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ब्रह्मलीन संत वेददास महाराज की अस्थिया विसर्जित
Updated Mon, 29 Jan 2018 10:56 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
श्री पंचनाम रामानंदी निर्वाणी अखाड़ा के ब्रह्मलीन संत वेददास जी महाराज की अस्थियां सतीघाट कनखल में विधि विधान के साथ संतों महंतों के सानिध्य में विसर्जित की गई।
महंत रामदास महाराज ने अस्थि विसर्जन के बाद कहा कि ब्रह्मलीन संत वेददास महाराज ने जीवन पर्यंत सेवा के प्रकल्प चलाए। हमेशा ही मनुष्य कल्याण में अपना सहयोग दिया। गो सेवा, गंगा सेवा में हमेशा उनका योगदान रहा। उन्होंने हमेशा धर्म की पताका फहराने का कार्य किया। हरिद्वार से उनका काफी लगाव रहा। समय-समय पर श्रद्धालु भक्तों को उनका आशीर्वाद मिलता रहा। पूर्व पालिकाध्यक्ष सतपाल ब्रह्मचारी ने ब्रह्मलीन संत वेददास को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि संतों के बताए मार्गों का अनुसरण करना चाहिए। संत समाज सनातन परंपराओं का निर्वाह करता चला आ रहा है।
बाबा बलरामदास ने कहा कि गुरु परंपराओं का मान सम्मान हमेशा करना चाहिए। गुरु के ासानिध्य से ही प्रगति मिलती है। संत समाज धार्मिक गतिविधियों में अपना सहयोग श्रद्धालु भक्तों को देते चले आ रहे हैं। हरिद्वार तीर्थनगरी में संतों की कृपा से ही अनेकों धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होते हैं। हमें संतों की सेवा में अपने जीवन को समर्पित करना चाहिए। ब्रह्मलीन संत वेददास जी महाराज के अस्थि विसर्जन में दयालदास, कृष्ण पंडित, आजाद राजेंद्र, बाबा बलराम दास ने उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए।
हरिद्वार।
श्री पंचनाम रामानंदी निर्वाणी अखाड़ा के ब्रह्मलीन संत वेददास जी महाराज की अस्थियां सतीघाट कनखल में विधि विधान के साथ संतों महंतों के सानिध्य में विसर्जित की गई।
महंत रामदास महाराज ने अस्थि विसर्जन के बाद कहा कि ब्रह्मलीन संत वेददास महाराज ने जीवन पर्यंत सेवा के प्रकल्प चलाए। हमेशा ही मनुष्य कल्याण में अपना सहयोग दिया। गो सेवा, गंगा सेवा में हमेशा उनका योगदान रहा। उन्होंने हमेशा धर्म की पताका फहराने का कार्य किया। हरिद्वार से उनका काफी लगाव रहा। समय-समय पर श्रद्धालु भक्तों को उनका आशीर्वाद मिलता रहा। पूर्व पालिकाध्यक्ष सतपाल ब्रह्मचारी ने ब्रह्मलीन संत वेददास को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि संतों के बताए मार्गों का अनुसरण करना चाहिए। संत समाज सनातन परंपराओं का निर्वाह करता चला आ रहा है।
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बाबा बलरामदास ने कहा कि गुरु परंपराओं का मान सम्मान हमेशा करना चाहिए। गुरु के ासानिध्य से ही प्रगति मिलती है। संत समाज धार्मिक गतिविधियों में अपना सहयोग श्रद्धालु भक्तों को देते चले आ रहे हैं। हरिद्वार तीर्थनगरी में संतों की कृपा से ही अनेकों धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होते हैं। हमें संतों की सेवा में अपने जीवन को समर्पित करना चाहिए। ब्रह्मलीन संत वेददास जी महाराज के अस्थि विसर्जन में दयालदास, कृष्ण पंडित, आजाद राजेंद्र, बाबा बलराम दास ने उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए।
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