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बहेगी सांस्कृतिक लोकरंग की गंगा
ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
Updated Fri, 12 Feb 2016 12:16 AM IST
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हरिद्वार। अर्द्धकुंभ मेले में अब धार्मिक आयोजनों के साथ देश की विभिन्न लोक संस्कृति की गंगा भी बहेगी। गंगा किनारे 25 फरवरी से विविधता में एकता देश की बहुरंगी, इंद्रधनुषी संस्कृति की गंगा भी बहेगी। देश और प्रदेश के बहुआयामी विकास एवं हस्तशिल्प प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। इसके लिए हरकी पैड़ी के अपस्ट्रीम में गंगा की अविच्छिन्न धारा के साथ पंतद्वीप के विशाल मैदान में सांस्कृतिक और प्रदर्शनी पंडाल बनाए जा रहे हैं।
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अर्द्धकुंभ मेला प्रशासन ने इस आयोजन की जिम्मेदारी पर्यटन विकास विभाग और सूचना एवं जनसंपर्क विभाग को दी है। शहर के बीच में होने के कारण सांस्कृतिक एवं विकास प्रदर्शनी के पंडाल आकर्षण का केंद्र होंगे। देश के लगभग सभी प्रांतों के लोक कलाकार अर्द्धकुंभ के सांस्कृतिक पंडाल में अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे। एक ओर जहां उत्तराखंड के लोक वाद्य यंत्र से ढोल दमाऊं की थाम सुनाई देगी तो वहीं पंजाब का भंगड़ा भी धूम भी मचेगी। हरियाणा की रांगणी की बहार और राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार, जम्मू एवं कश्मीर, हिमाचल प्रदेश आदि राज्यों की लोक संस्कृति से भी लोग रूबरू होंगे। इसके साथ ही शहरवासियों और अर्द्धकुंभ में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को देश के बहुआयामी विकास और औद्योगिक विकास की झलक प्रदर्शनी के माध्यम से देखने को मिलेगी।
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मेला प्रशासन ने शहरवासियों के साथ ही अधिक से अधिक श्रद्धालुओं, पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए पंतद्वीप में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की गंगा बहाने का निर्णय लिया है। लोगों को पंतद्वीप मैदान अलग ही लुक में दिखाई देगा। मैदान में रिंग रोड बनाई गई है और स्थायी रूप से स्ट्रीट लाइटिंग और पानी की व्यवस्था की गई है।
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एलईडी डिस्पले से लाइव प्रसारण होगा
अर्द्घकुंभ मेलाधिकारी एसए मुरुगेशन ने बताया कि सांस्कृतिक कार्यक्रम और विकास प्रदर्शनी 25 फरवरी से प्रारंभ होकर अप्रैल के प्रथम सप्ताह तक चलेेगी। इसके लिए दो बड़े हाल बनाए जा रहे हैं। सांस्कृतिक कार्यक्रम एलईडी डिस्पले से लाइव होंगे और वे श्रद्घालु भी उनका आनंद ले सकेंगे जो हाल के अंदर नहीं होंगे। प्रदर्शनी हाल में 200 स्टाल लगेंगे। जिसमें सरकारी, औद्योगिकी, हस्तशिल्प, खादी ग्रामोद्योग, पर्यटन विकास एवं एनजीओ के कार्यों की प्रदर्शन प्रदर्षित की जाएगी। प्रदर्शनी दिनभर लोगों के लिए खुली रहेगी और शाम को संध्या के सांस्कृतिक कार्यक्रमों के समय बंद रहेगी। पंतद्वीप मैदान को स्थायी रूप से संवारा गया है जो भविष्य में भी काम आएगा।