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गन्ने की फसल पर कंडुआ रोग का हमला
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जिले के कई इलाकों में गन्ने की फसल कंडुआ रोग की चपेट में आने लगी है। कृषि विज्ञान केंद्र धनौरी की ओर से कराए सर्वे में रोग का पता चला है। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक रोग गन्ने की फसल को चौपट कर सकता है। लिहाजा, रोग की पहचान कर कीटनाशक दवाओं का छिड़काव कर फसल को बचा सकते हैं।
कृषि विज्ञान केंद्र धनौरी के प्रभारी डॉ. पुरुषोत्तम कुमार के मुताबिक सर्वे में कृषि वैज्ञानिकों को हरिद्वार जिले के धनौरी, नारसन, लक्सर, भगवानपुर, बहादराबाद क्षेत्र के कई गांवों के खेतों में गन्ने में कंडुआ रोग मिला है। यह फफूंदी से फैलने वाला रोग है। रोगग्रस्त पौधों को नहीं हटाने पर यह झुंडों तक पहुंच जाता है। इससे गन्ने की बढ़ावार और उपज को नुकसान होता है। डॉ. पुरुषोत्तम कुमार के मुताबिक यह रोग मुख्यत: पेड़ी के खेतों में दिखाई देता है। रोग से ग्रसित पौधे की गोभ से काले रंग के कीड़े जैसी संरचना दिखाई देती है। काले रंग के पाउडर जैसे फफूंदी के बीजाणु झिल्ली से ढके रहते हैं।
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फसल का ऐसे करें बचाव
कृषि विज्ञान केंद्र धनौरी के प्रभारी डॉ. पुरुषोत्तम कुमार बताते हैं, रोग से फसल के बचाव के लिए गन्ने में बने चाबुक को देखते ही काटकर पॉलिथीन से ढककर खेत से बाहर निकाल लें। रोग की शुरुआत में टिल्ट या बंपर नाम के फफूंदीनाशक रसायन प्रोपिकोनाजोल 25 ईसी के 0.1 फीसदी घोल का छिड़काव करें। रोग वाले खेत का गन्ना बीज के इस्तेमाल न करें।
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कृषि विज्ञान केंद्र धनौरी के प्रभारी डॉ. पुरुषोत्तम कुमार के मुताबिक सर्वे में कृषि वैज्ञानिकों को हरिद्वार जिले के धनौरी, नारसन, लक्सर, भगवानपुर, बहादराबाद क्षेत्र के कई गांवों के खेतों में गन्ने में कंडुआ रोग मिला है। यह फफूंदी से फैलने वाला रोग है। रोगग्रस्त पौधों को नहीं हटाने पर यह झुंडों तक पहुंच जाता है। इससे गन्ने की बढ़ावार और उपज को नुकसान होता है। डॉ. पुरुषोत्तम कुमार के मुताबिक यह रोग मुख्यत: पेड़ी के खेतों में दिखाई देता है। रोग से ग्रसित पौधे की गोभ से काले रंग के कीड़े जैसी संरचना दिखाई देती है। काले रंग के पाउडर जैसे फफूंदी के बीजाणु झिल्ली से ढके रहते हैं।
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फसल का ऐसे करें बचाव
कृषि विज्ञान केंद्र धनौरी के प्रभारी डॉ. पुरुषोत्तम कुमार बताते हैं, रोग से फसल के बचाव के लिए गन्ने में बने चाबुक को देखते ही काटकर पॉलिथीन से ढककर खेत से बाहर निकाल लें। रोग की शुरुआत में टिल्ट या बंपर नाम के फफूंदीनाशक रसायन प्रोपिकोनाजोल 25 ईसी के 0.1 फीसदी घोल का छिड़काव करें। रोग वाले खेत का गन्ना बीज के इस्तेमाल न करें।
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