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गुरू ही परमात्मा का दूसरा स्वरूप हैं- स्वामी सुरेश मुनि

Sat, 05 Oct 2019 12:15 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sat, 05 Oct 2019 12:15 AM IST
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Guru is another form of God - Swami Suresh Muni
स्वत: मुनि आश्रम में ब्रह्मलीन स्वामी स्वत: प्रकाश महाराज की बरसी पर स्वामी सुरेश मुनि महाराज ने कहा कि गुरु ही परमात्मा का दूसरा स्वरूप हैं, जो शिष्य को ज्ञान की प्रेरणा देकर उसके कल्याण का मार्ग प्रशस्त करते हैं। उन्होंने कहा कि महापुरुषों का जीवन सदैव प्रेरणादायी होता है।
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शुक्रवार को भूपतवाला स्थित स्वत: मुनि आश्रम में ब्रह्मलीन स्वामी स्वत: प्रकाश महाराज की 34वीं बरसी पर संत समागम कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि महापुरुषों का जीवन सदैव प्रेरणादायी होता है। उनसे सभी को प्रेरणा लेकर मानव सेवा के लिए तत्पर रहना चाहिए। ब्रह्मलीन स्वामी स्वत: प्रकाश महाराज एक दिव्य महापुरुष थे। जिन्होंने अपने संपूर्ण जीवन में गरीब, असहाय निर्धन लोगों की सहायता कर समाज कल्याण में योगदान दिया। राष्ट्र कल्याण में उनके अहम योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। स्वामी परमात्म देव महाराज ने कहा कि महापुरुष केवल शरीर त्यागते हैं। समाज कल्याण के लिए उनकी आत्मा व्यवहारिक रूप से सदैव उपस्थित रहती है। स्वत: प्रकाश महाराज त्याग और तपस्या की प्रतिमूर्ति थे। धर्म प्रचार में उनके योगदान के लिए संत समाज सदैव उनका आभारी रहेगा। स्वामी हरिचेतनानंद महाराज ने कहा कि स्वत: प्रकाश मुनि संत समाज के प्रेरणा स्रोत थे। हिंदू समाज को गीता ज्ञान से जोड़ने के लिए उनके द्वारा चलाया गया अभियान सदैव स्मरणीय रहेगा। कार्यक्रम का संचालन स्वामी हरिहरानंद महाराज ने किया। इस अवसर पर पंडित पालाराम जोशी, स्वामी ज्ञानानंद, स्वामी हरिप्रकाश, महंत जमनादास, स्वामी शिवानंद, महंत प्रेमदास, महंत दुर्गादास, स्वामी रविदेव शास्त्री, स्वामी दिनेश दास, संत जगजीत सिंह, संत मंजीत सिंह, महंत मोहन सिंह, महंत तीरथ सिंह, महंत सूरज दास, स्वामी प्रकाशानंद, स्वामी जगदीशानंद, स्वामी चिदविलासानंद, महंत निर्मलदास, महंत जसविन्द्र सिंह, महंत सतनाम सिंह, महंत वेद मुनि, महंत धुनीदास, साध्वी माता पूर्णानंद आदि सहित सभी तेरह अखाड़ों के संत महंत सहित पंजाब, हरियाणा, यूपी, दिल्ली आदि से आए हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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