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अलविदा 2025: वन्यजीवों से जूझते रहे पूरे साल, कई उपलब्धियां भी मिलीं
Tue, 30 Dec 2025 12:01 AM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
Updated Tue, 30 Dec 2025 12:01 AM IST
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अंतिम महीने में भी चलता रहा आंदोलनों का दौर, सड़क व पुलों की मिली सौगात
चंद्रमोहन शुक्ला
कोटद्वार। वर्ष 2025 में कोटद्वार और आसपास के पर्वतीय अंचल जहां वन्यजीव संघर्ष से जूझते रहे, वहीं सड़क, पुल, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में कई उपलब्धियां भी हासिल हुई।
वर्ष 2023 की आपदा से क्षतिग्रस्त मालन पुल पर बीते मई माह में यातायात शुरू हुआ तो भाबर की बड़ी आबादी को राहत मिली। आपदा की चपेट में आकर क्षतिग्रस्त हुए कई पुलों की मरम्मत के लिए करोड़ों रुपये स्वीकृत हुए। केंद्रीय विद्यालय की स्वीकृति व संचालन भी बड़ी सौगात रही। तेलीसोत गदेरे में पुल निर्माण की स्वीकृति मिली। जिसका निर्माण अंतिम चरण में है। इससे क्षेत्रवासियों को बरसात में परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। 18 करोड़ की लागत से नींबूचौड़ से सिगड्डी के बीच सड़क का निर्माण, सड़कों के किनारे स्ट्रीट लाइट और अब तक अंधेरे में डूबे कोटद्वार भाबर के सभी सात पुल लाइट लगने से जगमग हुए। गढ़वाल सांसद के प्रयास से कोटद्वार के लिए पासपोर्ट कार्यालय की स्वीकृति मिली। कार्यालय तैयार हो गया है, नए साल से पासपोर्ट बनवाने की सुविधा भी लोगों को मिलने लगेगी।
स्वास्थ्य के क्षेत्र में जहां बेस अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी का सामना करना पड़ा, वहीं साल के अंत में कई चिकित्सक भी मिले। इस साल आजादी के पहले बने रेलवे स्टेशन की इमारत निर्माणाधीन है, वहीं आजादी के बाद बना रोडवेज बस स्टेशन भी आकार लेने लगा है। लालढांग चिल्लरखाल मार्ग के लिए साल के अंतिम सप्ताह तक आंदोलन चलता रहा।
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पहाड़ में वन्यजीव लोगों की जान पर पडे़ भारी
कार्बेट और राजाजी नेशनल पार्क के बीच में स्थित कोटद्वार शहर और ग्रामीण अंचलों में वन्यजीवाें की पूरे साल दहशत बनी रही। पहाड़ में जहां भालू, गुलदार और बाघ लोगों की जान पर भारी पडे़, वहीं भाबर के इलाके भी हाथी और गुलदार की दहशत से अछूते नहीं रहे। पर्यटन नगरी लैंसडौन में भी लोगों को गुलदार की दहशत के साए में जीना पड़ा। केटीआर से सटे नैनीडांडा, जयहरीखाल, रिखणीखाल के साथ ही द्वारीखाल, सतपुली, दुगड्डा के इलाकों में ग्रामीणों का वन्यजीवों के साथ संघर्ष होता रहा। इस साल जहां 6 ग्रामीणों को गुलदार व बाघ के हमलों में जान गंवानी पड़ी, वहीं दो लोग घायल हुए। दुगड्डा - सेंधीखाल क्षेत्र में दिसंबर माह में डाल्यूंगाज में हुई महिला के मौत के बाद बाघ के पिंजरे में कैद होने के बाद भी अब तक दहशत नहीं गई।
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घोषणाओं के धरातल पर उतरने का रहा इंतजार
कोटद्वार जिला निर्माण की मांग अविभाजित उत्तर प्रदेश के समय से चल रही है। कण्वाश्रम पर्यटन विकास, मेडिकल कालेज, क्षेत्र की लाइफ लाइन लालढांग मार्ग का निर्माण समेत दर्जनों ऐसी घोषणाएं हैं, जिनका धरातल पर उतरने का इंतजार रहा।
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चंद्रमोहन शुक्ला
कोटद्वार। वर्ष 2025 में कोटद्वार और आसपास के पर्वतीय अंचल जहां वन्यजीव संघर्ष से जूझते रहे, वहीं सड़क, पुल, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में कई उपलब्धियां भी हासिल हुई।
वर्ष 2023 की आपदा से क्षतिग्रस्त मालन पुल पर बीते मई माह में यातायात शुरू हुआ तो भाबर की बड़ी आबादी को राहत मिली। आपदा की चपेट में आकर क्षतिग्रस्त हुए कई पुलों की मरम्मत के लिए करोड़ों रुपये स्वीकृत हुए। केंद्रीय विद्यालय की स्वीकृति व संचालन भी बड़ी सौगात रही। तेलीसोत गदेरे में पुल निर्माण की स्वीकृति मिली। जिसका निर्माण अंतिम चरण में है। इससे क्षेत्रवासियों को बरसात में परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। 18 करोड़ की लागत से नींबूचौड़ से सिगड्डी के बीच सड़क का निर्माण, सड़कों के किनारे स्ट्रीट लाइट और अब तक अंधेरे में डूबे कोटद्वार भाबर के सभी सात पुल लाइट लगने से जगमग हुए। गढ़वाल सांसद के प्रयास से कोटद्वार के लिए पासपोर्ट कार्यालय की स्वीकृति मिली। कार्यालय तैयार हो गया है, नए साल से पासपोर्ट बनवाने की सुविधा भी लोगों को मिलने लगेगी।
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स्वास्थ्य के क्षेत्र में जहां बेस अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी का सामना करना पड़ा, वहीं साल के अंत में कई चिकित्सक भी मिले। इस साल आजादी के पहले बने रेलवे स्टेशन की इमारत निर्माणाधीन है, वहीं आजादी के बाद बना रोडवेज बस स्टेशन भी आकार लेने लगा है। लालढांग चिल्लरखाल मार्ग के लिए साल के अंतिम सप्ताह तक आंदोलन चलता रहा।
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पहाड़ में वन्यजीव लोगों की जान पर पडे़ भारी
कार्बेट और राजाजी नेशनल पार्क के बीच में स्थित कोटद्वार शहर और ग्रामीण अंचलों में वन्यजीवाें की पूरे साल दहशत बनी रही। पहाड़ में जहां भालू, गुलदार और बाघ लोगों की जान पर भारी पडे़, वहीं भाबर के इलाके भी हाथी और गुलदार की दहशत से अछूते नहीं रहे। पर्यटन नगरी लैंसडौन में भी लोगों को गुलदार की दहशत के साए में जीना पड़ा। केटीआर से सटे नैनीडांडा, जयहरीखाल, रिखणीखाल के साथ ही द्वारीखाल, सतपुली, दुगड्डा के इलाकों में ग्रामीणों का वन्यजीवों के साथ संघर्ष होता रहा। इस साल जहां 6 ग्रामीणों को गुलदार व बाघ के हमलों में जान गंवानी पड़ी, वहीं दो लोग घायल हुए। दुगड्डा - सेंधीखाल क्षेत्र में दिसंबर माह में डाल्यूंगाज में हुई महिला के मौत के बाद बाघ के पिंजरे में कैद होने के बाद भी अब तक दहशत नहीं गई।
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घोषणाओं के धरातल पर उतरने का रहा इंतजार
कोटद्वार जिला निर्माण की मांग अविभाजित उत्तर प्रदेश के समय से चल रही है। कण्वाश्रम पर्यटन विकास, मेडिकल कालेज, क्षेत्र की लाइफ लाइन लालढांग मार्ग का निर्माण समेत दर्जनों ऐसी घोषणाएं हैं, जिनका धरातल पर उतरने का इंतजार रहा।
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