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Haridwar News: सरकारी स्कूलों के जर्जर हाल, खतरे में नौनिहाल

Sun, 27 Nov 2022 05:00 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sun, 27 Nov 2022 05:00 AM IST
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Government is beating the drum of new education policy
प्रदेश में नई शिक्षा नीति लागू हो चुकी है। सरकार इस बात का खूब ढोल पीट रही कि नई शिक्षा नीति लागू करने वाला उत्तराखंड देश का पहला प्रदेश है। इतना ही नहीं हर बार नया सत्र शुरू होने से पहले शिक्षा विभाग के अधिकारी दूसरे प्रदेशों का दौरा करते हैं और वहां के शिक्षा के मॉडल लागू करने की बात होती है। सरकार स्कूलों को प्राइवेट स्कूलों की तर्ज पर भी विकसित करने के दावे होते हैं। दूसरी तरफ जमीनी हकीकत कुछ और ही है। यह हकीकत दिखाने के लिए दूरस्थ के नहीं शहर के स्कूल काफी हैं।
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बात करते हैं ज्वालापुर के राजकीय प्राथमिक विद्यालय नंबर 2, 12 और 13 की। ये प्राथमिक विद्यालय आजादी के पहले या फिर आजादी मिलने के समय से किराए के भवनों में चल रहे हैं। इन स्कूलों के भवन की कहीं छत नहीं हैं तो कहीं बैठने के लिए कक्ष ही नहीं। शौचालय और बिजली-पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं की बात करना तो यहां बेमानी है। यह भवन किराये के होने के कारण विभाग इनकी मरम्मत नहीं करवा पा रहा है। नई जगह पर भवन बनाने के लिए जमीन नहीं मिलने का रोना रो रहा है।
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राजकीय प्राथमिक विद्यालय नंबर 13 कस्साबान 1950 से किराए के भवन में संचालित होता आ रहा है। स्कूल में कुल 86 बच्चे हैं और तीन शिक्षकों की तैनाती है। स्कूल भवन जर्जर हाल में है। प्रधानाध्यापक बीना पाल ने बताया कि स्कूल में पोलिंग बूथ भी बनाया गया है। इसलिए शिक्षा विभाग से लेकर डीएम तक चुनाव के दौरान आते हैं। स्कूल के जर्जर भवन को देखकर पोलिंग बूथ भी बदलने की बात कहकर जाते हैं, पर आज तक हुआ कुछ नहीं है।
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बारिश के दिन करनी पड़ती छुट्टी
पीठ बाजार ज्वालापुर राजकीय प्राथमिक विद्यालय नंबर-02 1946 से किराए के भवन में चल रहा है। स्कूल में वर्तमान समय में 74 बच्चे पंजीकृत हैं। प्रधानाध्यापक ज्योति राजपूत ने बताया कि स्कूल में बच्चों के बैठने के लिए कोई कक्ष नहीं है। केवल दोनों तरफ बरामदे हैं। ऐसे में ज्यादा बारिश होने पर छुट्टी करनी पड़ती है।
बारिश और गर्मी में पन्ने के नीचे होती है पढ़ाई
राजकीय प्राथमिक विद्यालय नंबर-12 पीठ बाजार झंडा चौक ज्वालापुर में 65 बच्चे पंजीकृत हैं, लेकिन स्कूल में भवन तो हैं, लेकिन छत नहीं हैं। बच्चों को खुले आसमान के नीचे बैैठाकर पढ़ाने के लिए शिक्षक विवश हैं। बारिश और गर्मी के मौसम में बच्चों को तिरपाल के नीचे बैठाकर पढ़ाया जाता है। स्कूल के प्रधानाध्यापक सुधीर कुमार चौबे ने बताया कि भवन न होने के कारण बच्चों को बड़ी समस्याओं के बीच पढ़ाया जा रहा है।

किराए की जगह होने से विभाग भवन नहीं बना सकता है। सरकारी भवन बनाने के लिए जमीनें भी नहीं मिल रही है। कुछ वैकल्पिक व्यवस्था करने के लिए सरकार को लगातार पत्राचार किया जा रहा है। पर अभी तक कोई व्यवस्था नहीं की गई है। जैसे ही कोई नई व्यवस्था होगी बच्चों को नए भवनों में शिफ्ट कर दिया जाएगा।
- एसपी सेमवाल, जिला शिक्षा अधिकारी, प्राथमिक शिक्षा हरिद्वार
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