़वाल विश्वविद्यालय के श्रीनगर और चौरास को जोड़ने के लिए वर्ष 2002 में घसिया महादेव-चौरास मोटर पुल स्वीकृत हुआ था।
25 मार्च 2012 को पुल के चौरास छोर पर लिंटर डाला गया और उसी रात वह ध्वस्त हो गया। इस घटना में एक अवर अभियंता और सात मजदूरों की मौत हो गई थी। तब इस पुल की लागत 16.50 करोड़ थी।
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पुल की उपयोगिता को देखते हुए शासन ने दोबारा से पुल निर्माण का जिम्मा लिया। पुराने ढांचे के ऊपर पुल निर्माण के लिए शासन ने 19.70 करोड़ रुपये मंजूर किए। वर्ष 2013 से पुल का दोबारा निर्माण शुरू हुआ।
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वर्तमान में पुल के ढांचे को सहारा देने के लिए अतिरिक्त पिलर का निर्माण किया जा रहा है। जबकि फेब्रिकेशन कार्य मेरठ में चल रहा है। सामग्री महंगी होने, मार्ग ध्वस्त होने और अतिरिक्त पिलर के कारण पुल की लागत बढ़ गई। इसके लिए लोनिवि ने शासन को करीब 36 करोड़ का पुनरीक्षित आगणन भेजा।
शासन ने लंबी इंतजारी के बाद 10 करोड़ रुपये अवमुक्त किए। अब केंद्र सरकार ने पुल के लिए एसपीए (विशेष आयोजना निधि) में 26.91 करोड़ स्वीकृत किए हैं। गढ़वाल विवि के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष शैलेश मलासी, एबवीपी के प्रदेश सहमंत्री सुधीर जोशी, प्रदीप रावत, दिनेश डबराल और भरत रावत ने केंद्र सरकार का आभार जताते हुए कहा कि जनता, कर्मचारियों और छात्रों के संघर्ष के बलबूते पुल निर्माण के लिए धन मंजूर हुआ है।
आवाजाही के लिए एक साल का इंतजार
चौरास पुल के अतिरिक्त पिलर का काम जोरों पर चल रहा है। अभी पुल पर चलने के लिए लोगों को एक साल का इंतजार करना होगा। क्योंकि मई-जून से अलकनंदा नदी का जल स्तर बढ़ने से काम को लगातार जारी रखना संभव नहीं है।
लोनिवि के अधिशासी अभियंता एसके तोमर का कहना है कि पिलर का निर्माण जल्द पूरा हो जाएगा, लेकिन मुख्य स्ट्रक्चर को पिलरों के ऊपर एक साथ स्थापित करना होता है। प्लेट जोड़ने का काम एक बार शुरू हो जाए, तो उसको बीच में नहीं रोका जा सकता है।
इसलिए सितंबर माह में जल स्तर कम होने के बाद मुख्य स्ट्रक्चर को जोड़ने का काम किया जाएगा। इसमें चार-पांच माह लग जाएंगे।