फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Haridwar News ›   फूस की झोपिड़यों में 34 विद्यार्थियों के साथ शुरु हुआ था गुरुकुल

फूस की झोपिड़यों में 34 विद्यार्थियों के साथ शुरु हुआ था गुरुकुल

Mon, 04 Mar 2019 11:18 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Mon, 04 Mar 2019 11:18 PM IST
विज्ञापन
फूस की झोपिड़यों में 34 विद्यार्थियों के साथ शुरु हुआ था गुरुकुल
ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार। कांगड़ी गांव में 34 विद्यार्थियों के साथ फूस की झोपड़ी में शुरू हुआ स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती का गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय आज एक वट वृक्ष बन चुका है। आज गुरुकुल कांगड़ी विवि के 23 विभागों में करीब 4500 छात्र-छात्राएं प्राचीन और आधुनिक विषयों में अध्ययन के साथ-साथ शोध कार्य भी कर रहे हैं। नैक की टीम ने अक्तूबर 2015 में गुरुकुल कांगड़ी विवि का मूल्यांकन करते हुए ए-ग्रेड दिया था।
विज्ञापन

होली के दिन 4 मार्च 1902 को स्वामी श्रद्धानंद (महात्मा मुंशीराम) ने गंगा के तट पर वनों से घिरी कांगड़ी की भूमि पर 34 विद्यार्थियों के साथ गुरुकुल की स्थापना की। उस वक्त गुरुकुल की स्थापना के लिए नजीबाबाद के धर्मनिष्ठ मुंशी अमनसिंह ने महात्मा मुंशीराम को 1200 बीघे का अपना कांगड़ी ग्राम दान दिया था। वैदिक शिक्षा के प्रचार-प्रसार के लिए 1907 में गुरुकुल में महाविद्यालय विभाग आरंभ हुआ। 1912 में गुरुकुल कांगड़ी से शिक्षा समाप्त कर निकलने वाले स्नातकों का पहला दीक्षांत समारोह हुआ। ये वे दौर था जब सरकार के प्रभाव से स्वतंत्र होने के कारण गुरुकुल को ब्रिटिश सरकार राजद्रोही संस्था समझती थी। 1917 में वायसराय लॉर्ड चेम्सफोर्ड के गुरुकुल आगमन के बाद अंग्रेजी सरकार का यह संदेह दूर हुआ। आर्य प्रतिनिधि सभा ने इसका विस्तार करने के लिए वेद, आयुर्वेद, कृषि और साधारण (आर्ट्स) महाविद्यालयों को बनाने का निश्चय किया।
विज्ञापन

1930 में कांगड़ी से किया गया गुरुकुल को स्थापित
सितंबर 1924 में गुरुकुल पर भीषण दैवी विपत्ति आई। गंगा की असाधारण बाढ़ ने गंगा तट पर बनी इमारतों को भयंकर क्षति पहुंचाई। भविष्य में बाढ़ के प्रकोप से बचने के लिए मई 1930 को गुरुकुल गंगा के पूर्वी तट से हटाकर पश्चिमी तट पर गंगा की नहर पर हरिद्वार के समीप वर्तमान स्थान में लाया गया। आज गुरुकुल कांगड़ी विवि मुख्य परिसर सहित कन्या गुरुकुल परिसर देहरादून, कन्या गुरुकुल परिसर हरिद्वार में संचालित हो रहा है। जबकि बहादराबाद में अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संकाय बनाया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

1962 में भारत सरकार ने दिया डीम्ड विवि का दर्जा
हरिद्वार। 1962 में भारत सरकार ने इस शिक्षण संस्था के राष्ट्रीय स्वरूप और शिक्षा के क्षेत्र में इसके योगदान को देखते हुए विवि अनुदान आयोग एक्ट 1956 की धारा 3 के अंतर्गत डीम्ड विवि की मान्यता प्रदान की। इसके बाद गुरुकुल में वैदिक साहित्य, संस्कृत साहित्य, दर्शन, हिन्दी साहित्य, अंग्रेजी, मनोविज्ञान, गणित और प्राचीन भारतीय इतिहास संस्कृति एवं पुरातत्व विषयों में स्नातकोत्तर अध्ययन की व्यवस्था की गई। साथ ही विवि में भौतिकी, रसायन विज्ञान, कंप्यूटर विज्ञान, अभियांत्रिकी, आयुर्विज्ञान व प्रबंबधन आदि आधुनिक विषयों का भी संचालन किया गया। 2002 में यूजीसी की ओर से स्थापित राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) ने गुरुकुल कांगड़ी विवि को चार सितारों से अलंकृत किया था। इसी संस्था ने 2015 में गुरुकुल कांगड़ी विवि का मूल्यांकन करते हुए ए-ग्रेड दिया था।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed