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संतों का जीवन परोपकार के लिए समर्पित होता है: स्वामी ललितानंद गिरि
Updated Thu, 29 Mar 2018 12:44 AM IST
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हरिद्वार।
महापुरुषों ने समाज को सदा नई दिशा दी है। संतों का संपूर्ण जीवन मानव सेवा में सहयोग प्रदान कर लोक कल्याण को समर्पित रहता है।
यह उद्गार स्वामी ललितानंद गिरि महाराज ने रोड़ीबेलवाला स्थित आनंद वन समाधि सिद्धपीठ आश्रम में ब्रह्मलीन स्वामी प्रेमानंद सरस्वती महाराज की पुण्य तिथि पर आयोजित श्रद्धांजलि समारोह में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि संतों का कार्य समाज में सद्भाव का वातावरण बनाकर सन्मार्ग की प्रेरणा देना होता है। स्वामी चिद्विलासानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि ब्रह्मलीन स्वामी प्रेमानंद सरस्वती महाराज ने अपने जीवनकाल में भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं का निर्वाह करते हुए राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दिया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महामंडलेश्वर स्वामी श्यामसुंदर दास शास्त्री ने कहा कि संतों के दर्शन मात्र से पापों से निवृत्ति और पुण्य की प्राप्ति होती है। इस अवसर पर कार्यक्रम के रविंद्र किशोर सिन्हा, स्वामी अंनतानंद, स्वामी जगदीशानंद, महंत मोहनदास रामायणी, विनोद महाराज, शिवशंकर गिरि, स्वामी रूपेन्द्र प्रकाश, स्वामी गोपाल मुनि, महंत प्रेमदास, महंत कमलदास, स्वामी रविदेव शास्त्री, महंत मोहन सिंह, महंत तीरथ सिंह, पहलवान बाबा, स्वामी पूर्णानंद गिरि आदि संत मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन स्वामी हरिहरानंद महाराज ने किया।
महापुरुषों ने समाज को सदा नई दिशा दी है। संतों का संपूर्ण जीवन मानव सेवा में सहयोग प्रदान कर लोक कल्याण को समर्पित रहता है।
यह उद्गार स्वामी ललितानंद गिरि महाराज ने रोड़ीबेलवाला स्थित आनंद वन समाधि सिद्धपीठ आश्रम में ब्रह्मलीन स्वामी प्रेमानंद सरस्वती महाराज की पुण्य तिथि पर आयोजित श्रद्धांजलि समारोह में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि संतों का कार्य समाज में सद्भाव का वातावरण बनाकर सन्मार्ग की प्रेरणा देना होता है। स्वामी चिद्विलासानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि ब्रह्मलीन स्वामी प्रेमानंद सरस्वती महाराज ने अपने जीवनकाल में भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं का निर्वाह करते हुए राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दिया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महामंडलेश्वर स्वामी श्यामसुंदर दास शास्त्री ने कहा कि संतों के दर्शन मात्र से पापों से निवृत्ति और पुण्य की प्राप्ति होती है। इस अवसर पर कार्यक्रम के रविंद्र किशोर सिन्हा, स्वामी अंनतानंद, स्वामी जगदीशानंद, महंत मोहनदास रामायणी, विनोद महाराज, शिवशंकर गिरि, स्वामी रूपेन्द्र प्रकाश, स्वामी गोपाल मुनि, महंत प्रेमदास, महंत कमलदास, स्वामी रविदेव शास्त्री, महंत मोहन सिंह, महंत तीरथ सिंह, पहलवान बाबा, स्वामी पूर्णानंद गिरि आदि संत मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन स्वामी हरिहरानंद महाराज ने किया।