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प्राकृतिक जलस्रोतों से हलक हो रहे तर
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चिल्लावाली रेंज में प्राकृतिक स्रोत में नहाते हाथियों के झुंड।
- फोटो : HARIDWAR
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राजाजी टाइगर रिजर्व की चिल्लावाली रेंज में आज से करीब 24 साल पहले प्राकृतिक जलस्रोतों को बचाने और उसके माध्यम से वन्यजीवों की प्यास बुझाने की जो पहल शुरू हुई थी, वह अब पूरी तरह से फल फूलने लगी है। 1998 में एक कुंआ बनाकर इसकी शुरूआत की गई और अब इनकी संख्या आठ हो गई है। अब इन कुंओं से न सिर्फ जंगली जानवरों की प्यास बुझ रही, विभाग के कर्मचारी भी अपनी जरूरत पूरी कर रहे। इनसे ही विभाग की नर्सरी की सिंचाई भी की जा रही है।
गर्मी के मौसम में जंगलों के अंदर वन्यजीवों के लिए पानी का संकट खड़ा हो जाता है। जंगलों में पानी नहीं मिलने से हाथी, गुलदार, सांभर आबादी क्षेत्रों में पहुंच जाते हैं। इससे न सिर्फ जंगली जानवर उत्पात मचाते हैं, बल्कि कई बार वन्यजीव और मानव संघर्ष भी देखने को मिलता है। जंगली जानवर पानी की तलाश में आबादी क्षेत्र में न आएं, इसके लिए जंगलों में वाटर होल बनाए जाते हैं। गर्मी के मौसम में पानी की उपलब्धता कराने के लिए सोलर पैनल लगाकर या फिर पंपिंग सेटों से पानी भरा जाता है। जहां यह व्यवस्था नहीं होती है, वहां टैंकरों से वाटर होल में पानी भरा जाता है। इस काम पर हर साल भारी भरकम खर्चा आता है। इसके बाद भी जंगली जानवरों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता।
दूसरी तरफ चिल्लावाली रेंज में वाटर होल में पानी की आपूर्ति प्राकृतिक स्रोत से की जाती है। यहां 1998 में प्राकृतिक जलस्रोतों को खोजने की शुरूआत हुई। प्राकृतिक जलस्रोत मिलने के बाद एक कुआं तैयार किया गया। इसके बाद धीरे-धीरे प्राकृतिक जलस्रोत के आठ कुएं बनाए जा चुके हैं। प्राकृतिक स्रोतों से कुएं से पाइप लाइन के जरिये वाटर होल और रेंज मुख्यालय समेत सभी वन चौकियों में पानी पहुंचाया जाता है। आज 24.5 किलोमीटर लंबी पाइप लाइन डालकर वन कर्मियों के साथ ही वन्यजीवों की प्यास बुझाई जा रही है। खास बात यह है कि इससे 24 घंटे कर्मियों और जंगली जानवरों के लिए पानी मिलता है।
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ऐसे बनाते हैं प्राकृतिक स्रोत से कुएं
प्राकृतिक जलस्रोतों को जंगल में तलाश किया जाता है। उन्हें लगातार वाच और शोध करके यह पता लगाया जाता है कि क्या यह प्राकृतिक जलस्रोत गर्मी के साथ ही लंबे समय तक पानी दे सकते हैं। प्राकृतिक जलस्रोतों से निकलने वाले पानी को चार से छह पाइप के जरिये कुएं में एकत्र किया जाता है। प्राकृतिक स्रोतों से कुएं में एकत्र पानी को पाइपों के जरिये सप्लाई किया जाता है।
रेंज क्षेत्र में 20 वाटर होल
चिल्लावाली रेंज के जंगल में कुल 20 वाटर होल हैं। जिनमें 12 कच्चे और 8 पक्के हैं। इन वाटर होल के पास हाथी, गुलदार, सांभर, हिरण और भालू को देखा जा सकता है।
रेंज क्षेत्र में प्राकृतिक जलस्रोतों से कुएं तैयार करने का अभियान लगातार जारी है। जिससे पिछले दो साल में भी तीन नए कुएं प्राकृतिक स्रोत से बनाए गए हैं। जिनसे 24 घंटे पानी की सप्लाई होती रहती है। रेंज में हर जगह प्राकृतिक स्रोतों से ही पानी की आपूर्ति की जाती है। इससे एक बार पैसा खर्च लंबे समय तक पानी की उपलब्धता रहती है।
- अनुराग शर्मा, रेंजर, चिल्लावाली रेंज राजाजी टाइगर रिजर्व
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गर्मी के मौसम में जंगलों के अंदर वन्यजीवों के लिए पानी का संकट खड़ा हो जाता है। जंगलों में पानी नहीं मिलने से हाथी, गुलदार, सांभर आबादी क्षेत्रों में पहुंच जाते हैं। इससे न सिर्फ जंगली जानवर उत्पात मचाते हैं, बल्कि कई बार वन्यजीव और मानव संघर्ष भी देखने को मिलता है। जंगली जानवर पानी की तलाश में आबादी क्षेत्र में न आएं, इसके लिए जंगलों में वाटर होल बनाए जाते हैं। गर्मी के मौसम में पानी की उपलब्धता कराने के लिए सोलर पैनल लगाकर या फिर पंपिंग सेटों से पानी भरा जाता है। जहां यह व्यवस्था नहीं होती है, वहां टैंकरों से वाटर होल में पानी भरा जाता है। इस काम पर हर साल भारी भरकम खर्चा आता है। इसके बाद भी जंगली जानवरों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता।
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दूसरी तरफ चिल्लावाली रेंज में वाटर होल में पानी की आपूर्ति प्राकृतिक स्रोत से की जाती है। यहां 1998 में प्राकृतिक जलस्रोतों को खोजने की शुरूआत हुई। प्राकृतिक जलस्रोत मिलने के बाद एक कुआं तैयार किया गया। इसके बाद धीरे-धीरे प्राकृतिक जलस्रोत के आठ कुएं बनाए जा चुके हैं। प्राकृतिक स्रोतों से कुएं से पाइप लाइन के जरिये वाटर होल और रेंज मुख्यालय समेत सभी वन चौकियों में पानी पहुंचाया जाता है। आज 24.5 किलोमीटर लंबी पाइप लाइन डालकर वन कर्मियों के साथ ही वन्यजीवों की प्यास बुझाई जा रही है। खास बात यह है कि इससे 24 घंटे कर्मियों और जंगली जानवरों के लिए पानी मिलता है।
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ऐसे बनाते हैं प्राकृतिक स्रोत से कुएं
प्राकृतिक जलस्रोतों को जंगल में तलाश किया जाता है। उन्हें लगातार वाच और शोध करके यह पता लगाया जाता है कि क्या यह प्राकृतिक जलस्रोत गर्मी के साथ ही लंबे समय तक पानी दे सकते हैं। प्राकृतिक जलस्रोतों से निकलने वाले पानी को चार से छह पाइप के जरिये कुएं में एकत्र किया जाता है। प्राकृतिक स्रोतों से कुएं में एकत्र पानी को पाइपों के जरिये सप्लाई किया जाता है।
रेंज क्षेत्र में 20 वाटर होल
चिल्लावाली रेंज के जंगल में कुल 20 वाटर होल हैं। जिनमें 12 कच्चे और 8 पक्के हैं। इन वाटर होल के पास हाथी, गुलदार, सांभर, हिरण और भालू को देखा जा सकता है।
रेंज क्षेत्र में प्राकृतिक जलस्रोतों से कुएं तैयार करने का अभियान लगातार जारी है। जिससे पिछले दो साल में भी तीन नए कुएं प्राकृतिक स्रोत से बनाए गए हैं। जिनसे 24 घंटे पानी की सप्लाई होती रहती है। रेंज में हर जगह प्राकृतिक स्रोतों से ही पानी की आपूर्ति की जाती है। इससे एक बार पैसा खर्च लंबे समय तक पानी की उपलब्धता रहती है।
- अनुराग शर्मा, रेंजर, चिल्लावाली रेंज राजाजी टाइगर रिजर्व