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देवी के मंदिरों में उमड़ा भक्तों का सैलाब
Updated Sun, 18 Mar 2018 10:52 PM IST
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हरिद्वार। चैत्र नवरात्र के पहले दिन हजारों श्रद्धालुओं ने देवी के मंदिरों में जाकर पूजा अर्चना की। पौराणिक मंदिरों में श्रद्धालुओं की लंबी लाइनें लगी रही। कई स्थानों पर शत चंडी यज्ञ प्रारंभ हुए। राम नवमी तक चलने वाली राम कथाएं भी आज से शुरु हुई। पंचपुरी के घरों में कलश स्थापना के बाद भगवती के देवी भागवत पाठ प्रारंभ हो गए हैं।
नौ दिन चलने वाले नवरात्र के लिए अनेक पौराणिक मंदिरों को भव्य रूप से सजाया गया है। सर्वाधिक भीड़ मनसा देवी के मंदिर में उमड़ी जहां देश भर से आए श्रद्धालु दर्शनार्थ पहुंचे। पूर्वी शिवालिक पर्वत माला स्थित मां चंडी देवी में शत चंडी यज्ञ प्रारंभ हुआ। इस मंदिर के समीप स्थित मां अंजनी देवी के मंदिर में भी भक्तों का आवागमन जारी रहा। इस मंदिर में भी भक्तों के कतारें सवेरे से लगी हुई थी। सूरकूट पर्वत स्थित मां सुरेश्वरी देवी के मंदिर में प्रबंधक समिति के संयोजन में शत चंडी यज्ञ शुरू हुआ। वन स्थित देवी के दर्शन करने के लिए भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे तथा प्रथम स्वरूप शैलपुत्री की पूजा की। हरिद्वार की अधिष्ठात्री माया देवी के मंदिर में प्रतिदिन से काफी अधिक भक्त दर्शनार्थ पहुंचे। अनेक वाद्य यंत्रों के साथ श्रीमहंतों ने माया देवी की आरती उतारी। यह वहीं स्थल है जहां सती के देह रखी गई थी। इसे आदि शक्तिपीठ माना गया है।
उत्तरी हरिद्वार लाल माता वैष्णो देवी मंदिर में भक्तों की कतारें दिन भर लगी रही। महंत दुर्गादास के सानिध्य में वैष्णो देवी की भव्य आरती उतारी गई। इस मंदिर में चूंकि वैष्णो देवी मंदिर की तरह पवित्र गुफा भी बनाए गई है। तीर्थ यात्रियों के लिए नवरात्र में यह मंदिर हमेशा ही आकर्षण का केंद्र बना रहा है।
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हरिद्वार के मकरवाहिनी मंदिर में भगवती का भव्य श्रृंगार पहले दिन किया गया। यहां नौ दिनों तक अलग-अलग तरीके से मां का श्रंगार किया जाता है। कनखल के शीतला माता मंदिर में हजारों भक्तों दिनभर पहुंचकर प्रसाद चढ़ाया। इसी नगरी के महिषासुरमर्दिनी मंदिर में भी भक्तों की भीड़ लगी रही। इस मंदिर में पश्चिमी बंगाल की पद्धति से आरती उतारी जाती है। गंगा के उस पार स्थित दक्षिण काली मंदिर में नौ दिन चलने वाली पूजा शुरू हो गई। नवरात्र के नौ दिनों तक देश के विभिन्न भागों से श्रद्धालु का आवागमन भगवती दर्शनार्थ धर्मनगरी में चलता रहेगा।
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नौ दिन चलने वाले नवरात्र के लिए अनेक पौराणिक मंदिरों को भव्य रूप से सजाया गया है। सर्वाधिक भीड़ मनसा देवी के मंदिर में उमड़ी जहां देश भर से आए श्रद्धालु दर्शनार्थ पहुंचे। पूर्वी शिवालिक पर्वत माला स्थित मां चंडी देवी में शत चंडी यज्ञ प्रारंभ हुआ। इस मंदिर के समीप स्थित मां अंजनी देवी के मंदिर में भी भक्तों का आवागमन जारी रहा। इस मंदिर में भी भक्तों के कतारें सवेरे से लगी हुई थी। सूरकूट पर्वत स्थित मां सुरेश्वरी देवी के मंदिर में प्रबंधक समिति के संयोजन में शत चंडी यज्ञ शुरू हुआ। वन स्थित देवी के दर्शन करने के लिए भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे तथा प्रथम स्वरूप शैलपुत्री की पूजा की। हरिद्वार की अधिष्ठात्री माया देवी के मंदिर में प्रतिदिन से काफी अधिक भक्त दर्शनार्थ पहुंचे। अनेक वाद्य यंत्रों के साथ श्रीमहंतों ने माया देवी की आरती उतारी। यह वहीं स्थल है जहां सती के देह रखी गई थी। इसे आदि शक्तिपीठ माना गया है।
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उत्तरी हरिद्वार लाल माता वैष्णो देवी मंदिर में भक्तों की कतारें दिन भर लगी रही। महंत दुर्गादास के सानिध्य में वैष्णो देवी की भव्य आरती उतारी गई। इस मंदिर में चूंकि वैष्णो देवी मंदिर की तरह पवित्र गुफा भी बनाए गई है। तीर्थ यात्रियों के लिए नवरात्र में यह मंदिर हमेशा ही आकर्षण का केंद्र बना रहा है।
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हरिद्वार के मकरवाहिनी मंदिर में भगवती का भव्य श्रृंगार पहले दिन किया गया। यहां नौ दिनों तक अलग-अलग तरीके से मां का श्रंगार किया जाता है। कनखल के शीतला माता मंदिर में हजारों भक्तों दिनभर पहुंचकर प्रसाद चढ़ाया। इसी नगरी के महिषासुरमर्दिनी मंदिर में भी भक्तों की भीड़ लगी रही। इस मंदिर में पश्चिमी बंगाल की पद्धति से आरती उतारी जाती है। गंगा के उस पार स्थित दक्षिण काली मंदिर में नौ दिन चलने वाली पूजा शुरू हो गई। नवरात्र के नौ दिनों तक देश के विभिन्न भागों से श्रद्धालु का आवागमन भगवती दर्शनार्थ धर्मनगरी में चलता रहेगा।