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शहरवासियों पर रहम करो सरकार, बरसाती नालों की सफाई करा दो

Sun, 06 May 2018 11:56 PM IST
Updated Sun, 06 May 2018 11:56 PM IST
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शहरवासियों पर रहम करो सरकार, बरसाती नालों की सफाई करा दो

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हरिद्वार।
प्रदेश में आमतौर से दस जून के बाद मानसून सक्रिय हो जाता है। इससे पहले भी प्री मानसून की बारिश होने लगती है। इस हिसाब से अब करीब एक महीना ही मानसून आने के लिए बचा है और शहर के बड़े बरसाती नालों की सफाई का काम शुरू नहीं हो सका है। बरसात शुरू होने से पहले यदि इनकी सफाई नहीं हुई तो शहर का जलमग्न होना तय है। इससे पहले भी शहर बरसात के दौरान ताल तलैया बनता रहा है। शहर के लोगों के साथ व्यापारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ता रहा है। इसके बावजूद नगर निगम प्रशासन सबक लेने को तैयार नहीं है। शहर के लोगों और व्यापारियों को भी अभी यह चिंता सताने लगी है।
नगर पालिका के समय से ही शहर के नालों की सफाई हर साल 15 अप्रैल से 15 मई तक कराई जाती थी। अब इस अवधि में नालों की सफाई नहीं कराई जाती। जबकि सभी बड़े नाले कचरे और मलबे से अटे हैं। बरसात में पानी आने पर इसकी निकासी नहीं हो पाएगी।
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हरकी पैड़ी से मुख्य बाजारों से जुड़े पांच बड़े बरसाती नाले सबसे ज्यादा तबाही मचा सकते हैं। दो बड़े भूमिगत चेकडैम नाले मिट्टी से भरे हैं। काशीपुरा से आने वाला चेकडैम नाला विष्णुघाट के बाजार से और गुलाटी खोल का नाला पुरानी सब्जी मंडी से होता हुआ विष्णुघाट से गंगनहर में गिरता है। अपर रोड पर एक भूमिगत नाला है ललतारौ नदी में गिरता है। कभी इस नाले के भीतर से आदमी खड़े होकर पार निकलते थे। अब सफाई नहीं होने से इसमें बारिश का पानी भी नहीं निकल पाता है। यही हाल बेलदेई का नाला का भी है। पालिका मार्केट के पीछे से नाईसोता का नाला नाईघाट से गंगा में गिरता है। भीमगोडा में गुसाईं नाले में राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क और हिल बाईपास से मलबा आकर तबाही मचाता है। बावजूद इसके कई साल से इस नाले को साफ करने की योजना ही नहीं बनी। भूपतवाला में केलेवाली पुलिया और पावन धाम की पुलिया के कई बड़े नालों की भी सफाई नहीं हो सकी है।
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ज्वालापुर में पॉलिथीन के कचरे से भरे हैं नाले
ज्वालापुर में भी चार बड़े बरसाती नाले पॉलिथीन कचरे और मलबे से भरे हैं। बड़े नालों की सफाई जेसीबी से करानी पड़ती है। भेल से आने वाला सबसे बड़ा कडच्छ नाला बरसात में भारी तबाही मचाता है। यह नाला कस्साबान से होकर नहर में गिरता है। कटहरा बाजार के दोनों तरफ के नालों की तली की सफाई नहीं होने से पानी बाजार में भर जाता है। ऐसे में दुकानदारों को दुकान खोलने के लिए पानी उतरने का इंतजार करना पड़ता है। कस्साबान से कोतवाली तक दोनों तरफ के नालों के साथ ही वाल्मीकि बस्ती का नाला भी मलबे से भरा हुआ है।


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बड़े बरसाती नालों की सफाई में जेसीबी से करानी होती है, अब तक इस बाबत कोई योजना नहीं बनी है। अलबत्ता नगर निगम ने एक महीने से नालों की सफाई के कार्य में 60 मजदूरों की नाला गैंग लगा रखा है। प्रत्येक सर्किल में 15-15 मजदूर लगे हैं। एक महीने से मस्टररोल पर उनसे काम लिया जा रहा है और प्रथम चरण में 30 नालों की सफाई कराई जा रही है। इसके बाद नालों की सफाई की वृहद योजना भी बनाई जानी है।
- संजय कुमार सहायक नगर आयुक्त


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