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एएचपीसी के पांच कर्मी निलंबित
अमर उजाला/श्रीनगर।
Updated Wed, 25 May 2016 09:04 PM IST
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अलकनंदा जल विद्युत परियोजना (एएचपीसी) के प्रतिबंधित क्षेत्र में बिना अनुमति घुसने वाले पांच कर्मचारियों को कंपनी प्रबंधन ने निलंबित कर दिया है। इसके अलावा प्रबंधन ने उनको कारण बताओ नोटिस भी जारी किया है। नोटिस मिलने से नाराज कर्मचारियों के साथियों ने कंपनी के अधिकारियों का घेराव करते हुए माफीनामा देने की मांग की। मांग नहीं मानने पर कर्मचारी कार्यालय परिसर में धरने पर बैठ गए। कर्मचारियों ने शाम चार बजे ं दफ्तर पर ताले जड़ दिए और कंपनी के परियोजना समन्वयक को भी दफ्तर से बाहर नहीं आने दिया।
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यहां बता दें कि 12 दिन पहले एएचपीसीएल के वाउचर्स और भूमिधर कर्मचारियों ने पांच माह के वेतन भुगतान की मांग के लिए आंदोलन किया था। 15 मई को कंपनी प्रबंधन की ओर से वेतन भुगतान का आश्वासन मिलने पर आंदोलन स्थगित हो गया था। इस बीच बुधवार को आंदोलन की अगुवाई करने वाले पांच कर्मचारियों को प्रबंधन की ओर से कारण बताओ नोटिस मिलने से कर्मचारी भड़क गए। उन्होंने कोटेश्वर स्थित परियोजना कार्यालय मेें अधिकरियों का घेराव किया। प्रदर्शन की सूचना पर श्रीकोट और श्रीनगर से पुलिस बल भी मौके पर पहुंचा।
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जिला पंचायत सदस्य उत्तम भंडारी और डुंगरीपंथ के ग्राम प्रधान त्रिभुवन राणा ने आरोप लगाया कि कंपनी समय पर कर्मचारियों को वेतन नहीं देती है। मांग करने पर उत्पीड़न करती है। कर्मचारियों ने नोटिस वापस लेने और माफीनामा देने की मांग की। उन्होंने वाउचर्स कर्मियों को नियुक्ति पत्र देने की भी मांग की।
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वहीं, परियोजना समन्वयक संतोष रेड्डी ने बताया कि कर्मचारियों को वेतन दे दिया गया है। कर्मचारी प्रतिबंधित क्षेत्र में घुसे थे, इसलिए उच्च प्रबंधन ने निर्देश पर उन्हें नोटिस दिए गए थे। कर्मचारियों के विरोध के बारे में उच्च प्रबंधन को अवगत कराया जाएगा।
यह लिखा है नोटिस में
श्रीनगर। कंपनी प्रबंधन की ओर से भेजे गए नोटिस के अनुसार 14 मई को कर्मचारियों को वार्ता के लिए बुलाया गया था। बैठक में आने के बजाय सुरक्षा कर्मचारियों को धमका कर 100 से अधिक कर्मचारी प्रतिबंधित क्षेत्र मेें घुस गए। एसडीएम, पुलिस बल और कंपनी के अधिकारियों के समझाने-बुझाने के बावजूद कर्मचारियों ने शाम सात बजे डैम के गेट खोल दिए। इससे चार घंटे तक पानी बहता रहा। ऐसे में पांच कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है। नोटिस प्राप्ति के 48 घंटे के अंदर स्पष्टीकरण नहीं देने पर यह मान लिया जाएगा कि वह अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को स्वीकार करते हैं।