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कांव मेले से खिले छोटे व्यापारियों के चेहरे
Updated Thu, 08 Feb 2018 11:00 PM IST
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विकास सनवाल
हरिद्वार।
धर्मनगरी में फाल्गुन मास की कांवड़ यात्रा में अब कांवड़िए पहुंचने शुरू हो गए हैं। इससे धर्मनगरी के छोटे मझोले व्यापारियों के चेहरों पर रौनक दिखने लगी है। कांवड़ सजाने के लिए सड़कों पर सामान बेचने वाले व्यापारियों की दुकानें सजने लगी है। कांवड़ बनाने वाले व्यापारियों के साथ ही सजावटी सामान की दुकानों पर शिव भक्तों की टोली खरीददारी करती दिख रही है।
सड़कों के किनारे सजी दुकानों में कावंड़ सजाने के लिए कई तरह की रंगीन मालाएं, चुनरी, खिलौने, फूल, हथकंडी आदि सामानों से आकर्षक नजर आ रही है। शिवभक्त घाटों पर कांवड़ को सजाने के लिए सुंदर-सुंदर फूल-मालाओं से सजाकर कांवड़ का निर्माण कर रहे हैं। इस दौरान छोटे बच्चों में भी कांवड यात्रा को लेकर उत्साह देखने को मिल रहा है।
लघु व्यापारी साजो सामान बेचने वाले नितिश पांडे कहते हैं कि कांवड़ मेेले में अच्छी ब्रिक्री हो जाती है। शिवभक्त कांवड़ सजाने के लिए खूब सारी चीजें ले जाते हैं, जिससे सप्ताह भर में अच्छा कारोबार हो जाता है।
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इस दौरान हरकी पैड़ी, मालवीय द्वीप, पंतद्वीप, चंडी देवी घाट, सर्वानंद घाटों पर सुबह से हजारों कांवडिए जल भरने पहुंचे। वहीं हरिद्वार में शिवालयों में कांवडिए जल चढ़ाने पहुंचे।
छोटे से शिव भक्त पहुंच रहे कांवड लेने
काशीपुर से आए परमजीत सिंह के साथ उनका 11साल का बेटा हरप्रीत पहली बार कांवड़ यात्रा में शामिल हुआ है। 15 सदस्यीय कांवड़ यात्रा दल में हरप्रीत सबसे छोटा है। वह इस यात्रा में शामिल होने से काफी उत्साहित नजर आया। उसने यात्रा पर दोबारा आने की इच्छा जाहिर की, उसके पिता का कहना है कि मन्नत मांगी थी इसलिए बेटा भी यात्रा में शामिल हुआ है।
आपसी भाईचारे की मिसाल
कांवड मेला सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल भी पेश कर रहा है। कांवड़ लेने तो हिंदू धर्मावलंबी आ रहे हैं लेकिन बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग कांवड़ बना रहे हैं। कांवड़ बेचने का काम कर रहे ज्वालापुर निवासी रिजवान और इरफान बाजारों में फेरी लगाकर कांवड़ यात्रा में शिव भक्तों की कांवड़ सजाने के लिए फूल व कई तरह के साजो-सामान बेचते हैं। उन्होंने बताया कि रंग बिरंगे फूलों से कांवड़ सुंदर व आकर्षक लगती है, और इससे उनको रोजगार भी उपलब्ध हो जाता है।
हरिद्वार।
धर्मनगरी में फाल्गुन मास की कांवड़ यात्रा में अब कांवड़िए पहुंचने शुरू हो गए हैं। इससे धर्मनगरी के छोटे मझोले व्यापारियों के चेहरों पर रौनक दिखने लगी है। कांवड़ सजाने के लिए सड़कों पर सामान बेचने वाले व्यापारियों की दुकानें सजने लगी है। कांवड़ बनाने वाले व्यापारियों के साथ ही सजावटी सामान की दुकानों पर शिव भक्तों की टोली खरीददारी करती दिख रही है।
सड़कों के किनारे सजी दुकानों में कावंड़ सजाने के लिए कई तरह की रंगीन मालाएं, चुनरी, खिलौने, फूल, हथकंडी आदि सामानों से आकर्षक नजर आ रही है। शिवभक्त घाटों पर कांवड़ को सजाने के लिए सुंदर-सुंदर फूल-मालाओं से सजाकर कांवड़ का निर्माण कर रहे हैं। इस दौरान छोटे बच्चों में भी कांवड यात्रा को लेकर उत्साह देखने को मिल रहा है।
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लघु व्यापारी साजो सामान बेचने वाले नितिश पांडे कहते हैं कि कांवड़ मेेले में अच्छी ब्रिक्री हो जाती है। शिवभक्त कांवड़ सजाने के लिए खूब सारी चीजें ले जाते हैं, जिससे सप्ताह भर में अच्छा कारोबार हो जाता है।
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इस दौरान हरकी पैड़ी, मालवीय द्वीप, पंतद्वीप, चंडी देवी घाट, सर्वानंद घाटों पर सुबह से हजारों कांवडिए जल भरने पहुंचे। वहीं हरिद्वार में शिवालयों में कांवडिए जल चढ़ाने पहुंचे।
छोटे से शिव भक्त पहुंच रहे कांवड लेने
काशीपुर से आए परमजीत सिंह के साथ उनका 11साल का बेटा हरप्रीत पहली बार कांवड़ यात्रा में शामिल हुआ है। 15 सदस्यीय कांवड़ यात्रा दल में हरप्रीत सबसे छोटा है। वह इस यात्रा में शामिल होने से काफी उत्साहित नजर आया। उसने यात्रा पर दोबारा आने की इच्छा जाहिर की, उसके पिता का कहना है कि मन्नत मांगी थी इसलिए बेटा भी यात्रा में शामिल हुआ है।
आपसी भाईचारे की मिसाल
कांवड मेला सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल भी पेश कर रहा है। कांवड़ लेने तो हिंदू धर्मावलंबी आ रहे हैं लेकिन बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग कांवड़ बना रहे हैं। कांवड़ बेचने का काम कर रहे ज्वालापुर निवासी रिजवान और इरफान बाजारों में फेरी लगाकर कांवड़ यात्रा में शिव भक्तों की कांवड़ सजाने के लिए फूल व कई तरह के साजो-सामान बेचते हैं। उन्होंने बताया कि रंग बिरंगे फूलों से कांवड़ सुंदर व आकर्षक लगती है, और इससे उनको रोजगार भी उपलब्ध हो जाता है।