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दीपावली पर लक्ष्मी-गणेश पर भी महंगाई की मार
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दीपावली पर घरों और व्यवसायिक प्रतिष्ठानों पर सुख-समृद्धि के देवता भगवान गणेश और धन की देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है। इसके लिए मूर्तियां बनाने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। बाजार में चाइनीज गणेश-लक्ष्मी की धूम है। सस्ते होने के चलते इनकी अधिक मांग है, लेकिन शास्त्रों के अनुसार दीपावली पर मिट्टी के गणेश-लक्ष्मी का पूजन ही शुभ माना जाता है।
दीपावली पर्व गणेश-लक्ष्मी पूजन की प्राचीन परंपरा है। इस पर्व के लिए कुछ ही दिन शेष हैं। मूर्तियां बनाने में शिल्पकार पूरी जोर-शोर से जुटे हैं। कोई साचे में मूर्तियों को आकार दे रहा है तो कोई रंग कर उन्हें आकर्षक बना रहा है। बाजार में चाइना के बने गणेश-लक्ष्मी और अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां भले ही देशी मिट्टी की बनी मूर्तियों से सस्ती हों। धार्मिक परंपरा के अनुसार मिट्टी की बनी हुई मूर्तियां ही शुभ मानी जाती हैं। इसके चलते इन्हें बनाने वालों की मान्यता कम नहीं हुई है।
लखनऊ एवं आगरा में बनी प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियों की दीपावली पर दुकान लगाने वाले अनूप कुमार ने बताया कि इस बार बाजार में कोलकाता और बनारस से बनी हुई मूर्तियां आई हैं, जो अन्य मूर्तियों से अधिक आकर्षक हैं। उन्होंने बताया कि कोलकाता की बनी मूर्तियों में 200 से 1000 तक का गणेश-लक्ष्मी का अच्छा सेट मिल जाता है। वहीं लखनऊ की मूर्तियां 300 से 2000 हजार रुपये तक की हैं। बनारस की बनी मूर्तियां भी इन्हीं दामों में हैं।
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लखनऊ की मूर्तियां वजन में अधिक होती हैं। भगत सिंह चौक पर प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्ति बनाने वाले शिल्पकार मुन्ना लाल ने बताया कि आबादी बढ़ने के साथ तालाब और पोखर समाप्त हो गए हैं। इससे मूर्तियां बनाने के लिए काली मिट्टी अब नहीं मिल पाती, इसलिए पेरिस ऑफ प्लास्टर की मूर्तियों का चलन हो गया है। रंग और ब्रश भी महंगे हो गए हैं। मूर्तियों की रंगाई में काफी समय लगता है। इससे मजदूरी बढ़ जाती है।
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दीपावली पर्व गणेश-लक्ष्मी पूजन की प्राचीन परंपरा है। इस पर्व के लिए कुछ ही दिन शेष हैं। मूर्तियां बनाने में शिल्पकार पूरी जोर-शोर से जुटे हैं। कोई साचे में मूर्तियों को आकार दे रहा है तो कोई रंग कर उन्हें आकर्षक बना रहा है। बाजार में चाइना के बने गणेश-लक्ष्मी और अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां भले ही देशी मिट्टी की बनी मूर्तियों से सस्ती हों। धार्मिक परंपरा के अनुसार मिट्टी की बनी हुई मूर्तियां ही शुभ मानी जाती हैं। इसके चलते इन्हें बनाने वालों की मान्यता कम नहीं हुई है।
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लखनऊ एवं आगरा में बनी प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियों की दीपावली पर दुकान लगाने वाले अनूप कुमार ने बताया कि इस बार बाजार में कोलकाता और बनारस से बनी हुई मूर्तियां आई हैं, जो अन्य मूर्तियों से अधिक आकर्षक हैं। उन्होंने बताया कि कोलकाता की बनी मूर्तियों में 200 से 1000 तक का गणेश-लक्ष्मी का अच्छा सेट मिल जाता है। वहीं लखनऊ की मूर्तियां 300 से 2000 हजार रुपये तक की हैं। बनारस की बनी मूर्तियां भी इन्हीं दामों में हैं।
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लखनऊ की मूर्तियां वजन में अधिक होती हैं। भगत सिंह चौक पर प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्ति बनाने वाले शिल्पकार मुन्ना लाल ने बताया कि आबादी बढ़ने के साथ तालाब और पोखर समाप्त हो गए हैं। इससे मूर्तियां बनाने के लिए काली मिट्टी अब नहीं मिल पाती, इसलिए पेरिस ऑफ प्लास्टर की मूर्तियों का चलन हो गया है। रंग और ब्रश भी महंगे हो गए हैं। मूर्तियों की रंगाई में काफी समय लगता है। इससे मजदूरी बढ़ जाती है।