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हमारे मूल्य, मान्यताएं, पहचान भाषा से: बत्रा
Updated Wed, 21 Feb 2018 11:24 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
एसएमजेएन पीजी कालेज में अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर मातृभाषा दिवस मनाने का उद्देश्य भारतीय भाषाओं और भाषाई विविधता को बढ़ावा देना, भाषाओं का संरक्षण और संवर्द्धन का संकल्प लिया गया।
बुधवार को कालेज में आयोजित मातृभाषा दिवस पर प्राचार्य डा. सुनील कुमार बत्रा ने कहा कि सांस्कृतिक संगठन यूनेस्को की ओर से वर्ष 1999 में 21 फरवरी को अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मनाने की घोषणा की गई थी। डा. बत्रा ने बताया कि भाषा एक भावनात्मक मुद्दा है, क्योंकि यह हमारे सामाजिक जीवन से जुड़ी है। यह भावनाओं और विचारों की अभिव्यक्ति को सशक्त बनाती है। यह सामूहिक पहचान और बंधुत्व को बढ़ाती है। कहा कि हमारे मूल्य, हमारी मान्यताएं और हमारी पहचान इसमें सन्निहित हैं। डा. बत्रा ने कहा कि भारत विविध भाषाओं और संस्कृतियों का संगम स्थल है।
हिंदी विभाग की शिक्षिका डा. आशा शर्मा व डा. निशा शर्मा ने कहा कि भाषा संस्कृति की जीवन रेखा होती है। इस अवसर पर डा. जगदीश चंद्र आर्य, डा. सुषमा नयाल, डा. किरण असवाल, डा. कुसुम नेगी, कार्यालय अधीक्षक मोहन चंद पांडेय, वेद प्रकाश चौहान, राजकुमार, संजीत कुमार, डा. मनोज सोही, डा. रिंकू बतरानी, डा. रीतू चौधरी, डा. शिवकुमार चौहान, अंकित अग्रवाल, डा. विशाखा शर्मा, डा. निवेदिता शर्मा सहित छात्र रजत मिश्रा, आरती सैनी, सचिन कश्यप, मोईन खान, सलीम अली, मीनाक्षी, हसीन, विवेक ठाकुर, तनुप्रिया, भव्या, मानस, सरोज, सम्राट कुमार, काजल, राध, प्रगति, पल्लवी, अभिषेक, तन्मय आदि छात्र-छात्रा उपस्थित थे।
हरिद्वार।
एसएमजेएन पीजी कालेज में अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर मातृभाषा दिवस मनाने का उद्देश्य भारतीय भाषाओं और भाषाई विविधता को बढ़ावा देना, भाषाओं का संरक्षण और संवर्द्धन का संकल्प लिया गया।
बुधवार को कालेज में आयोजित मातृभाषा दिवस पर प्राचार्य डा. सुनील कुमार बत्रा ने कहा कि सांस्कृतिक संगठन यूनेस्को की ओर से वर्ष 1999 में 21 फरवरी को अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मनाने की घोषणा की गई थी। डा. बत्रा ने बताया कि भाषा एक भावनात्मक मुद्दा है, क्योंकि यह हमारे सामाजिक जीवन से जुड़ी है। यह भावनाओं और विचारों की अभिव्यक्ति को सशक्त बनाती है। यह सामूहिक पहचान और बंधुत्व को बढ़ाती है। कहा कि हमारे मूल्य, हमारी मान्यताएं और हमारी पहचान इसमें सन्निहित हैं। डा. बत्रा ने कहा कि भारत विविध भाषाओं और संस्कृतियों का संगम स्थल है।
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हिंदी विभाग की शिक्षिका डा. आशा शर्मा व डा. निशा शर्मा ने कहा कि भाषा संस्कृति की जीवन रेखा होती है। इस अवसर पर डा. जगदीश चंद्र आर्य, डा. सुषमा नयाल, डा. किरण असवाल, डा. कुसुम नेगी, कार्यालय अधीक्षक मोहन चंद पांडेय, वेद प्रकाश चौहान, राजकुमार, संजीत कुमार, डा. मनोज सोही, डा. रिंकू बतरानी, डा. रीतू चौधरी, डा. शिवकुमार चौहान, अंकित अग्रवाल, डा. विशाखा शर्मा, डा. निवेदिता शर्मा सहित छात्र रजत मिश्रा, आरती सैनी, सचिन कश्यप, मोईन खान, सलीम अली, मीनाक्षी, हसीन, विवेक ठाकुर, तनुप्रिया, भव्या, मानस, सरोज, सम्राट कुमार, काजल, राध, प्रगति, पल्लवी, अभिषेक, तन्मय आदि छात्र-छात्रा उपस्थित थे।
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