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रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ चाई ग्रामोत्सव का आगाज
Updated Tue, 22 May 2018 11:04 PM IST
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कोटद्वार। पहाड़ की सांस्कृतिक धरोहर को संजोने के लिए आयोजित तीन दिवसीय चाई ग्रामोत्सव 2018 का आगाज रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ हुआ। ग्रामोत्सव में जहां पहाड़ की लोक कलाओं की छटा बिखरी, वहीं शाम को मनमोहन सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने लोगों का दिल जीत लिया।
मंगलवार को विकास खंड जयहरीखाल के ग्राम चाई में आयोजित तीन दिवसीय चाई ग्रामोत्सव का शुुुुभारंभ मुख्य अतिथि पौड़ी जिला पंचायत उपाध्यक्ष सुमन कोटनाला और समिति के अध्यक्ष जगमोहन बुड़ाकोटी ने किया। उन्होंने कहा कि ग्राम चाई में ग्रामोत्सव के माध्यम से पहाड़ की समृद्ध ग्राम्य संस्कृति को बचाने की जो मुहिम छेड़ी गई है, वह सभी के लिए अनुकरणीय है। उन्होंने कहा कि यह पहल नई पीढ़ी को संदेश देती है कि गांव हमारी संस्कृति के केंद्र हैं और इनका संरक्षण आवश्यक है। ग्रामोत्सव में सुबह ग्रामवासियों ने भव्य कलश यात्रा निकाली। पंडित दीपक ध्यानी के सानिध्य में वेद पाठियों के मंत्रोच्चार के बीच शिव-देवी पूजन के साथ ही गांव के प्रत्येक घर-आंगन में जाकर पूजन किया गया। इस दौरान देश-विदेश से ग्रामवासी अपने गांव चाई पहुंचे।
इस मौके पर शंभू प्रसाद बुड़ाकोटी, जयंती प्रसाद, शेखर बुड़ाकोटी, नवीन प्रसाद, डा. पदमेश बुड़ाकोटी, सचिदानंद बुड़ाकोटी, राज्यवर्द्धन, कमलेश व अनूप आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन ललन बुड़ाकोटी ने किया।
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मंगलवार को विकास खंड जयहरीखाल के ग्राम चाई में आयोजित तीन दिवसीय चाई ग्रामोत्सव का शुुुुभारंभ मुख्य अतिथि पौड़ी जिला पंचायत उपाध्यक्ष सुमन कोटनाला और समिति के अध्यक्ष जगमोहन बुड़ाकोटी ने किया। उन्होंने कहा कि ग्राम चाई में ग्रामोत्सव के माध्यम से पहाड़ की समृद्ध ग्राम्य संस्कृति को बचाने की जो मुहिम छेड़ी गई है, वह सभी के लिए अनुकरणीय है। उन्होंने कहा कि यह पहल नई पीढ़ी को संदेश देती है कि गांव हमारी संस्कृति के केंद्र हैं और इनका संरक्षण आवश्यक है। ग्रामोत्सव में सुबह ग्रामवासियों ने भव्य कलश यात्रा निकाली। पंडित दीपक ध्यानी के सानिध्य में वेद पाठियों के मंत्रोच्चार के बीच शिव-देवी पूजन के साथ ही गांव के प्रत्येक घर-आंगन में जाकर पूजन किया गया। इस दौरान देश-विदेश से ग्रामवासी अपने गांव चाई पहुंचे।
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इस मौके पर शंभू प्रसाद बुड़ाकोटी, जयंती प्रसाद, शेखर बुड़ाकोटी, नवीन प्रसाद, डा. पदमेश बुड़ाकोटी, सचिदानंद बुड़ाकोटी, राज्यवर्द्धन, कमलेश व अनूप आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन ललन बुड़ाकोटी ने किया।
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