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पर्यूषण पर्व पर निकाली जल कलश यात्रा
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार
Updated Thu, 15 Sep 2016 10:37 PM IST
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ज्वालापुर के श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर में चल रहे पर्यूषण पर्व के अंतिम दिवस उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म पर प्रकाश डाला गया। दोपहर के समय भव्य जल कलश यात्रा अनेक झांकियों व बैंडबाजों के साथ निकाली गई। समापन पर 1008 कलशों से जलाभिषेक किया गया।
पर्यूषण पर्व के अंतिम दिन जैन समुदाय को संबोधित करते हुए संतोष जैन ने कहा कि व्यवहार मेें शारीरिक संयम का पालन कर काम को जीतने वाला ही ब्रह्मचारी कहलाता है। ज्ञान दर्शन से युक्त चैतन्य स्वभाव में डूब जाना, स्वयं को जानना और पहचानना ही ब्रह्म की यात्रा है। अपराहन चौक बाजार ज्वालापुर स्थित प्राचीन श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर से शुरू हुई भव्य जलकलश यात्रा नगर के विभिन्न मार्गों और बाजारों से गुजरी। एनआर भारती एंड कंपनी के मधुर भक्तिगीतों पर महिलाएं भावपूर्ण नृत्य करती चल रही थी। रास्ते में अग्रवाल सभा ज्वालापुर सहित कई संस्थाओं ने पुष्प वर्षा कर शोभायात्रा का स्वागत किया।
रविनंदन जैन ने बताया कि 18 सितंबर को सामुदायिक केन्द्र सेक्टर चार के निकट जैन मंदिर में पंचपुरी जैन समुदाय की ओर से भव्य क्षमावाणी पर्व मनाया जाएगा। शोभायात्रा में निर्मल कुमार जैन, सतीश जैन, यूसी जैन, विजय जैन, विनय पौद्दार, आशीष जैन, वकील चंद जैन, गिरीश जैन, पंकज जैन, गजेन्द्र जैन, डीके जैन, धनेन्द्र जैन, रजनीश, आरके जैन, बीएमएल जैन, पीके जैन आदि बड़ी संख्या में जैन धर्मावलंबी शामिल रहे।
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आंतरिक समृद्धि का सूचक है धर्म
पर्यूषण पर्व संपन्न होने पर ज्वालापुर जैन मंदिर से जुड़े रविनंदन कुमार जैन ने इसके 10 लक्षण बताते हुए कहा कि आज का मानव बाहर से समृद्धशाली और भीतर से खोखला हो रहा है। वह सुख शांति की खोज में भटकता फिरता है, जबकि शांति कहीं बाहर नहीं उसके हृदय में हैं। धर्म आंतरिक समृद्धि का सूचक है। जैन धर्म परंपरा मेें वर्तमान काल में 24 तीर्थांकर हुए। किसी भी तीर्थांकर का जन्म जैन कुल नहीं हुआ पर उन्होंने संसार के समस्त जीवों को जियो और जीने दो और अंहिसा परमोधर्म का संदेश दिया। रविनंदन कुमार जैन ने कहा कि राम, कृष्ण, गौतम, महावीर, ईसा मसीह, हजरत मौहम्मद साहब, गुरुनानक आदि जितनी भी पावन आत्माएं इस धरा पर प्रकट हुई हैं, उन्होंने त्याग कर कठोर साधना की और दया धर्म के मार्ग पर चलकर विश्व को मानवता का संदेश दिया।
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पर्यूषण पर्व के अंतिम दिन जैन समुदाय को संबोधित करते हुए संतोष जैन ने कहा कि व्यवहार मेें शारीरिक संयम का पालन कर काम को जीतने वाला ही ब्रह्मचारी कहलाता है। ज्ञान दर्शन से युक्त चैतन्य स्वभाव में डूब जाना, स्वयं को जानना और पहचानना ही ब्रह्म की यात्रा है। अपराहन चौक बाजार ज्वालापुर स्थित प्राचीन श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर से शुरू हुई भव्य जलकलश यात्रा नगर के विभिन्न मार्गों और बाजारों से गुजरी। एनआर भारती एंड कंपनी के मधुर भक्तिगीतों पर महिलाएं भावपूर्ण नृत्य करती चल रही थी। रास्ते में अग्रवाल सभा ज्वालापुर सहित कई संस्थाओं ने पुष्प वर्षा कर शोभायात्रा का स्वागत किया।
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रविनंदन जैन ने बताया कि 18 सितंबर को सामुदायिक केन्द्र सेक्टर चार के निकट जैन मंदिर में पंचपुरी जैन समुदाय की ओर से भव्य क्षमावाणी पर्व मनाया जाएगा। शोभायात्रा में निर्मल कुमार जैन, सतीश जैन, यूसी जैन, विजय जैन, विनय पौद्दार, आशीष जैन, वकील चंद जैन, गिरीश जैन, पंकज जैन, गजेन्द्र जैन, डीके जैन, धनेन्द्र जैन, रजनीश, आरके जैन, बीएमएल जैन, पीके जैन आदि बड़ी संख्या में जैन धर्मावलंबी शामिल रहे।
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आंतरिक समृद्धि का सूचक है धर्म
पर्यूषण पर्व संपन्न होने पर ज्वालापुर जैन मंदिर से जुड़े रविनंदन कुमार जैन ने इसके 10 लक्षण बताते हुए कहा कि आज का मानव बाहर से समृद्धशाली और भीतर से खोखला हो रहा है। वह सुख शांति की खोज में भटकता फिरता है, जबकि शांति कहीं बाहर नहीं उसके हृदय में हैं। धर्म आंतरिक समृद्धि का सूचक है। जैन धर्म परंपरा मेें वर्तमान काल में 24 तीर्थांकर हुए। किसी भी तीर्थांकर का जन्म जैन कुल नहीं हुआ पर उन्होंने संसार के समस्त जीवों को जियो और जीने दो और अंहिसा परमोधर्म का संदेश दिया। रविनंदन कुमार जैन ने कहा कि राम, कृष्ण, गौतम, महावीर, ईसा मसीह, हजरत मौहम्मद साहब, गुरुनानक आदि जितनी भी पावन आत्माएं इस धरा पर प्रकट हुई हैं, उन्होंने त्याग कर कठोर साधना की और दया धर्म के मार्ग पर चलकर विश्व को मानवता का संदेश दिया।