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इंटर पास छात्राओं के साथ नाइंसाफी क्यों?
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चंपावत। जिले में 2017 में इंटर कर चुकीं छात्राएं गौरा देवी कन्या धन योजना के लाभ से वंचित हैं। तीन साल बाद भी उन्हें यह रकम नहीं मिली है। आगे भी उम्मीद धुंधली ही हैै। इस अनदेखी से न केेवल बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान सवालों के घेरे में है बल्कि इन हजारों छात्राओं के साथ भी नाइंसाफी है।
2017 में इंटर कर चुकीं चंपावत जिले की 1505 छात्राओं को गौरा देवी कन्या धन योजना का लाभ नहीं मिला है। पढ़ाई केेे लिए प्रेरित करने को इस योजना में हर छात्रा को 50 हजार रुपये दिए जाते हैं। इंटर कर चुकीं उत्तराखंड की छात्राओं को यह रकम न मिलने की वजह कन्या धन योजना में बदलाव से संबंधित शासनादेश में त्रुटि है।
इन छात्राओं का कहना है कि योजना के तहत मिलने वाली राशि को पाने के लिए वे कई बार विभाग से लेकर प्रशासन के चक्कर काट चुकीं हैं, लेकिन धन मिलना तो दूर, उन्हें सही जानकारी तक देने वाला कोई नहीं है। छात्राओं का आरोप है कि जनप्रतिनिधियों के स्तर से भी उनके मामलों को गंभीरता से नहीं उठाया गया।
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इसलिए नहीं मिला योजना का लाभ
सरकार ने जुलाई 2017 में कन्या धन योजना को नंदा देवी योजना में एकीकृत कर नंदा गौरा योजना में बदल इसके संचालन की जिम्मेदारी कार्यक्रम विभाग को दी। कार्यक्रम विभाग के पास नई योजना के संचालन की जिम्मेदारी पहली जुलाई 2017 से है, जबकि इससे पूर्व 31 मार्च 2017 तक नंदा देवी योजना का संचालन समाज कल्याण विभाग करता था लेकिन पहली अप्रैल से 30 जून तक की अवधि में इस योजना का कोई खैरख्वाह नहीं रहा। छात्राओं ने मई 2017 में परीक्षा पास की।
कोट..
2017 में इंटर पास करने वाली छात्राओं को गौरा देवी कन्या धन योजना का लाभ न मिलने के मामले को वीडियो कांफ्रेंसिंग में उठाने के अलावा कई बार शासन को पत्र भेजा गया है। अलबत्ता, न बजट आया है और ना ही इस संबंध में कोई निर्देश मिले हैं। -सुरेंद्र नारायण पांडेय, डीएम, चंपावत।
छात्राओं को योजना का लाभ मिला है। ये छात्राओं के साथ नाइंसाफी है। -प्रिया मुरारी, टनकपुर।
योजना में किए गए बदलाव के वक्त 2017 में इंटर पास करने वालीं छात्राओं के हितों को नजरंदाज किया गया है।
-संध्या चतुर्वेदी, लोहाघाट।
छात्राओं को पढ़ाई को प्रेरित करने के लिए संचालित इस योजना का लाभ नहीं दिया जाने से वे मायूस हैं। अविलंब ये रकम दी जाए।
2017 में प्रोत्साहन राशि न मिलना सरासर नाइंसाफी है। इससे छात्राओं का मनोबल गिरा है। उन्हें ये रकम दी जानी चाहिए।
- तनुजा बड़ेला, चंपावत।
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2017 में इंटर कर चुकीं चंपावत जिले की 1505 छात्राओं को गौरा देवी कन्या धन योजना का लाभ नहीं मिला है। पढ़ाई केेे लिए प्रेरित करने को इस योजना में हर छात्रा को 50 हजार रुपये दिए जाते हैं। इंटर कर चुकीं उत्तराखंड की छात्राओं को यह रकम न मिलने की वजह कन्या धन योजना में बदलाव से संबंधित शासनादेश में त्रुटि है।
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इन छात्राओं का कहना है कि योजना के तहत मिलने वाली राशि को पाने के लिए वे कई बार विभाग से लेकर प्रशासन के चक्कर काट चुकीं हैं, लेकिन धन मिलना तो दूर, उन्हें सही जानकारी तक देने वाला कोई नहीं है। छात्राओं का आरोप है कि जनप्रतिनिधियों के स्तर से भी उनके मामलों को गंभीरता से नहीं उठाया गया।
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इसलिए नहीं मिला योजना का लाभ
सरकार ने जुलाई 2017 में कन्या धन योजना को नंदा देवी योजना में एकीकृत कर नंदा गौरा योजना में बदल इसके संचालन की जिम्मेदारी कार्यक्रम विभाग को दी। कार्यक्रम विभाग के पास नई योजना के संचालन की जिम्मेदारी पहली जुलाई 2017 से है, जबकि इससे पूर्व 31 मार्च 2017 तक नंदा देवी योजना का संचालन समाज कल्याण विभाग करता था लेकिन पहली अप्रैल से 30 जून तक की अवधि में इस योजना का कोई खैरख्वाह नहीं रहा। छात्राओं ने मई 2017 में परीक्षा पास की।
कोट..
2017 में इंटर पास करने वाली छात्राओं को गौरा देवी कन्या धन योजना का लाभ न मिलने के मामले को वीडियो कांफ्रेंसिंग में उठाने के अलावा कई बार शासन को पत्र भेजा गया है। अलबत्ता, न बजट आया है और ना ही इस संबंध में कोई निर्देश मिले हैं। -सुरेंद्र नारायण पांडेय, डीएम, चंपावत।
छात्राओं को योजना का लाभ मिला है। ये छात्राओं के साथ नाइंसाफी है। -प्रिया मुरारी, टनकपुर।
योजना में किए गए बदलाव के वक्त 2017 में इंटर पास करने वालीं छात्राओं के हितों को नजरंदाज किया गया है।
-संध्या चतुर्वेदी, लोहाघाट।
छात्राओं को पढ़ाई को प्रेरित करने के लिए संचालित इस योजना का लाभ नहीं दिया जाने से वे मायूस हैं। अविलंब ये रकम दी जाए।
2017 में प्रोत्साहन राशि न मिलना सरासर नाइंसाफी है। इससे छात्राओं का मनोबल गिरा है। उन्हें ये रकम दी जानी चाहिए।
- तनुजा बड़ेला, चंपावत।