{"_id":"6a5f746f5b0aeb7fbb06fc84","slug":"shrimad-bhagwat-katha-is-the-vaitarani-of-kaliyuga-haridwar-news-c-149-1-hrd1003-3244-2026-07-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"कलयुग की वैतरणी है श्रीमद्भागवत कथा : विज्ञानानंद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कलयुग की वैतरणी है श्रीमद्भागवत कथा : विज्ञानानंद
विज्ञापन
- राजा गार्डन स्थित हनुमान मंदिर में शुरू हुई श्रीमद्भागवत कथा
माई सिटी रिपोर्टर
हरिद्वार। राजा गार्डन स्थित श्री हनुमान मंदिर में मंगलवार से श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ की शुरुआत हुई। श्री गीता विज्ञान आश्रम की ओर से आयोजित कथा और यज्ञ में बड़ी संख्या में लोगों ने प्रतिभाग किया। महिलाओं ने कलश जल भरकर विधि विधान से पूजन कराया।
कथा व्यास महामंडलेश्वर स्वामी विज्ञानानंद सरस्वती ने यज्ञ का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कलयुग की वैतरिणी है। इसका श्रवण करने मात्र से भक्त भवसागर से पार उतर जाता है। उन्होंने श्रीमद्भागवत को पंचम वेद बताया। उन्होंने कहा कि इसमें सभी धर्म ग्रंथों का सार निहित है। यह कथा भक्त और भगवान के संबंध को दर्शाती है।
यज्ञ के शुभारंभ से पहले एक भव्य कलश शोभा यात्रा निकाली गई। श्री हनुमान मंदिर से शुरू हुई यात्रा में श्रीमद्भागवत की झांकी के साथ विभिन्न धार्मिक झांकियां भी शामिल रहीं। शोभा यात्रा के बाद व्यास पीठ का पूजन हुआ। अंत में सभी भक्तों ने व्यास पीठ की आरती उतारकर विश्व कल्याण की कामना की।
विज्ञापन
विज्ञापन
माई सिटी रिपोर्टर
हरिद्वार। राजा गार्डन स्थित श्री हनुमान मंदिर में मंगलवार से श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ की शुरुआत हुई। श्री गीता विज्ञान आश्रम की ओर से आयोजित कथा और यज्ञ में बड़ी संख्या में लोगों ने प्रतिभाग किया। महिलाओं ने कलश जल भरकर विधि विधान से पूजन कराया।
कथा व्यास महामंडलेश्वर स्वामी विज्ञानानंद सरस्वती ने यज्ञ का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कलयुग की वैतरिणी है। इसका श्रवण करने मात्र से भक्त भवसागर से पार उतर जाता है। उन्होंने श्रीमद्भागवत को पंचम वेद बताया। उन्होंने कहा कि इसमें सभी धर्म ग्रंथों का सार निहित है। यह कथा भक्त और भगवान के संबंध को दर्शाती है।
विज्ञापन
यज्ञ के शुभारंभ से पहले एक भव्य कलश शोभा यात्रा निकाली गई। श्री हनुमान मंदिर से शुरू हुई यात्रा में श्रीमद्भागवत की झांकी के साथ विभिन्न धार्मिक झांकियां भी शामिल रहीं। शोभा यात्रा के बाद व्यास पीठ का पूजन हुआ। अंत में सभी भक्तों ने व्यास पीठ की आरती उतारकर विश्व कल्याण की कामना की।
विज्ञापन