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बड अमावस्या पर डुबकी लगाने लाखों पहुंचे
Updated Mon, 14 May 2018 10:44 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
मंगलवार को बड मावस का विशाल स्नान होगा। गंगा में डुबकी लगाने के लिए देश के विभिन्न भागों से लाखों श्रद्धालु धर्मनगरी पहुंच रहे हैं। महिलाएं सावित्री सत्यवान की कथा सुनकर व्रत खोलेंगी। घरों में वट पूजा का आयोजन किया जाएगा।
यह वही दिन है, जब सवित्री ने अपने पति सत्यवान को यम पाश से मुक्त करा लिया था। यही नहीं बड़ी चतुराई से उसने पुत्रवती होने का आशीर्वाद भी यमराज से प्राप्त कर लिया। परिणाम स्वरूप यम को सत्यवान की देह में पुन: प्राण छोड़ने पड़े। बाद में सावित्री के कई पुत्र हुए। इस दिन महिलाएं पंचपुरी में घर-घर वट के टहने और पत्ते लाकर पूजा स्थल पर रखती हैं। सभी सौभाग्वती महिलाएं व्रत रखते हुए एकत्रित होकर उस वट की पूजा करती हैं, जिसके नीचे सत्यवान को पुनर्जीवन मिला था। वे कमाना करती हैं कि उनके पति का जीवन भी लंबा हो। बाद में अनेक प्रकार की मिठाइयों और वस्तुओं का दान किया जाता है।
बड मावस पर स्नान करने के लिए अनुमान है कि सोमवार की शाम तक तीन लाख श्रद्धालु धर्मनगरी पहुंच चुके हैं। हरकी पैडी पर स्नान का कोई मुहूर्त नहीं है। यह स्नान तड़के शुरू हो जाएगा और सायंकाल तक चलता रहेगा। कुशावर्त और नारायणी शिला पर हजारों यात्री अपने पितरों की मुक्ति के लिए पितृ कर्म और श्राद्ध तर्पण भी करेंगे।
हरिद्वार।
मंगलवार को बड मावस का विशाल स्नान होगा। गंगा में डुबकी लगाने के लिए देश के विभिन्न भागों से लाखों श्रद्धालु धर्मनगरी पहुंच रहे हैं। महिलाएं सावित्री सत्यवान की कथा सुनकर व्रत खोलेंगी। घरों में वट पूजा का आयोजन किया जाएगा।
यह वही दिन है, जब सवित्री ने अपने पति सत्यवान को यम पाश से मुक्त करा लिया था। यही नहीं बड़ी चतुराई से उसने पुत्रवती होने का आशीर्वाद भी यमराज से प्राप्त कर लिया। परिणाम स्वरूप यम को सत्यवान की देह में पुन: प्राण छोड़ने पड़े। बाद में सावित्री के कई पुत्र हुए। इस दिन महिलाएं पंचपुरी में घर-घर वट के टहने और पत्ते लाकर पूजा स्थल पर रखती हैं। सभी सौभाग्वती महिलाएं व्रत रखते हुए एकत्रित होकर उस वट की पूजा करती हैं, जिसके नीचे सत्यवान को पुनर्जीवन मिला था। वे कमाना करती हैं कि उनके पति का जीवन भी लंबा हो। बाद में अनेक प्रकार की मिठाइयों और वस्तुओं का दान किया जाता है।
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बड मावस पर स्नान करने के लिए अनुमान है कि सोमवार की शाम तक तीन लाख श्रद्धालु धर्मनगरी पहुंच चुके हैं। हरकी पैडी पर स्नान का कोई मुहूर्त नहीं है। यह स्नान तड़के शुरू हो जाएगा और सायंकाल तक चलता रहेगा। कुशावर्त और नारायणी शिला पर हजारों यात्री अपने पितरों की मुक्ति के लिए पितृ कर्म और श्राद्ध तर्पण भी करेंगे।
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