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गंगा प्रेमियों को सता रही आत्मबोधानंद के प्राणों की चिंता

Tue, 26 Mar 2019 11:44 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Tue, 26 Mar 2019 11:44 PM IST
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गंगा प्रेमियों को सता रही आत्मबोधानंद के प्राणों की चिंता
ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार। गंगा की अविरलता की मांग को लेकर मातृसदन में ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद के अनशन को 152 दिन पूरे हो गए हैं, लेकिन सरकार की अनदेखी के कारण गंगा प्रेमियों को ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद के प्राणों की चिंता सता रही है। कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय सहित अन्य लोग चाहते हैं कि चिपको आंदोलन के प्रणेता सुंदरलाल बहुगुणा से मध्यस्थता करवा आत्मबोधानंद के अनशन को चुनाव तक टलवाया जाए।
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कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने बताया कि ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद का स्वास्थ्य सभी गंगा प्रेमियों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है, लेकिन सरकार की ओर से इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री को गंगा की रक्षा के लिए अनशन कर रहे संतों के लिए यदि कुछ करना होता तो वह पहले ही कर देते। अब चुनाव में प्रधानमंत्री भी व्यस्त हो गए हैं। जिस कारण अब सरकार की तरफ से कोई निर्णय वैसे भी नहीं लिया जाएगा। बताया कि यदि मई में चुनाव परिणाम आने तक आत्मबोधानंद का अनशन जारी रहा तो उनके प्राण संकट में पड़ सकते हैं। इसके लिए उन्होंने कई गंगा प्रेमियों से वार्ता कर सुझाव दिए हैं कि आत्मबोधानंद को अनशन समाप्त कर देना चाहिए या चुनाव परिणाम घोषित होते तक फलाहार लेना चाहिए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि यदि अनशन दिल्ली में किया जाए तो इसका व्यापक असर पड़ेगा। उन्होंने गंगा की रक्षा के लिए स्वयं की तरफ से हर संभव योगदान करने का आश्वासन दिया।
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किशोर उपाध्याय ने बताया कि चिपको आंदोलन के प्रणेता सुंदरलाल बहुगुणा सबसे अनुभवी व्यक्ति हैं और कई अनशन भी कर चुके हैं। वह चाहते हैं कि उनके माध्यम से मध्यस्थता करवाकर उनके हाथों जूस पिलाने के बाद आत्मबोधानंद के अनशन को समाप्त कराया जाए। हालांकि मातृसदन के स्वामी शिवानंद सरस्वती का कहना है कि चुनाव से पूर्व भी सरकार ने गंगा की रक्षा की सुध नहीं ली। मांगे पूरी न होने तक मातृसदन में ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद का अनशन जारी रहेगा।
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