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ऋषिग्राम के नूतन संन्यासियों को शीर्ष संन्यासियों का आशीर्वाद
Updated Sat, 31 Mar 2018 12:04 AM IST
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हरिद्वार। योग गुरु बाबा रामदेव ने कहा कि गुरुसत्ता अमूर्त को मूर्त रूप प्रदान करती है। अव्यक्त वेद को वेदवित, अव्यक्त शास्त्रा को शास्त्रावित और अव्यक्त ब्रह्म को ब्रह्मवित बनाने का कार्य गुरुसत्ता करती है।
नवदीक्षित संन्यासियों के अनुष्ठान की पूर्णाहूति के अवसर पर ऋषि ग्राम में नूतन संन्यासियों को देश के शीर्ष संतों ने आशीर्वाद प्रदान किया। इस अवसर पर बाबा रामदेव ने कहा कि संन्यास पूर्णता व अनंत का मार्ग है। इसमें संन्यासी को तप करके अपने को कुंदन बनाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि 92 नवदीक्षित संन्यासी देश-विदेश में भारत की प्राचीन ऋषि परंपरा, भारतीय संस्कृति और वेदों को आगे ले जाने का कार्य करेंगे। जिससे भारत एक आध्यात्मिक शक्ति के रूप में प्रतिष्ठापित होगा। उन्होेेंने कहा कि रामनवमी से गुरुपूर्णिमा तक लगभग 500 नवदीक्षु ब्रह्मचारियों वैदिक गुरुकुलम में प्रवेश के लिए आ रहे हैं।
कार्ष्णीपीठाधीश्वर गुरु शरणानंद महाराज ने कहा कि कि संन्यासी ऐसा आचरण न करें जिससे उसकी गुरुसत्ता, समाज, कुल व संस्कृति कलंकित हो। जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद महाराज ने कहा कि यह सकल प्रयास भारत में वैदिक युग लाने के लिए है। यह सारा पुरुषार्थ भारत माता को परम वैभव की ओर ले जाने के लिए है। 21वीं शताब्दी भारत देश तथा आपकी होगी। योग, भारतीय ऋषि परंपरा तथा संस्कृति को पूरा विश्व स्वीकार करेगा। आज भारत को छोड़ पूरा विश्व मनोरोग, भय, अनिद्रा, अवसाद आदि से भरा पड़ा है। उनके आनंद का सूत्रापात यदि होगा तो भारत से ही होगा। यहां से वैदिक युग प्रारंभ होगा। आचार्य बालकृष्ण महाराज ने कहा कि आज संन्यास दीक्षा का समापन और संन्यास जीवन का प्रारंभ है। इस मौके पर गोविंद देव गिरि महाराज, गीता मनीषी ज्ञानानंद महाराज आदि ने भी विचार रखे।
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नवदीक्षित संन्यासियों के अनुष्ठान की पूर्णाहूति के अवसर पर ऋषि ग्राम में नूतन संन्यासियों को देश के शीर्ष संतों ने आशीर्वाद प्रदान किया। इस अवसर पर बाबा रामदेव ने कहा कि संन्यास पूर्णता व अनंत का मार्ग है। इसमें संन्यासी को तप करके अपने को कुंदन बनाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि 92 नवदीक्षित संन्यासी देश-विदेश में भारत की प्राचीन ऋषि परंपरा, भारतीय संस्कृति और वेदों को आगे ले जाने का कार्य करेंगे। जिससे भारत एक आध्यात्मिक शक्ति के रूप में प्रतिष्ठापित होगा। उन्होेेंने कहा कि रामनवमी से गुरुपूर्णिमा तक लगभग 500 नवदीक्षु ब्रह्मचारियों वैदिक गुरुकुलम में प्रवेश के लिए आ रहे हैं।
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कार्ष्णीपीठाधीश्वर गुरु शरणानंद महाराज ने कहा कि कि संन्यासी ऐसा आचरण न करें जिससे उसकी गुरुसत्ता, समाज, कुल व संस्कृति कलंकित हो। जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद महाराज ने कहा कि यह सकल प्रयास भारत में वैदिक युग लाने के लिए है। यह सारा पुरुषार्थ भारत माता को परम वैभव की ओर ले जाने के लिए है। 21वीं शताब्दी भारत देश तथा आपकी होगी। योग, भारतीय ऋषि परंपरा तथा संस्कृति को पूरा विश्व स्वीकार करेगा। आज भारत को छोड़ पूरा विश्व मनोरोग, भय, अनिद्रा, अवसाद आदि से भरा पड़ा है। उनके आनंद का सूत्रापात यदि होगा तो भारत से ही होगा। यहां से वैदिक युग प्रारंभ होगा। आचार्य बालकृष्ण महाराज ने कहा कि आज संन्यास दीक्षा का समापन और संन्यास जीवन का प्रारंभ है। इस मौके पर गोविंद देव गिरि महाराज, गीता मनीषी ज्ञानानंद महाराज आदि ने भी विचार रखे।
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