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विषमताओं के उन्मूलन का महापर्व होली: डॉ. पंड्या
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ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
देवसंस्कृति विश्वविद्यालय और गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में कुरीतियां मिटाने और आतंकियों के सफाया के लिए विशेष जप के साथ होली मनाई गई। सैकड़ों लोगों के प्रतिनिधि के रूप में गायत्री परिवार प्रमुख डॉ. प्रणव पंड्या और शैलदीदी ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ होली पर पूजन किया।
डॉ. पंड्या ने कहा कि जाति, वर्ग भेद के उन्मूलन का महापर्व होली है। विषमताओं और दुर्भावों को मिटाने के लिए आगे आने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि ब्राह्मणत्व (समाज हित में नि:स्वार्थ भाव से कार्य करने वाला) के अभिवर्द्धन के लिए गुरुदेव ने जो सूत्र दिया है, यह पर्व अथवा आयोजन उस दिशा में एक सार्थक पहल है। उन्होंने कहा कि कृषि और ऋषि ने भारतीय संस्कृति की आधारशिला रखी है। होली केवल रंग खेलकर मनाया जाने वाला पर्व ही नहीं है, बल्कि यह आत्मीयता विस्तार, उमंग, उत्साह, सामाजिक समानता-समरता का भी पर्व है। होली महापर्व के दौरान आयोजित सामूहिक जप में सैकड़ों लोगों ने भागीदारी कर आतंकियों को जड़ से मिटाने के लिए प्रार्थना की, तो बहनों की ओर से संचालित हवन में शहीदों की आत्मा की शांति के लिए विशेष वैदिक मंत्रों से आहुतियां दी गईं।
बता दें कि पुलवामा में हुए आतंकी हमले के कारण देसंविवि में फूलों की होली और शांतिकुंज में होली के कई कार्यक्रम स्थगित रहे। संगीत विभाग के भाइयों ने होली गीत और भजन किए। इस अवसर पर व्यवस्थापक शिवप्रसाद मिश्र, देसंविवि के कुलपति शरद पारधी सहित देश के विभिन्न स्थानों से आए साधकगण सहित शांतिकुंज, देसंविवि परिवार और ब्रह्मवर्चस शोध संस्थान के डॉक्टर और वैज्ञानिक रहे।
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देवसंस्कृति विश्वविद्यालय और गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में कुरीतियां मिटाने और आतंकियों के सफाया के लिए विशेष जप के साथ होली मनाई गई। सैकड़ों लोगों के प्रतिनिधि के रूप में गायत्री परिवार प्रमुख डॉ. प्रणव पंड्या और शैलदीदी ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ होली पर पूजन किया।
डॉ. पंड्या ने कहा कि जाति, वर्ग भेद के उन्मूलन का महापर्व होली है। विषमताओं और दुर्भावों को मिटाने के लिए आगे आने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि ब्राह्मणत्व (समाज हित में नि:स्वार्थ भाव से कार्य करने वाला) के अभिवर्द्धन के लिए गुरुदेव ने जो सूत्र दिया है, यह पर्व अथवा आयोजन उस दिशा में एक सार्थक पहल है। उन्होंने कहा कि कृषि और ऋषि ने भारतीय संस्कृति की आधारशिला रखी है। होली केवल रंग खेलकर मनाया जाने वाला पर्व ही नहीं है, बल्कि यह आत्मीयता विस्तार, उमंग, उत्साह, सामाजिक समानता-समरता का भी पर्व है। होली महापर्व के दौरान आयोजित सामूहिक जप में सैकड़ों लोगों ने भागीदारी कर आतंकियों को जड़ से मिटाने के लिए प्रार्थना की, तो बहनों की ओर से संचालित हवन में शहीदों की आत्मा की शांति के लिए विशेष वैदिक मंत्रों से आहुतियां दी गईं।
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बता दें कि पुलवामा में हुए आतंकी हमले के कारण देसंविवि में फूलों की होली और शांतिकुंज में होली के कई कार्यक्रम स्थगित रहे। संगीत विभाग के भाइयों ने होली गीत और भजन किए। इस अवसर पर व्यवस्थापक शिवप्रसाद मिश्र, देसंविवि के कुलपति शरद पारधी सहित देश के विभिन्न स्थानों से आए साधकगण सहित शांतिकुंज, देसंविवि परिवार और ब्रह्मवर्चस शोध संस्थान के डॉक्टर और वैज्ञानिक रहे।
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