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आबादी क्षेत्र में गजराज ने मचाया जमकर उत्पात
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क्षेत्र में शनिवार रात गंगा पार करके आए हाथियों के एक झुंड ने दिन में आबादी क्षेत्र में जमकर उत्पात मचाया। सूचना पर पहुंची वन विभाग की टीम ने बमुश्किल तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद हाथियों को जंगल में खदेड़ा।
पथरी क्षेत्र में हाथियों की धमक बढ़ रही है। किसानों की फसलों को रौंद रहे हैं। वन विभाग के कर्मी गश्त करने के साथ ही किसान भी रातभर खेतों में पहरा दे रहे हैं। बावजूद इसके शनिवार रात करीब आठ बजे पांच हाथियों का एक झुंड बिशनपुर, पुरानी कुंडी, चांदपुर, कटारपुर व जियापोता, रानीमाजरा के किसानों के खेतों में आ धमका। हाथियों को जंगल की तरफ दौड़ाने के लिए वन विभाग और किसान रातभर लगे रहे लेकिन हाथी जंगल में जाने के बजाय खेतों में ही दौड़ लगाते रहे। दो हाथी ही जंगल लौटे। तीन हाथी रविवार सुबह गांव जियापोता में करीब सुबह सात बजे खेतों से निकलकर आबादी क्षेत्र में पहुंच गए। ग्रामीणों ने तुरंत सूचना वन विभाग को दी। सूचना
मिलने पर रेंजर दिनेश प्रसाद नौड़ियाल बड़ी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। वनकर्मियों की अलग-अलग दस टीमें बनाकर हाथियों को जंगल की तरफ भेजने के लिए लगाया गया। करीब 10 बजे के आसपास काफी मशक्कत के बाद हाथियों को जंगल में भगाया गया। किसानों ने वन विभाग से नष्ट फसलों का मुआवजा मांगा है। ठाकुर अक्षय कुमार, नकली सिंह, अब्दुल सलाम, सुखदेव पाल, ब्रजपाल, नूतन कुमार, अकरम अली आदि का कहना है कि हाथी लगातार आबादी में आ रहे हैं। हाथियों को आबादी क्षेत्र में आने से रोकने के लिए वन विभाग नाकाम साबित हो रहा है। इसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है। वन विभाग हाथियों को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए।
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गश्त टीम हाथियों की रोकथाम के लिए दिनरात लगी रहती है फिर भी हाथी कहीं न कहीं मौका पाकर आबादी क्षेत्र में पहुंच जा रहे हैं। अब योजना बनाकर हाथियों की घुसपैठ रोकी जाएगी। - दिनेश प्रसाद नौडियाल, रेंजर, हरिद्वार
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पथरी क्षेत्र में हाथियों की धमक बढ़ रही है। किसानों की फसलों को रौंद रहे हैं। वन विभाग के कर्मी गश्त करने के साथ ही किसान भी रातभर खेतों में पहरा दे रहे हैं। बावजूद इसके शनिवार रात करीब आठ बजे पांच हाथियों का एक झुंड बिशनपुर, पुरानी कुंडी, चांदपुर, कटारपुर व जियापोता, रानीमाजरा के किसानों के खेतों में आ धमका। हाथियों को जंगल की तरफ दौड़ाने के लिए वन विभाग और किसान रातभर लगे रहे लेकिन हाथी जंगल में जाने के बजाय खेतों में ही दौड़ लगाते रहे। दो हाथी ही जंगल लौटे। तीन हाथी रविवार सुबह गांव जियापोता में करीब सुबह सात बजे खेतों से निकलकर आबादी क्षेत्र में पहुंच गए। ग्रामीणों ने तुरंत सूचना वन विभाग को दी। सूचना
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मिलने पर रेंजर दिनेश प्रसाद नौड़ियाल बड़ी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। वनकर्मियों की अलग-अलग दस टीमें बनाकर हाथियों को जंगल की तरफ भेजने के लिए लगाया गया। करीब 10 बजे के आसपास काफी मशक्कत के बाद हाथियों को जंगल में भगाया गया। किसानों ने वन विभाग से नष्ट फसलों का मुआवजा मांगा है। ठाकुर अक्षय कुमार, नकली सिंह, अब्दुल सलाम, सुखदेव पाल, ब्रजपाल, नूतन कुमार, अकरम अली आदि का कहना है कि हाथी लगातार आबादी में आ रहे हैं। हाथियों को आबादी क्षेत्र में आने से रोकने के लिए वन विभाग नाकाम साबित हो रहा है। इसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है। वन विभाग हाथियों को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए।
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गश्त टीम हाथियों की रोकथाम के लिए दिनरात लगी रहती है फिर भी हाथी कहीं न कहीं मौका पाकर आबादी क्षेत्र में पहुंच जा रहे हैं। अब योजना बनाकर हाथियों की घुसपैठ रोकी जाएगी। - दिनेश प्रसाद नौडियाल, रेंजर, हरिद्वार