{"_id":"5d0141f4bdec220776550520","slug":"156036349810-haridwar-news17","type":"story","status":"publish","title_hn":"आखिर कब गंगा निर्मल होगी और कब तक ‘निगमांनद’ और ‘सानंद’ बलिदान होते रहेंगे?","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आखिर कब गंगा निर्मल होगी और कब तक ‘निगमांनद’ और ‘सानंद’ बलिदान होते रहेंगे?
विज्ञापन
स्वामी सानंद से पहले गंगा रक्षा के लिए प्राण त्यागने वाले स्वामी निगमानंद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हरिद्वार
मां गंगा निर्मल और अविरल बहती रहे इस संकल्प के लिए पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्यरत संस्था मातृसदन के ब्रह्मचारी निगमानंद सरस्वती को अपना बलिदान दिए हुए आठ साल बीत गए हैं। गंगा और निगमानंद का बलिदान आज भी सिस्टम और समाज से सवाल पूछ रहा है कि आखिर कब गंगा निर्मल होगी और कब तक ‘निगमांनद’ और ‘सानंद’ बलिदान होते रहेंगे।
जगजीतपुर स्थित मातृसदन के ब्रह्मचारी निगमानंद ने गंगा में अवैध खनन पर रोक लगाने, गंगा की धारा को अविरल बनाने समेत अन्य मांगों को लेकर वर्ष 2011 में 115 दिन तक अनशन किया था। 13 जून को जौलीग्रांट अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली थी। हरिद्वार में गंगा की रक्षा के लिए हुआ यह बलिदान सबसे पहला बलिदान माना गया है। उम्मीद जताई जा रही थी कि निगमानंद का बलिदान कुछ बदलाव लाएगा। देश और दुनिया का ध्यान गंगा के हालात की तरफ खींचने वाली इस घटना पर सभी की नजर थी, लेकिन हालात नहीं बदले। गंगा रक्षा के लिए लगातार संघर्ष करने वाली संस्था मातृसदन को इसके बाद भी लगातार अनशन और संघर्ष का रास्ता अपनाना पड़ा। स्थिति यह हुई कि पिछले साल एक और संत स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद उर्फ जीड़ी अग्रवाल ने भी मातृसदन में अनशन किया और पिछले साल 11 अक्टूबर को उनका भी देहावसान हो गया।
ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद सरस्वती ने हाल ही में करीब 194 दिन तक अनशन करने के बाद चार मई को सरकार के प्रतिनिधियों के इस आश्वासन पर अनशन समाप्त किया था कि गंगा पर बन रहे बांधों का निर्माण रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएंगे। मगर इस पर भी कार्रवाई नहीं की गई। गंगा में अवैध खनन आज भी जारी है। गंगा के किनारे से पांच किलोमीटर की दूरी तक लगाए गए स्टोन क्रशर हटाए नहीं गए हैं। गंगा पर बनी विद्युत परियोजनाओं पर भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती ने आरोप लगाया कि माफिया, राजनेताओं और नौकरशाहों के गठजोड़ की वजह से गंगा आज बर्बाद हो रही है। ब्रह्मचारी निगमानंद और स्वामी सानंद के बलिदान के बाद भी मातृसदन गंगा के लिए अपना संघर्ष का रास्ता नहीं छोड़ेगा। उन्होंने मोदी सरकार से गंगा हित में प्रभावी कदम उठाए जाने की उम्मीद जताई। कहा कि बृहस्पतिवार से शुरू हो रहा चार दिवसीय बलिदान दिवस कार्यक्रम में गंगा की रक्षा के लिए भावी आंदोलनों पर भी चर्चा की जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
मां गंगा निर्मल और अविरल बहती रहे इस संकल्प के लिए पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्यरत संस्था मातृसदन के ब्रह्मचारी निगमानंद सरस्वती को अपना बलिदान दिए हुए आठ साल बीत गए हैं। गंगा और निगमानंद का बलिदान आज भी सिस्टम और समाज से सवाल पूछ रहा है कि आखिर कब गंगा निर्मल होगी और कब तक ‘निगमांनद’ और ‘सानंद’ बलिदान होते रहेंगे।
जगजीतपुर स्थित मातृसदन के ब्रह्मचारी निगमानंद ने गंगा में अवैध खनन पर रोक लगाने, गंगा की धारा को अविरल बनाने समेत अन्य मांगों को लेकर वर्ष 2011 में 115 दिन तक अनशन किया था। 13 जून को जौलीग्रांट अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली थी। हरिद्वार में गंगा की रक्षा के लिए हुआ यह बलिदान सबसे पहला बलिदान माना गया है। उम्मीद जताई जा रही थी कि निगमानंद का बलिदान कुछ बदलाव लाएगा। देश और दुनिया का ध्यान गंगा के हालात की तरफ खींचने वाली इस घटना पर सभी की नजर थी, लेकिन हालात नहीं बदले। गंगा रक्षा के लिए लगातार संघर्ष करने वाली संस्था मातृसदन को इसके बाद भी लगातार अनशन और संघर्ष का रास्ता अपनाना पड़ा। स्थिति यह हुई कि पिछले साल एक और संत स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद उर्फ जीड़ी अग्रवाल ने भी मातृसदन में अनशन किया और पिछले साल 11 अक्टूबर को उनका भी देहावसान हो गया।
विज्ञापन
ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद सरस्वती ने हाल ही में करीब 194 दिन तक अनशन करने के बाद चार मई को सरकार के प्रतिनिधियों के इस आश्वासन पर अनशन समाप्त किया था कि गंगा पर बन रहे बांधों का निर्माण रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएंगे। मगर इस पर भी कार्रवाई नहीं की गई। गंगा में अवैध खनन आज भी जारी है। गंगा के किनारे से पांच किलोमीटर की दूरी तक लगाए गए स्टोन क्रशर हटाए नहीं गए हैं। गंगा पर बनी विद्युत परियोजनाओं पर भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती ने आरोप लगाया कि माफिया, राजनेताओं और नौकरशाहों के गठजोड़ की वजह से गंगा आज बर्बाद हो रही है। ब्रह्मचारी निगमानंद और स्वामी सानंद के बलिदान के बाद भी मातृसदन गंगा के लिए अपना संघर्ष का रास्ता नहीं छोड़ेगा। उन्होंने मोदी सरकार से गंगा हित में प्रभावी कदम उठाए जाने की उम्मीद जताई। कहा कि बृहस्पतिवार से शुरू हो रहा चार दिवसीय बलिदान दिवस कार्यक्रम में गंगा की रक्षा के लिए भावी आंदोलनों पर भी चर्चा की जाएगी।
विज्ञापन