{"_id":"5a79e0b04f1c1b514a8b7c87","slug":"151517936816-kotdwar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"हर बार मिलता है आश्वासन, कब दूर होगी परेशानी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हर बार मिलता है आश्वासन, कब दूर होगी परेशानी
Updated Tue, 06 Feb 2018 10:41 PM IST
विज्ञापन
कोटद्वार। तहसील दिवस महज कागजी औपचारिकता बनकर रह गया है। कोटद्वार तहसील दिवस में फरियादियों को हर महीने सिर्फ आश्वासन मिलते हैं। आश्वासनों से परेशान होकर कइयों ने तहसील की चौखट पर आना छोड़ दिया है तो कइयों की उम्मीदें अभी भी जिंदा हैं। अधिकांश फरियादी वृद्धा, विकलांगता, विधवा पेंशन को लेकर चक्कर काट रहे हैं। मंगलवार को आयोजित तहसील दिवस में फरियादियों ने एसडीएम को अपना दुखड़ा सुनाया। उन्होंने कहा कि विभागीय अधिकारियों से लेकर तहसील दिवसों में दरख्वास्त देकर थक-हार चुके हैं। सभी जगहों से आश्वासन मिलता है, लेकिन समस्या का समाधान आज तक नहीं हो सका है। ऐसे ही कुछ फरियादियों ने अमर उजाला से बातचीत कर अपनी समस्याएं सांझा की।
1- फोटो
आजीविका का कोई साधन नहीं है। पति कैलाश भारद्वाज के देहांत के बाद चार बच्चों की जिम्मेदारी आ गई। पहले 800 रुपये मासिक विधवा पेंशन मिलती थी। 2016 से पेंशन मिलनी बंद हो गई। पेंशन के लिए समाज कल्याण विभाग से लेकर तहसील दिवसों पर दरख्वास्त देकर थक गई हूं। - गुड्डी देवी, काशीरामपुर
2-फोटो
पिछले साल चार अगस्त को पनियाली क्षेत्र में बादल फटने से काफी नुकसान हुआ। चार लोगों के मरने के साथ ही सिंचाई विभाग की नहरों, नालियों से लेकर सड़क गायब हो गई थी। नालियां बनाने की मांग को लेकर संबंधित विभागों के अफसरों के चक्कर लगाकर थक गए। कोई सुनने वाला नहीं है। -ओम प्रकाश, प्रताप नगर
विज्ञापन
3- वृद्धा पेंशन के लिए महीनों से तहसील के चक्कर काट रही हूं। 78 साल की उम्र में अब आंख से भी ढंग से नहीं देख पाती हूं। 2017 नवंबर से मेरी वृद्धा पेंशन बंद कर दी गई। पेंशन बंद क्यों हुई, इसको लेकर कोई जवाब नहीं देता है। हर महीने 15 किमी दूर से तहसील आती हूं। -साकेबरी देवी, कोटला
फोटो-
हर तहसील दिवस पर ध्यानी का रहता है ध्यान
विजय ध्यानी सामाजिक कार्यकर्ता हैं। विकलांग होने के बावजूद जनता की समस्याओं के लिए जूझते हैं। क्षेत्र की समस्याओं की निस्तारण के लिए संबंधित विभागों के चक्कर काटने के साथ हर तहसील दिवस में पहुंचते हैं। विजय ध्यानी बताते हैं, पिछले 18 सालों से नियमित तहसील दिवस पहुंचकर जनता की समस्याएं रखता हूं। दस फीसदी समस्याओं का समाधान हो पाता है। बाकी 90 फीसदी समस्याओं की सुनवाई नहीं हो पाती है। मंगलवार को तहसील दिवस में विजय ध्यानी ने सड़क, सिंचाई, अतिक्रमण, आवारा जानवरों के अलावा पेयजल संबंधी समस्याएं दर्ज कराई।
तहसील दिवस में दर्ज नहीं हुई एक भी शिकायत
- एसडीएम ने दिए अनुपस्थित अधिकारियों का एक दिन का वेतन काटने के निर्देश
यमकेश्वर। तहसील यमकेश्वर में प्रत्येक माह के पहले मंगलवार को आयोजित होने वाले तहसील दिवस में एक भी शिकायत दर्ज नही हुई। तहसील दिवस के अवसर पर एसडीएम यमकेश्वर कमलेश मेहता सुबह 10 बजे ही लोगों की शिकायतों को सुनने के लिए तहसील पहुंचे, जहां तहसील दिवस में किसी ने भी अपनी शिकायत दर्ज नहीं कराई। तहसील दिवस के अवसर पर तहसील यमकेश्वर में नही आने वाले विभिन्न विभागों के अधिकारियों का एक दिन का वेतन काटने का निर्देश एसडीएम यमकेश्वर ने दिए हैं। तहसील दिवस के अवसर पर तहसील यमकेश्वर में मात्र समाज कल्याण विभाग, जल संस्थान और शिक्षा विभाग के अधिकारी/कर्मचारी ही पहुंचे।
विज्ञापन
1- फोटो
आजीविका का कोई साधन नहीं है। पति कैलाश भारद्वाज के देहांत के बाद चार बच्चों की जिम्मेदारी आ गई। पहले 800 रुपये मासिक विधवा पेंशन मिलती थी। 2016 से पेंशन मिलनी बंद हो गई। पेंशन के लिए समाज कल्याण विभाग से लेकर तहसील दिवसों पर दरख्वास्त देकर थक गई हूं। - गुड्डी देवी, काशीरामपुर
विज्ञापन
2-फोटो
पिछले साल चार अगस्त को पनियाली क्षेत्र में बादल फटने से काफी नुकसान हुआ। चार लोगों के मरने के साथ ही सिंचाई विभाग की नहरों, नालियों से लेकर सड़क गायब हो गई थी। नालियां बनाने की मांग को लेकर संबंधित विभागों के अफसरों के चक्कर लगाकर थक गए। कोई सुनने वाला नहीं है। -ओम प्रकाश, प्रताप नगर
विज्ञापन
3- वृद्धा पेंशन के लिए महीनों से तहसील के चक्कर काट रही हूं। 78 साल की उम्र में अब आंख से भी ढंग से नहीं देख पाती हूं। 2017 नवंबर से मेरी वृद्धा पेंशन बंद कर दी गई। पेंशन बंद क्यों हुई, इसको लेकर कोई जवाब नहीं देता है। हर महीने 15 किमी दूर से तहसील आती हूं। -साकेबरी देवी, कोटला
फोटो-
हर तहसील दिवस पर ध्यानी का रहता है ध्यान
विजय ध्यानी सामाजिक कार्यकर्ता हैं। विकलांग होने के बावजूद जनता की समस्याओं के लिए जूझते हैं। क्षेत्र की समस्याओं की निस्तारण के लिए संबंधित विभागों के चक्कर काटने के साथ हर तहसील दिवस में पहुंचते हैं। विजय ध्यानी बताते हैं, पिछले 18 सालों से नियमित तहसील दिवस पहुंचकर जनता की समस्याएं रखता हूं। दस फीसदी समस्याओं का समाधान हो पाता है। बाकी 90 फीसदी समस्याओं की सुनवाई नहीं हो पाती है। मंगलवार को तहसील दिवस में विजय ध्यानी ने सड़क, सिंचाई, अतिक्रमण, आवारा जानवरों के अलावा पेयजल संबंधी समस्याएं दर्ज कराई।
तहसील दिवस में दर्ज नहीं हुई एक भी शिकायत
- एसडीएम ने दिए अनुपस्थित अधिकारियों का एक दिन का वेतन काटने के निर्देश
यमकेश्वर। तहसील यमकेश्वर में प्रत्येक माह के पहले मंगलवार को आयोजित होने वाले तहसील दिवस में एक भी शिकायत दर्ज नही हुई। तहसील दिवस के अवसर पर एसडीएम यमकेश्वर कमलेश मेहता सुबह 10 बजे ही लोगों की शिकायतों को सुनने के लिए तहसील पहुंचे, जहां तहसील दिवस में किसी ने भी अपनी शिकायत दर्ज नहीं कराई। तहसील दिवस के अवसर पर तहसील यमकेश्वर में नही आने वाले विभिन्न विभागों के अधिकारियों का एक दिन का वेतन काटने का निर्देश एसडीएम यमकेश्वर ने दिए हैं। तहसील दिवस के अवसर पर तहसील यमकेश्वर में मात्र समाज कल्याण विभाग, जल संस्थान और शिक्षा विभाग के अधिकारी/कर्मचारी ही पहुंचे।