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हरिद्वार: खुद को नाबालिग साबित करना पड़ा भारी, 8वीं की फर्जी टीसी लगाई, जांच में 18 साल का निकला आरोपी, मुकदमा

Tue, 06 Oct 2026 12:27 PM IST
Renu Saklani माई सिटी रिपोर्टर, हरिद्वार
माई सिटी रिपोर्टर, हरिद्वार Published by: Renu Saklani Updated Tue, 06 Oct 2026 12:27 PM IST
सार

किशोरी को बहला-फुसलाकर ले जाने के मामले में आरोपी की उम्र को लेकर नया खुलासा हुआ है। पुलिस जांच में दस्तावेज पर संदेह के बाद उसकी पड़ताल की गई तो टीसी फर्जी मिली, जिसके बाद मामले में एक और मुकदमा दर्ज किया गया।

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Fake transfer certificate used to show accused as minor 18-year old found in haridwar POCSO case
पुलिस - फोटो : प्रतीकात्मक

विस्तार

हरिद्वार सिडकुल थाना क्षेत्र से किशोरी को बहला-फुसलाकर ले जाने के मामले में आरोपी को खुद को नाबालिग साबित करना भारी पड़ गया। आरोप है कि आरोपी और उसके परिजनों ने विवेचना के दौरान आठवीं कक्षा की कथित टीसी पुलिस को उपलब्ध कराई। उम्र घटना के समय 18 वर्ष से कम दर्शाई थी। जांच में टीसी फर्जी निकली। इसके बाद अब पुलिस ने अलग से प्राथमिकी दर्ज की है।

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पुलिस के अनुसार, थाना क्षेत्र के रहने वाले एक व्यक्ति ने छह अगस्त 2026 को अपनी बेटी की गुमशुदगी दर्ज कराई थी। बाद में विद्यालय की टीसी से उसकी जन्मतिथि 21 जुलाई 2009 सामने आई, जिससे उसके नाबालिग होने की पुष्टि हुई। इसके बाद गुमशुदगी को 12 अगस्त को अपहरण के मामले में तरमीम कर जांच शुरू की।

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किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष आत्मसमर्पण किया था
किशोरी को बरामद कर बयानों के आधार पर पोक्सो एक्ट व अन्य धाराएं बढ़ाई। जांच में सीताबपुरी, मुजफ्फरनगर निवासी विशाल का नाम सामने आया। इसके बाद विशाल के परिजनों ने सनबीम इंटर कॉलेज, अब्दुल्लापुर मेरठ की कक्षा आठ की टीसी की छायाप्रति पुलिस को उपलब्ध कराई। इसमें उसकी उम्र 18 वर्ष से कम दर्शाई गई थी। इसी आधार पर विशाल ने किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष आत्मसमर्पण किया था।

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पांच सितंबर को उसे न्यायिक सुरक्षा अभिरक्षा में प्लेस ऑफ सेफ्टी भेजा था। विवेचक मनीषा नेगी ने टीसी को संबंधित विद्यालय से सत्यापित कराया। विद्यालय ने लिखित रूप से बताया कि टीसी उनके यहां की नहीं है। इसे फर्जी बताया। पुलिस ने विशाल की शैक्षिक जानकारी स्वामी कल्याणदेव इंटरमीडिएट कॉलेज, मोरना से सत्यापित कराई। दसवीं की अंकतालिका में उसकी जन्मतिथि 15 मार्च 2008 दर्ज मिली।



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अंकतालिका और प्रधानाचार्य के बयान के आधार पर घटना के समय विशाल की उम्र 18 वर्ष होने की बात सामने आई। इसके बाद उसे प्लेस ऑफ सेफ्टी से पॉक्सो कोर्ट में पेश किया, जहां जेल भेज दिया था। जहां वह वर्तमान में न्यायिक अभिरक्षा में निरुद्ध है। सीओ सदर सुरेंद्र प्रसाद ने बताया कि फर्जी टीसी बनाने के मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई है। इस संबंध में आगे की जांच की जा रही है।



 

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