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लिव इन रिलेशंस दूषित समाज की मानसिकता : शास्त्री
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फोटो
ऋषिहुड विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने जानी भारतीय ज्ञान परंपरा
सभागार में डॉक्यूमेंट्री से दिखाई गुरुकुल की ज्ञान यात्रा
संवाद न्यूज एजेंसी
हरिद्वार। ऋषिहुड विश्वविद्यालय सोनीपत के प्राध्यापक, अधिकारी और विद्यार्थियों के प्रतिनिधिमंडल ने गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय का शैक्षणिक भ्रमण किया। सभागार में भारतीय ज्ञान परंपरा और गुरुकुल परंपरा जानी।
प्रो. दिनेश चंद्र शास्त्री ने कहा कि नमस्ते का मूल भाव आपके सामने झुककर हृदय की भावनाओं से समर्पण को दर्शाता है, जो अंग्रेजी संबोधन से प्राप्त नहीं हो सकता। लीव इन रिलेशंस के बढ़ते चलन दूषित समाज की मानसिकता है। कहा कि जीवन विवाह संस्कार के बिना अधूरा है।
कुलसचिव प्रो. सत्यदेव निगमालंकार ने विद्यार्थियों को वैश्विक बाजार का हिस्सा न बनकर भारतीय संस्कृति के संवाहक बनने पर बल दिया। विद्यार्थियों को गुरुकुल कांगड़ी विवि पर आधारित डॉक्यूमेंट्री दिखाई गई। डॉक्यूमेंट्री से उन्हें स्वामी श्रद्धानंद के जीवन दर्शन और गुरुकुल कांगड़ी विवि की स्थापना, विकास यात्रा और शैक्षणिक परंपरा से विद्यार्थियों को दिखाई।
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ऋषिहुड विश्वविद्यालय के अन्नु वासुदेव ने कहा कि गुरुकुल में भारतीय संस्कृति की सुगंध का अनुभव करना एक सुखद एहसास है। जिसका प्रभाव जीवन में सकारात्मक सोच का मार्ग प्रशस्त करता है। विजिट संयोजक डॉ. श्वेतांक आर्य ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन संस्थानों की ज्ञान परंपरा और विरासत को करीब से समझने का अवसर देते हैं। इस मौके पर प्रो. पंकज मदान, प्रो. एलपी पुरोहित, डॉ. विपुल भट्ट, डॉ. भारत वेदालंकार, डॉ. संदीप कुमार, मनोज कुमार, मदन लाल जाट, दुष्यंत राणा आदि मौजूद रहे।
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ऋषिहुड विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने जानी भारतीय ज्ञान परंपरा
सभागार में डॉक्यूमेंट्री से दिखाई गुरुकुल की ज्ञान यात्रा
संवाद न्यूज एजेंसी
हरिद्वार। ऋषिहुड विश्वविद्यालय सोनीपत के प्राध्यापक, अधिकारी और विद्यार्थियों के प्रतिनिधिमंडल ने गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय का शैक्षणिक भ्रमण किया। सभागार में भारतीय ज्ञान परंपरा और गुरुकुल परंपरा जानी।
प्रो. दिनेश चंद्र शास्त्री ने कहा कि नमस्ते का मूल भाव आपके सामने झुककर हृदय की भावनाओं से समर्पण को दर्शाता है, जो अंग्रेजी संबोधन से प्राप्त नहीं हो सकता। लीव इन रिलेशंस के बढ़ते चलन दूषित समाज की मानसिकता है। कहा कि जीवन विवाह संस्कार के बिना अधूरा है।
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कुलसचिव प्रो. सत्यदेव निगमालंकार ने विद्यार्थियों को वैश्विक बाजार का हिस्सा न बनकर भारतीय संस्कृति के संवाहक बनने पर बल दिया। विद्यार्थियों को गुरुकुल कांगड़ी विवि पर आधारित डॉक्यूमेंट्री दिखाई गई। डॉक्यूमेंट्री से उन्हें स्वामी श्रद्धानंद के जीवन दर्शन और गुरुकुल कांगड़ी विवि की स्थापना, विकास यात्रा और शैक्षणिक परंपरा से विद्यार्थियों को दिखाई।
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ऋषिहुड विश्वविद्यालय के अन्नु वासुदेव ने कहा कि गुरुकुल में भारतीय संस्कृति की सुगंध का अनुभव करना एक सुखद एहसास है। जिसका प्रभाव जीवन में सकारात्मक सोच का मार्ग प्रशस्त करता है। विजिट संयोजक डॉ. श्वेतांक आर्य ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन संस्थानों की ज्ञान परंपरा और विरासत को करीब से समझने का अवसर देते हैं। इस मौके पर प्रो. पंकज मदान, प्रो. एलपी पुरोहित, डॉ. विपुल भट्ट, डॉ. भारत वेदालंकार, डॉ. संदीप कुमार, मनोज कुमार, मदन लाल जाट, दुष्यंत राणा आदि मौजूद रहे।