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स्कूल छोड़ चुके बच्चों को फिर से दिलाया जाएगा एडमिशन
Updated Mon, 14 May 2018 10:44 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
विभिन्न कारणों से स्कूल छोड़ चुके बच्चों को दोबारा से शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए सर्व शिक्षा अभियान के तहत कार्य किया जा रहा है। ऐसे बच्चों के लिए नजदीकी स्कूलों में विशेष कक्षाएं चलाई जाएंगी। इनके प्रवेश जुलाई महीने से होंगे। स्कूल छोड़ चुके ज्यादातर बचचे घूमंतू परिवारों के हैं। बालिकाओं का स्कूल छोड़ने का मुख्य कारण स्कूलों में शौचालय न होने के साथ असुरक्षा है।
हरिद्वार जनपद में एजुकेट गर्ल्स ग्लोबली फाउंडेशन की ओर से 38 गांवों में चलाए गए अभियान में सामने आया कि 3755 लड़के एवं लड़कियां विभिन्न कारणों से स्कूल छोड़ चुके हैं। इसमें 6 से 17 साल तक के 3280 बच्चों ने स्कूल जाना छोड़ दिया था। इनमें 2500 बालिकाएं व 780 बालक शामिल हैं। जबकि 18 से 21 आयु वर्ग के 475 छात्र-छात्राएं ऐसे हैं जो कि बीच में स्कूल छोड़ चुके हैं। अब फाउंडेशन के प्रयास से इनमें से कुछ बच्चों को प्रवेश दिया जा चुका है। जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक ब्रह्मपाल सैनी ने बताया कि फाउंडेशन के सर्वे के अनुसार मिली रिपोर्ट पर काम करते हुए ऐसे बच्चों को स्कूल लाने के लिए प्रयास करना शुरू कर दिया है। इन बच्चों को सरकार की योजनाओं के तहत निशुल्क शिक्षा दी जाएगी। जुलाई महीने से इनके एडमिशन कराए जाएंगे। उन्होंने बताया कि नीति आयोग के तहत अन्य बच्चों को चयनित करने का काम किया जा रहा है।
घुमंतू परिवारों के हैं अधिकांश बच्चे
एजुकेट गर्ल्स ग्लोबली फाउंडेशन की ओर से चयनित बच्चों के अधिकांश बच्चे घूमंतू परिवारों के हैं। यह ऐसे परिवार है जो कि सामान बेचने वाले, ईट भट्टों के साथ फैक्ट्रियों में काम करते हैं। जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक ब्रह्मपाल सैनी ने बताया कि लड़कियों द्वारा स्कूल छोड़ने का कारण शौचालय न होना है और छोटे बच्चों को खिलाने या पालन-पोषण में सहयोग कराने के लिए स्कूल से रोकना रहा है। अब सरकार की योजनाओं के तहत समस्त स्कूलों में शौचालय बनवा दिए गए हैं।
हरिद्वार।
विभिन्न कारणों से स्कूल छोड़ चुके बच्चों को दोबारा से शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए सर्व शिक्षा अभियान के तहत कार्य किया जा रहा है। ऐसे बच्चों के लिए नजदीकी स्कूलों में विशेष कक्षाएं चलाई जाएंगी। इनके प्रवेश जुलाई महीने से होंगे। स्कूल छोड़ चुके ज्यादातर बचचे घूमंतू परिवारों के हैं। बालिकाओं का स्कूल छोड़ने का मुख्य कारण स्कूलों में शौचालय न होने के साथ असुरक्षा है।
हरिद्वार जनपद में एजुकेट गर्ल्स ग्लोबली फाउंडेशन की ओर से 38 गांवों में चलाए गए अभियान में सामने आया कि 3755 लड़के एवं लड़कियां विभिन्न कारणों से स्कूल छोड़ चुके हैं। इसमें 6 से 17 साल तक के 3280 बच्चों ने स्कूल जाना छोड़ दिया था। इनमें 2500 बालिकाएं व 780 बालक शामिल हैं। जबकि 18 से 21 आयु वर्ग के 475 छात्र-छात्राएं ऐसे हैं जो कि बीच में स्कूल छोड़ चुके हैं। अब फाउंडेशन के प्रयास से इनमें से कुछ बच्चों को प्रवेश दिया जा चुका है। जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक ब्रह्मपाल सैनी ने बताया कि फाउंडेशन के सर्वे के अनुसार मिली रिपोर्ट पर काम करते हुए ऐसे बच्चों को स्कूल लाने के लिए प्रयास करना शुरू कर दिया है। इन बच्चों को सरकार की योजनाओं के तहत निशुल्क शिक्षा दी जाएगी। जुलाई महीने से इनके एडमिशन कराए जाएंगे। उन्होंने बताया कि नीति आयोग के तहत अन्य बच्चों को चयनित करने का काम किया जा रहा है।
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घुमंतू परिवारों के हैं अधिकांश बच्चे
एजुकेट गर्ल्स ग्लोबली फाउंडेशन की ओर से चयनित बच्चों के अधिकांश बच्चे घूमंतू परिवारों के हैं। यह ऐसे परिवार है जो कि सामान बेचने वाले, ईट भट्टों के साथ फैक्ट्रियों में काम करते हैं। जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक ब्रह्मपाल सैनी ने बताया कि लड़कियों द्वारा स्कूल छोड़ने का कारण शौचालय न होना है और छोटे बच्चों को खिलाने या पालन-पोषण में सहयोग कराने के लिए स्कूल से रोकना रहा है। अब सरकार की योजनाओं के तहत समस्त स्कूलों में शौचालय बनवा दिए गए हैं।
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