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बेलड़ी गांव से लापता हुए थे दो बच्चे, 15 लाख की मांगी गई थी फिरौती
ब्यूरो/अमर उजाला, रुड़की
Updated Sun, 17 May 2015 01:43 AM IST
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बेलड़ी गांव सेे लापता साढ़े चार साल के मासूम राजेश्वर को पुलिस ने बरामद कर लिया है। वह लापता नहीं हुआ था बल्कि ताऊ-ताई ने संपत्ति के विवाद के चलते अपहरण कराया था। अपहरण के बाद 15 लाख की फिरौती मांगी गई थी।
शनिवार को कोतवाली में आयोजित पत्रकार वार्ता में एसएसपी स्वीटी अग्रवाल ने बताया कि 10 मई को बेलड़ी गांव निवासी दिनेश पुत्र चमन लाल ने कोतवाली में अपने बेटे कृष्णा और छोटे भाई सुरेश के बेटे राजेश्वर की गुमशुदगी दर्ज कराई थी। गांव के तालाब में डूब जाने की आशंका के चलते तालाब से पानी भी निकलवाया गया, लेकिन बच्चों का सुराग नहीं लगा।
संपत्ति के विवाद में चलते कराया था अपहरण
पुलिस को शक होने पर दिनेश की पत्नी संयोगिता से कड़ाई से पूछताछ की तो उसने सारा राज उगल दिया। संयोगिता ने बताया कि उसके ससुर ने कुछ समय पहले अपने हिस्से की जमीन छोटे बेटे सुरेश की बेटी सलोनी के नाम पर कर दी थी, जिससे वह नाराज थी। ऐसे में उसने सुरेश के बेटे का अपहरण कराने और उसे छोड़ने के बदले पैसे ऐंठने की योजना बनाई।
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ताऊ-ताई ने कराया था मासूम का अपहरण
योजना में उसने कुछ साल पहले तक अपने यहां किरायेदार रहे दीपक शर्मा पुत्र जनेश्वर निवासी गदरजुड्डा, उसके साथी रवि उर्फ सूरज और सुनील उर्फ सोनू निवासी मोहल्ला खालसा मंगलौर के साथ राजेश्वर का अपहरण करा दिया। शक न हो इसके लिए अपने पांच साल के बेटे कृष्णा को भी उनके साथ भेज दिया। तब से यह लोग दोनों बच्चों को अलग-अलग स्थान पर रखते रहे।
शुक्रवार शाम पुलिस ने रावली महदूद के पास रामधाम कालोनी निवासी स्थित एक निर्माणाधीन मकान पर छापा मारकर दोनों बच्चों को बरामद कर लिया। पूछताछ में पता चला कि संयोगिता ही नौ मई को दोनों बच्चों को जंगल में दीपक उसके साथियों को सौंप गई थी। एसएसपी ने बताया कि इसके बाद दीपक इन बच्चों को लेकर गदरजुुड्ड़ा गया, लेकिन वहां ठिकाना न मिलने पर दोनों बच्चों को रावली महदूद गांव में ले गया था।
पुलिस ने दंपति समेत पांच को किया गिरफ्तार
पुलिस ने ताऊ और ताई के अलावा अपहरण में शामिल रहे तीन अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया है।
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शनिवार को कोतवाली में आयोजित पत्रकार वार्ता में एसएसपी स्वीटी अग्रवाल ने बताया कि 10 मई को बेलड़ी गांव निवासी दिनेश पुत्र चमन लाल ने कोतवाली में अपने बेटे कृष्णा और छोटे भाई सुरेश के बेटे राजेश्वर की गुमशुदगी दर्ज कराई थी। गांव के तालाब में डूब जाने की आशंका के चलते तालाब से पानी भी निकलवाया गया, लेकिन बच्चों का सुराग नहीं लगा।
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संपत्ति के विवाद में चलते कराया था अपहरण
पुलिस को शक होने पर दिनेश की पत्नी संयोगिता से कड़ाई से पूछताछ की तो उसने सारा राज उगल दिया। संयोगिता ने बताया कि उसके ससुर ने कुछ समय पहले अपने हिस्से की जमीन छोटे बेटे सुरेश की बेटी सलोनी के नाम पर कर दी थी, जिससे वह नाराज थी। ऐसे में उसने सुरेश के बेटे का अपहरण कराने और उसे छोड़ने के बदले पैसे ऐंठने की योजना बनाई।
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ताऊ-ताई ने कराया था मासूम का अपहरण
योजना में उसने कुछ साल पहले तक अपने यहां किरायेदार रहे दीपक शर्मा पुत्र जनेश्वर निवासी गदरजुड्डा, उसके साथी रवि उर्फ सूरज और सुनील उर्फ सोनू निवासी मोहल्ला खालसा मंगलौर के साथ राजेश्वर का अपहरण करा दिया। शक न हो इसके लिए अपने पांच साल के बेटे कृष्णा को भी उनके साथ भेज दिया। तब से यह लोग दोनों बच्चों को अलग-अलग स्थान पर रखते रहे।
शुक्रवार शाम पुलिस ने रावली महदूद के पास रामधाम कालोनी निवासी स्थित एक निर्माणाधीन मकान पर छापा मारकर दोनों बच्चों को बरामद कर लिया। पूछताछ में पता चला कि संयोगिता ही नौ मई को दोनों बच्चों को जंगल में दीपक उसके साथियों को सौंप गई थी। एसएसपी ने बताया कि इसके बाद दीपक इन बच्चों को लेकर गदरजुुड्ड़ा गया, लेकिन वहां ठिकाना न मिलने पर दोनों बच्चों को रावली महदूद गांव में ले गया था।
पुलिस ने दंपति समेत पांच को किया गिरफ्तार
पुलिस ने ताऊ और ताई के अलावा अपहरण में शामिल रहे तीन अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया है।