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कांबोथैरेपी से डेंगू व चिकनगुनिया का इलाज संभव

Tue, 27 Sep 2016 10:52 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार Updated Tue, 27 Sep 2016 10:52 PM IST
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डा. विजय वम्रा ने डेंगू और चिकनगुनिया का कांबोथैरेपी से इलाज का दावा किया है। उन्होंने एलोपैथी, आयुर्वेद और पंचकर्म को मिलाकर इलाज की यह नई पद्धति बनाई है। एलोपैथी, आयुर्वेद और पंचकर्म के विशेषज्ञों की राय पर अब एम्स दिल्ली सहित कई बड़े मेडिकल इंस्टीटयूट में कांबोथैरेपी के क्लीनिकल ट्रायल की तैयारी चल रही है।

उत्तराखंड से लेकर यूपी दिल्ली तक डेंगू और चिकनगुनिया से हाहाकार मचा हुआ है। प्लेटलेट्स कम निकलते ही मरीजों को बड़े शहरों की दौड़ लगानी पड़ रही है। हाल यह है कि सरकारी अस्पतालों में सुविधाएं नहीं है और निजी अस्पतालों के महंगे इलाज मरीजों की कमर तोड़ रहे हैं। हरिद्वार में ललतारौ पुल के समीप अपना पॉली क्लीनिक चलाने वाले डा. विजय वर्मा एलोपैथी, आयुर्वेदिक और पंचकर्म को मिलाकर डेंगू, स्वाइन फ्लू व चिकनुनिया सहित कई असाध्य रोगों का किफायती खर्च में इलाज कर रहे हैं। एमबीबीएस गोल्ड मेडलिस्ट डा. वर्मा से इलाज के लिए दूर-दूर से मरीज पहुुंच रहे हैं। एलोपैथी से कम खर्च होने से डा. विजय वर्मा ने इस विधि को सरकारी अस्पतालों में लागू करने के लिए सरकार को चिट्ठी भेजी थी। जिस पर सरकार ने तीनों विशेषज्ञों का पैनल बनाया। डा. विजय वर्मा की मुख्यमंत्री हरीश रावत के बाद विशेषज्ञों के सामने प्रस्तुति के बाद पैनल ने क्लीनिकल टेस्ट की संस्तुति की है। डा. विजय वर्मा ने बताया कि एम्स दिल्ली व देहरादून सहित कई मेडिकल संस्थानों में जल्द ही कांबोथैरेपी का क्लीनिकल टेस्ट किया जाएगा।
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ऐसे काम करती है विधि
डा. विजय वर्मा के मुताबिक इस विधि में गुदा के रास्ते दवाई सीधे मरीज के पेट में पहुंचाई जाती है। एलोपैथिक दवाओं के अलावा गाय का दूध, ऑयल सहित आयुर्वेदिक दवाइयों व पंचकर्म विधियां भी अपनाई जाती है। डा. वर्मा का दावा है कि प्लेटलेट्स कम होने पर अगर मुंह से खून आने लगे तो इस विधि से दो घंटे में बंद हो सकता है और 24 घंटे में प्लेटलेट्स बढ़ने शुरू हो जाते हैं। तीन दिन में आधे से ज्यादा सुधार आने पर हफ्ते भर में मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो सकता है। खास बात यह है कि इसमें मरीज को भर्ती होने की जरूरत नहीं है, सिर्फ दो घंटे रोजाना इलाज के लिए आना पड़ता है।
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