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Haridwar News: हिमालय संरक्षण के लिए 11 लाख पौधे लगाने का संकल्प
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फोटो
महामंडलेश्वर करौली शंकर महाराज ने हिमालय दिवस पर दिया प्रकृति संरक्षण का संदेश
संवाद न्यूज एजेंसी
हरिद्वार। महामंडलेश्वर करौली शंकर महाराज ने हिमालय दिवस पर प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने साधकों को हिमालय संरक्षण की प्रतिज्ञा दिलाई और देशभर में 11 लाख पौधे लगाने का संकल्प व्यक्त किया।
नेपाल में हुई प्राकृतिक त्रासदी से सबक लेते हुए उन्होंने अनियोजित विकास पर चिंता जताई। करौली शंकर महाराज ने मिश्रीमठ में पौधरोपण कर प्रकृति संरक्षण का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हिमालय करोड़ों लोगों के जीवन का आधार है। इसका संरक्षण समाज के प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है। हिमालयी क्षेत्र की संवेदनशील परिस्थितियां भूस्खलन, बादल फटने और भूकंप जैसी घटनाओं को बढ़ा रही हैं। विकास ऐसा हो जो आने वाली पीढ़ियों के लिए संकट न खड़ा करे।
जंगलों और जलस्रोतों का संरक्षण सबसे महत्वपूर्ण है। डॉ. उमेश सचान ने बताया कि संस्था के अनुयायी 11 लाख पौधों का रोपण करेंगे। पौधा एंबुलेंस भी चलाई जाएगी। करौली शंकर महाराज ने साधकों से पर्यावरण संरक्षण को केवल हिमालय दिवस तक सीमित न रखने को कहा।
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उन्होंने प्रत्येक व्यक्ति से जन्मदिन या विशेष अवसर पर पौधरोपण करने और उसकी देखभाल की जिम्मेदारी निभाने की अपील की। सनातन संस्कृति में प्रकृति को पूजनीय माना गया है। इसकी रक्षा हमारी सांस्कृतिक और नैतिक जिम्मेदारी है। लाखों लोग जब एक-एक पौधे की जिम्मेदारी उठाएंगे तो यह एक बड़ा अभियान बन सकता है।
वहीं, गुरुकुल कांगड़ी समविश्वविद्यालय के पर्यावरण विज्ञान विभाग ने हिमालय दिवस पर एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम में हिमालय संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी और जागरूकता विकसित करने पर जोर दिया गया। नमिता जोशी ने हिमालय की वर्तमान स्थिति पर प्रकाश डाला। विद्यार्थियों ने हिमालय की प्राकृतिक संपदा की रक्षा करने का संकल्प लिया। इस अवसर पर पोस्टर, स्लोगन, भाषण और कविता प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं।
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महामंडलेश्वर करौली शंकर महाराज ने हिमालय दिवस पर दिया प्रकृति संरक्षण का संदेश
संवाद न्यूज एजेंसी
हरिद्वार। महामंडलेश्वर करौली शंकर महाराज ने हिमालय दिवस पर प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने साधकों को हिमालय संरक्षण की प्रतिज्ञा दिलाई और देशभर में 11 लाख पौधे लगाने का संकल्प व्यक्त किया।
नेपाल में हुई प्राकृतिक त्रासदी से सबक लेते हुए उन्होंने अनियोजित विकास पर चिंता जताई। करौली शंकर महाराज ने मिश्रीमठ में पौधरोपण कर प्रकृति संरक्षण का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हिमालय करोड़ों लोगों के जीवन का आधार है। इसका संरक्षण समाज के प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है। हिमालयी क्षेत्र की संवेदनशील परिस्थितियां भूस्खलन, बादल फटने और भूकंप जैसी घटनाओं को बढ़ा रही हैं। विकास ऐसा हो जो आने वाली पीढ़ियों के लिए संकट न खड़ा करे।
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जंगलों और जलस्रोतों का संरक्षण सबसे महत्वपूर्ण है। डॉ. उमेश सचान ने बताया कि संस्था के अनुयायी 11 लाख पौधों का रोपण करेंगे। पौधा एंबुलेंस भी चलाई जाएगी। करौली शंकर महाराज ने साधकों से पर्यावरण संरक्षण को केवल हिमालय दिवस तक सीमित न रखने को कहा।
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उन्होंने प्रत्येक व्यक्ति से जन्मदिन या विशेष अवसर पर पौधरोपण करने और उसकी देखभाल की जिम्मेदारी निभाने की अपील की। सनातन संस्कृति में प्रकृति को पूजनीय माना गया है। इसकी रक्षा हमारी सांस्कृतिक और नैतिक जिम्मेदारी है। लाखों लोग जब एक-एक पौधे की जिम्मेदारी उठाएंगे तो यह एक बड़ा अभियान बन सकता है।
वहीं, गुरुकुल कांगड़ी समविश्वविद्यालय के पर्यावरण विज्ञान विभाग ने हिमालय दिवस पर एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम में हिमालय संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी और जागरूकता विकसित करने पर जोर दिया गया। नमिता जोशी ने हिमालय की वर्तमान स्थिति पर प्रकाश डाला। विद्यार्थियों ने हिमालय की प्राकृतिक संपदा की रक्षा करने का संकल्प लिया। इस अवसर पर पोस्टर, स्लोगन, भाषण और कविता प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं।