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भगवान राम के आदर्शों को करें आत्मसात : आचार्य सुबोध नैथानी
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कण्वघाटी (कोटद्वार)। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम हिंदू समाज के आस्था के प्रतीक हैं। सभी को उनके आदर्शों को आत्मसात करना चाहिए। यह बात भाबर क्षेत्र के अंतर्गत प्राचीन सिद्धपीठ श्री सिद्धबली मंदिर गुलरझाला में नौ दिवसीय श्रीराम कथा के पहले दिन कथावाचक आचार्य सुबोध नैथानी ने कही। इससे पहले श्रद्धालुओं ने क्षेत्र में भव्य शोभायात्रा निकाली।
रविवार को श्रद्धालुओं ने शाकुंभरी देवी मंदिर, मगनपुर से क्षेत्र में शोभायात्रा निकाली। शोभायात्रा किशनपुर बाजार, तेली स्रोत, रामदयालपुर होते प्राचीन सिद्धपीठ श्री सिद्धबली मंदिर गुलरझाला के प्रांगण पहुंचकर संपन्न हुई। इसके बाद गणेश पूजन व नवाग्रह परायण का पाठ शुरू हुआ। दोपहर में आयोजित रामकथा में कथावाचक आचार्य सुबोध नैथानी ने राम कथा सुनाते हुए कहा कि कलयुग की कल कल्षित वासनाओं का शमन करने का सामर्थ्य केवल रामचरित मानस में है। यह एक ऐसा प्राचीन ग्रंथ है। जिसे स्वयं भगवान शंकर ने रचकर अपने मन में रखा। इससे पूर्व पहले दिन की कथा का शुभारंभ उद्योगपति सुरेश ठाकुर ने किया।
मंदिर समिति के अध्यक्ष गौरव कुकरेती ने बताया कि मंदिर में प्रतिदिन दोपहर तीन बजे से रामकथा का आयोजन होगा। पहले दिन नाम महिमा कथा, दूसरे दिन शिव पार्वती विवाह की कथा, तीसरे दिन राम जन्मोत्सव, चाैथे दिन विश्वामित्र यज्ञ एवं रक्षा पुष्प वाटिका, पांचवें दिन सीता-राम विवाह की कथा, छठवें दिन वनवास एवं केवट प्रसंग, सातवें दिन भरत चरित्र, आठवें दिन शबरी प्रसंग, नौवें दिन विभीषण शरणागति व श्री राम राज्य प्रसंग पर झांकी प्रस्तुत की जाएगी।
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रविवार को श्रद्धालुओं ने शाकुंभरी देवी मंदिर, मगनपुर से क्षेत्र में शोभायात्रा निकाली। शोभायात्रा किशनपुर बाजार, तेली स्रोत, रामदयालपुर होते प्राचीन सिद्धपीठ श्री सिद्धबली मंदिर गुलरझाला के प्रांगण पहुंचकर संपन्न हुई। इसके बाद गणेश पूजन व नवाग्रह परायण का पाठ शुरू हुआ। दोपहर में आयोजित रामकथा में कथावाचक आचार्य सुबोध नैथानी ने राम कथा सुनाते हुए कहा कि कलयुग की कल कल्षित वासनाओं का शमन करने का सामर्थ्य केवल रामचरित मानस में है। यह एक ऐसा प्राचीन ग्रंथ है। जिसे स्वयं भगवान शंकर ने रचकर अपने मन में रखा। इससे पूर्व पहले दिन की कथा का शुभारंभ उद्योगपति सुरेश ठाकुर ने किया।
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मंदिर समिति के अध्यक्ष गौरव कुकरेती ने बताया कि मंदिर में प्रतिदिन दोपहर तीन बजे से रामकथा का आयोजन होगा। पहले दिन नाम महिमा कथा, दूसरे दिन शिव पार्वती विवाह की कथा, तीसरे दिन राम जन्मोत्सव, चाैथे दिन विश्वामित्र यज्ञ एवं रक्षा पुष्प वाटिका, पांचवें दिन सीता-राम विवाह की कथा, छठवें दिन वनवास एवं केवट प्रसंग, सातवें दिन भरत चरित्र, आठवें दिन शबरी प्रसंग, नौवें दिन विभीषण शरणागति व श्री राम राज्य प्रसंग पर झांकी प्रस्तुत की जाएगी।
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