सीटू से संबद्ध उत्तराखंड आशा स्वास्थ्य कार्यकर्ता यूनियन ने 12 सूत्री मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। इस मौके पर आशा कार्यकर्ताओं ने सरकारी सेवक का दर्जा देकर उन्हें न्यूनतम 21 हजार मानदेय देने, मानदेय मिलने तक आशाओं का मासिक वेतन निर्धारित करने, सेवानिवृत्ति पर आशाओं के लिए पेंशन का प्रावधान करने, कोविड कार्यों में लगी सभी आशा वर्करों को 10 हजार रुपये मासिक कोरोना भत्ता देने सहित 12 सूत्री मांगों को लेकर मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा।
शुक्रवार को दुगड्डा, रिखणीखाल, द्वारीखाल, जयहरीखाल ब्लाक की आशा स्वास्थ्य कार्यकर्ता हिंदू पंचायती धर्मशाला में एकत्र हुईं और दुगड्डा ब्लाक अध्यक्ष प्रभा चौधरी के नेतृत्व में प्रदर्शन किया। इसके बाद तहसील परिसर में आयोजित सभा में आशा कार्यकर्ताओं ने कहा कि आशाएं स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ हैं, इसके बावजूद प्रदेश सरकार लगातार उनकी उपेक्षा कर रही है। वर्ष 2006 से कार्यरत आशाओं का वेतन अभी तक फिक्स नहीं किया है, जिससे उन्हें आर्थिक संकट से जूझना पड़ रहा है। आशा कार्यकर्ताओं ने मांगों पर कार्रवाई नहीं होने पर 2 अगस्त से कार्य बहिष्कार की चेतावनी दी। प्रदर्शन करने वालों में दुगड्डा ब्लाक की उपाध्यक्ष मीरा नेगी, रंजना कोटनाला, भागीरथी भंडारी, नीलम कुकरेती, प्रर्मिला गुसाईं, सुमित्रा भट्ट, माहेश्वरी देवी, तारा देवी, पूनम देवी, पदमा नेगी, दीपा रावत, मधु ममगाईं, मुन्नी देवी, सुमन रौथाण, कांति देवी, ऊषा देवी, संगीता रावत, बसंती रावत, रजनी देवी और रेखा देवी आदि शामिल रहे।