{"_id":"59b812f24f1c1be57f8b6491","slug":"41505235698-kotdwar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"पंचायत प्रतिनिधियों ने नगर निगम के विरोध में भरी हुंकार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पंचायत प्रतिनिधियों ने नगर निगम के विरोध में भरी हुंकार
Updated Tue, 12 Sep 2017 10:31 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
कोटद्वार। भाबर की चार पटवारी सर्किलों की 35 ग्राम पंचायतों के 71 राजस्व गांवों को नगर निगम में मिलाने के प्रस्ताव के खिलाफ पंचायत प्रतिनिधियों ने हुंकार भरी है। मंगलवार को पंचायत प्रतिनिधियों ने तहसील में प्रदर्शन किया। कहा कि नगर पालिका परिषद कोटद्वार की सीमा में विस्तार करने के लिए ग्राम पंचायतों की बलि दी जा रही है। कोटद्वार पालिका से ग्राम पंचायतों की स्थिति कहीं बेहतर है। कहा कि प्रधान, बीडीसी सदस्य और पंचायत प्रतिनिधि अपने हित के लिए नहीं, बल्कि ग्रामीण जनता के भविष्य के लिए यह लड़ाई लड़ रहे हैं। कहा कि जनप्रतिनिधियों ने आज यदि नगर निगम का विरोध नहीं किया तो इसके भयंकर परिणाम ग्रामीणों को भुगतने होंगे।
प्रधान ग्राम पंचायत संघ के अध्यक्ष सुरेश रावत और चंद्रप्रकाश नैथानी की अध्यक्षता में पंचायत प्रतिनिधियों ने राज्य सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। कहा कि नगर निगम बनाने से इस कृषि प्रधान इलाके का कोई भला नहीं होने वाला। नगर निगम गांवों और ग्राम पंचायतों का वजूद खत्म करने की साजिश है। निगम के बनते ही पूरा इलाका शहर में गिना जाएगा। किसानों को खाद, उर्वरक और खेती के ऋष, सब्सिडी मिलनी बंद हो जाएगी। ग्राम पंचायतों को मनरेगा और अन्य ग्रामीण विकास योजनाओं से वंचित होना पड़ेगा। अपनी जमीन पर भवन, घर बनाने के लिए नक्शा पास कराने के लिए नगर निगम के चक्कर काटने पड़ेंगे। हाउस टैक्स समेत तमाम करों का बोझ भी ग्रामीणों को झेलना पड़ेगा। हरिद्वार के जो गांव पूर्व में निगम में शामिल किए गए थे, वे न तो गांव रहे और ना ही शहर ही बन सके। ग्रामीण परेशान हैं। ठीक वही हालत भाबर के लोगों की होने वाली है। प्रधानों और जनप्रतिनिधियों ने भाबर की जनता का आह्वान किया कि वे नगर निगम के विरोध में अपनी आवाज बुलंद करें अन्यथा भविष्य में उनके पास पछताने के अलावा कोई और विकल्प नहीं रहेगा।
प्रदर्शन में शैलेश शैलेंद्र डबराल, अनिल कुमार, विजयपाल सिंह मेहरा, कीरत सिंह नेगी, कृष्ण चंद्र, दीपक पांडे, संजय पंथवाल, भागीरथी देवी, विनोद सिंह रावत, विनोद सिंह, वीरेंद्र सिंह, बबीता देवी, किरन काला, दिनेश रावत, बसंती थलेड़ी, सुमन रावत, पूनम मेहरा, मीनाक्षी रावत, रोशन गौड़, शरत बिष्ट, नरेंद्र सिंह नेगी, सतीश नैथानी, जीतेंद्र रावत, तेजेंद्र सिंह नेगी, संदीप सुंद्रियाल, उमेद सिंह नेगी, जीत सिंह रावत आदि उपस्थित रहे।
विज्ञापन
फोटो समाचार
प्रधान ग्राम पंचायत संघ के अध्यक्ष सुरेश रावत और चंद्रप्रकाश नैथानी की अध्यक्षता में पंचायत प्रतिनिधियों ने राज्य सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। कहा कि नगर निगम बनाने से इस कृषि प्रधान इलाके का कोई भला नहीं होने वाला। नगर निगम गांवों और ग्राम पंचायतों का वजूद खत्म करने की साजिश है। निगम के बनते ही पूरा इलाका शहर में गिना जाएगा। किसानों को खाद, उर्वरक और खेती के ऋष, सब्सिडी मिलनी बंद हो जाएगी। ग्राम पंचायतों को मनरेगा और अन्य ग्रामीण विकास योजनाओं से वंचित होना पड़ेगा। अपनी जमीन पर भवन, घर बनाने के लिए नक्शा पास कराने के लिए नगर निगम के चक्कर काटने पड़ेंगे। हाउस टैक्स समेत तमाम करों का बोझ भी ग्रामीणों को झेलना पड़ेगा। हरिद्वार के जो गांव पूर्व में निगम में शामिल किए गए थे, वे न तो गांव रहे और ना ही शहर ही बन सके। ग्रामीण परेशान हैं। ठीक वही हालत भाबर के लोगों की होने वाली है। प्रधानों और जनप्रतिनिधियों ने भाबर की जनता का आह्वान किया कि वे नगर निगम के विरोध में अपनी आवाज बुलंद करें अन्यथा भविष्य में उनके पास पछताने के अलावा कोई और विकल्प नहीं रहेगा।
विज्ञापन
प्रदर्शन में शैलेश शैलेंद्र डबराल, अनिल कुमार, विजयपाल सिंह मेहरा, कीरत सिंह नेगी, कृष्ण चंद्र, दीपक पांडे, संजय पंथवाल, भागीरथी देवी, विनोद सिंह रावत, विनोद सिंह, वीरेंद्र सिंह, बबीता देवी, किरन काला, दिनेश रावत, बसंती थलेड़ी, सुमन रावत, पूनम मेहरा, मीनाक्षी रावत, रोशन गौड़, शरत बिष्ट, नरेंद्र सिंह नेगी, सतीश नैथानी, जीतेंद्र रावत, तेजेंद्र सिंह नेगी, संदीप सुंद्रियाल, उमेद सिंह नेगी, जीत सिंह रावत आदि उपस्थित रहे।
विज्ञापन
फोटो समाचार