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Hindi News ›   Uttarakhand ›   disaster in badarinath

बदरीनाथ में ही डटा एक भक्त परिवार

Thu, 04 Jul 2013 09:05 AM IST
रमेश कोठारी
रमेश कोठारी Updated Thu, 04 Jul 2013 09:05 AM IST
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disaster in badarinath

अगर आस्था है तो उसके सामने आपदा की क्या बिसात। बदरीनाथ धाम में यह देखने को भी मिला है। आपदा में बदरीनाथ धाम में फंसे हजारों तीर्थयात्री जहां घरों को लौटने के लिए दिन-रात एक किए हुए थे, वहीं हिमाचल प्रदेश के सोलन का एक परिवार बदरी विशाल के अनुष्ठान में डटा था।

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बीती 26 मई को सोलन के नवीन गोयल अपनी मां अनु शर्मा, दो भाई सुरेंद्र, कार्तिक के साथ बदरीनाथ धाम में 40 दिन के अनुष्ठान के लिए पहुंचे। उन्होंने 27 मई से बदरीनाथ धाम में शंकराचार्य गद्दीस्थल के पास अनुष्ठान शुरू किया। वे नित्य सुबह उठकर तप्त कुंड में स्नान करने के पश्चात महामृत्युंजय जाप करने में लगे रहे।
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किसी की नहीं माने
जहां धाम में फंसे तीर्थयात्री अपने घर जाने को छटपटा रहे थे, वहीं गोयल परिवार अनुष्ठान में तल्लीन होकर डटा था। 30 जून को प्रशासन की टीम ने सभी तीर्थयात्रियों को हेलीकॉप्टर से जोशीमठ भेजा और इनको भी धाम से घर जाने के लिए कहा, तो ये नहीं माने और कहने लगे कि अनुष्ठान पूरा होने के बाद ही वे धाम से जाएंगे।


अनुष्ठान कर रहे नवीन गोयल ने कहा कि बदरीनाथ क्षेत्र भू-बैकुंठ है। यहां देवताओं का वास है। कहा कि पिता की आज्ञा लेकर वे बदरीनाथ में अनुष्ठान करने पहुंचे हैं। इसे अधूरा छोड़कर चले जाएंगे, तो हमारा जिंदा रहना व्यर्थ है। जब मैं यहां आया था, तो बीमार था। यहां आकर मैं स्वस्थ हो गया हूं।

बदरीनाथ्ा में रहने की अनुमति मांगी
मेरी मां 60 वर्षीय है। वह भी सुबह, शाम धाम में तप कर रही है। उन्होंने जिला प्रशासन से बदरीनाथ में ही रहने की अनुमति मांगी। कहा कि हम 12 जुलाई को अनुष्ठान पूर्ण होने के बाद चले जाएंगे और जाने के लिए किसी को परेशान नहीं करेंगे।

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