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नगर निगम के विरोध में सनेह के ग्रामीणों ने भरी हुंकार .
Updated Fri, 17 Nov 2017 10:38 PM IST
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कोटद्वार। नगर निगम विरोध संघर्ष समिति के बैनर तले शुक्रवार को सनेह पट्टी के कई गांवों के लोगों ने नगर निगम के खिलाफ कोटद्वार में जुलूस निकालकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी ग्रामीणों पर नगर निगम थोपे जाने के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। इस बीच तहसील गेट पर प्रदर्शनकारियों ने सांकेतिक जाम लगाया। तहसील में प्रदर्शन के बाद रैली एक जनसभा में तब्दील हो गई। जनसभा के बाद प्रदर्शनकारियों ने एसडीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा।
शुक्रवार को सनेह पट्टी क्षेत्र के ग्रामीण बड़ी संख्या में नगर निगम के विरोध में सड़कों पर उतर पड़े। कुंभीचौड़, रतनपुर होते हुए ग्रामीण झंडाचौक पहुंचे। यहां से बद्रीनाथ मार्ग पर प्रदर्शन करते हुए ग्रामीण तहसील मुख्यालय पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने नगर निगम को प्रदेश सरकार का तुगलकी फरमान बताया। कहा कि अधिसूचना जारी होने से पहले जनसुनवाई तक नहीं की गई। तहसील में जनसभा को संबोधित करते हुए यूकेडी के केंद्रीय संरक्षक डा. शक्तिशैल कपरवाण, सूरज प्रसाद क्रांति, दुगड्डा के ब्लाक प्रमुख सुरेश असवाल, चंद्रेश लखेड़ा, गोविंद डंडरियाल, सुधीर चौधरी, ग्राम प्रधान संजय पंथवाल, दीपक पांडे, विपुल बलूनी, विजय राम, महानंद ध्यानी, सुल्तान सिंह रावत, रतन सिंह रावत, अंजू पुंडीर, कुसुम असवाल, सुधा असवाल, विजयेश्वरी झिंकवाण, धीरेंद्र सिंह नेगी, गंगा सिंह, दान सिंह, प्रेम सिंह नेगी, लक्ष्मण सिंह रावत, नंदन सिंह रावत, डा. चंद्रमोहन खर्कवाल, बीरेंद्र थलेड़ी ने नगर निगम के विरोध में लोकतांत्रिक और न्यायिक दोनों लड़ाई लड़ने का ऐलान किया। कहा कि नगर निगम के विरोध में 27 नवंबर को सुखरौ पट्टी और 26 दिसंबर को महारैली निकाली जाएगी।
मुख्यमंत्री को सौंपे ज्ञापन में ग्रामीणों ने कहा है कि वर्तमान में कोटद्वार भाबर में अस्सी प्रतिशत क्षेत्र सिंचित कृषि भूमि होने के चलते खेती किसानी करने वालेे लोग अपनी आजीविका चलाते हैं, लेकिन प्रदेश सरकार किसानों के अधिकारों को छीनना चाहती है। नगर निगम बनने से किसान व बागवान समेत गरीब लोगों की मुश्किलें बढ़ेंगी।
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शुक्रवार को सनेह पट्टी क्षेत्र के ग्रामीण बड़ी संख्या में नगर निगम के विरोध में सड़कों पर उतर पड़े। कुंभीचौड़, रतनपुर होते हुए ग्रामीण झंडाचौक पहुंचे। यहां से बद्रीनाथ मार्ग पर प्रदर्शन करते हुए ग्रामीण तहसील मुख्यालय पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने नगर निगम को प्रदेश सरकार का तुगलकी फरमान बताया। कहा कि अधिसूचना जारी होने से पहले जनसुनवाई तक नहीं की गई। तहसील में जनसभा को संबोधित करते हुए यूकेडी के केंद्रीय संरक्षक डा. शक्तिशैल कपरवाण, सूरज प्रसाद क्रांति, दुगड्डा के ब्लाक प्रमुख सुरेश असवाल, चंद्रेश लखेड़ा, गोविंद डंडरियाल, सुधीर चौधरी, ग्राम प्रधान संजय पंथवाल, दीपक पांडे, विपुल बलूनी, विजय राम, महानंद ध्यानी, सुल्तान सिंह रावत, रतन सिंह रावत, अंजू पुंडीर, कुसुम असवाल, सुधा असवाल, विजयेश्वरी झिंकवाण, धीरेंद्र सिंह नेगी, गंगा सिंह, दान सिंह, प्रेम सिंह नेगी, लक्ष्मण सिंह रावत, नंदन सिंह रावत, डा. चंद्रमोहन खर्कवाल, बीरेंद्र थलेड़ी ने नगर निगम के विरोध में लोकतांत्रिक और न्यायिक दोनों लड़ाई लड़ने का ऐलान किया। कहा कि नगर निगम के विरोध में 27 नवंबर को सुखरौ पट्टी और 26 दिसंबर को महारैली निकाली जाएगी।
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मुख्यमंत्री को सौंपे ज्ञापन में ग्रामीणों ने कहा है कि वर्तमान में कोटद्वार भाबर में अस्सी प्रतिशत क्षेत्र सिंचित कृषि भूमि होने के चलते खेती किसानी करने वालेे लोग अपनी आजीविका चलाते हैं, लेकिन प्रदेश सरकार किसानों के अधिकारों को छीनना चाहती है। नगर निगम बनने से किसान व बागवान समेत गरीब लोगों की मुश्किलें बढ़ेंगी।
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