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Champawat News: सुअरों ने दो दिन में रौंदी 50 नाली फसल
Mon, 13 Mar 2023 11:06 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
Updated Mon, 13 Mar 2023 11:06 PM IST
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फुंगर कांडा क्षेत्र में आलू के खेत। संवाद
चंपावत। फुंगर कांडा क्षेत्र में सुअरों ने आलू की फसल रौंद डाली। इससे चिंतित किसानों ने उद्यान और वन विभाग से मदद की गुहार लगाई है।
यह जिला आलू के उत्पादन के लिए मशहूर है। यहां 1,110 हेक्टेयर क्षेत्र में आलू की खेती होती है। वर्ष 2021-22 में इसमें 11,712 मीट्रिक टन पैदावार हुई लेकिन नगर से लगे कई क्षेत्रों में सूखे के बाद सुअर किसान की मेहनत पर भारी पड़ रहे हैं। फुंगर कांडा क्षेत्र में करीब 50 नाली क्षेत्र में आलू की खड़ी फसल को सुअरों ने दो दिन में खोद डाले। किसानों ने प्रशासन से नुकसान की भरपाई के साथ सुअर से बचाव के उपाय करने की मांग की है। जिला उद्यान अधिकारी टीएन पांडेय का कहना है कि सूखे से बचाव के लिए विभागीय सर्वे किया जाएगा।
133 दिन में चंपावत में सिर्फ 29 मिमी बारिश
चंपावत। जंगली जानवरों के अलावा इस बार फसलों पर सर्दियों में बारिश बेहद कम होने की भी मार पड़ी है। चंपावत में एक नवंबर के बाद 133 दिनों में महज 29 मिमी बारिश हुई जबकि इस अवधि में सामान्य रूप से 60 मिमी बारिश होनी चाहिए थी। इससे भी बुरे हाल जिले के दूसरे हिस्सों के हैं। लोहाघाट में 133 दिनों में सिर्फ सात, पाटी में 7.50 मिमी, टनकपुर-बनबसा में 15.30 मिमी बारिश हुई है।
आलू की खेती उनके लिए आमदनी का बड़ा जरिया है लेकिन कभी मौसम, तो कभी सुअर मेहनत पर पानी फेर रहे हैं। इस बार तो बीज और खाद की रकम भी मिलना मुश्किल लग रहा है। - मनोज, किसान।
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इस क्षेत्र में खेती ही कमाई का आसरा है। पूरे परिवार ने फसल की बुआई से लेकर कई माह तक मेहनत की लेकिन सुअरों ने सारी मेहनत खराब कर दी। इसका मुआवजा मिलना चाहिए। - शेखर, काश्तकार।
पाटी ब्लाॅक को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग
चंपावत। लंबे समय से बारिश न होने से जिले के विभिन्न स्थानों पर सूखे जैसे हालात बनने लगे हैं। इससे चिंतित ग्रामीणों ने सोमवार को डीएम नरेंद्र सिंह भंडारी को ज्ञापन सौंपकर पाटी ब्लाॅक को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग की है। ज्ञापन में कहा गया है कि ब्लाॅक में 14 अक्तूबर 2022 के बाद एक दिन भी बारिश नहीं हुई है। सिंचाई की कोई सुविधा नहीं है। इस कारण उनकी फसलें सूखकर नष्ट हो चुकी हैं। क्षेत्र के प्रभावित किसानों को मुआवजा देने की मांग की है। ज्ञापन में मोहन सिंह माहरा, गणेश राम, भवानी राम, दिनेश चंद्र भट्ट्र, महेंद्र प्रकाश कर्नाटक, योगेश जोशी, अरविंद देउपा, प्रकाश देउपा, दीपक देउपा आदि रहे।
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यह जिला आलू के उत्पादन के लिए मशहूर है। यहां 1,110 हेक्टेयर क्षेत्र में आलू की खेती होती है। वर्ष 2021-22 में इसमें 11,712 मीट्रिक टन पैदावार हुई लेकिन नगर से लगे कई क्षेत्रों में सूखे के बाद सुअर किसान की मेहनत पर भारी पड़ रहे हैं। फुंगर कांडा क्षेत्र में करीब 50 नाली क्षेत्र में आलू की खड़ी फसल को सुअरों ने दो दिन में खोद डाले। किसानों ने प्रशासन से नुकसान की भरपाई के साथ सुअर से बचाव के उपाय करने की मांग की है। जिला उद्यान अधिकारी टीएन पांडेय का कहना है कि सूखे से बचाव के लिए विभागीय सर्वे किया जाएगा।
133 दिन में चंपावत में सिर्फ 29 मिमी बारिश
चंपावत। जंगली जानवरों के अलावा इस बार फसलों पर सर्दियों में बारिश बेहद कम होने की भी मार पड़ी है। चंपावत में एक नवंबर के बाद 133 दिनों में महज 29 मिमी बारिश हुई जबकि इस अवधि में सामान्य रूप से 60 मिमी बारिश होनी चाहिए थी। इससे भी बुरे हाल जिले के दूसरे हिस्सों के हैं। लोहाघाट में 133 दिनों में सिर्फ सात, पाटी में 7.50 मिमी, टनकपुर-बनबसा में 15.30 मिमी बारिश हुई है।
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आलू की खेती उनके लिए आमदनी का बड़ा जरिया है लेकिन कभी मौसम, तो कभी सुअर मेहनत पर पानी फेर रहे हैं। इस बार तो बीज और खाद की रकम भी मिलना मुश्किल लग रहा है। - मनोज, किसान।
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इस क्षेत्र में खेती ही कमाई का आसरा है। पूरे परिवार ने फसल की बुआई से लेकर कई माह तक मेहनत की लेकिन सुअरों ने सारी मेहनत खराब कर दी। इसका मुआवजा मिलना चाहिए। - शेखर, काश्तकार।
पाटी ब्लाॅक को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग
चंपावत। लंबे समय से बारिश न होने से जिले के विभिन्न स्थानों पर सूखे जैसे हालात बनने लगे हैं। इससे चिंतित ग्रामीणों ने सोमवार को डीएम नरेंद्र सिंह भंडारी को ज्ञापन सौंपकर पाटी ब्लाॅक को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग की है। ज्ञापन में कहा गया है कि ब्लाॅक में 14 अक्तूबर 2022 के बाद एक दिन भी बारिश नहीं हुई है। सिंचाई की कोई सुविधा नहीं है। इस कारण उनकी फसलें सूखकर नष्ट हो चुकी हैं। क्षेत्र के प्रभावित किसानों को मुआवजा देने की मांग की है। ज्ञापन में मोहन सिंह माहरा, गणेश राम, भवानी राम, दिनेश चंद्र भट्ट्र, महेंद्र प्रकाश कर्नाटक, योगेश जोशी, अरविंद देउपा, प्रकाश देउपा, दीपक देउपा आदि रहे।