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Champawat News: विश्राम घाट और कोट अमोड़ी में मलबा आने से आधे घंटे यातायात बाधित
Tue, 21 Mar 2023 11:51 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
Updated Tue, 21 Mar 2023 11:51 PM IST
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चंपावत। जिले में मंगलवार को दिन भर झमाझम हुई बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर कोट अमोड़ी और विश्राम घाट के पास मलबा आने के कारण करीब आधे घंटे तक यातायात बाधित रहा। राजमार्ग पर कई स्थानों पर भारी मात्रा में मलबा गिरने से यात्रियों और वाहन चालकों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। राजमार्ग पर दोनों ओर वाहनों की लाइन लग गई।
लंबे समय बाद क्षेत्र में झमाझम बारिश होने से किसानों के चेहरे खिल गए हैं। करीब छह महीने बाद सोमवार से रुक-रुक कर हो रही बारिश से किसानों ने राहत की सांस ली है। बारिश से दम तोड़ रही फसलों में नई जान आई है। सहायक उद्यान अधिकारी आशीष रंजन खर्कवाल का कहना है कि यह बारिश आलू की फसल के लिए बेहद लाभकारी है। वर्तमान में आलू के बीज अंकुरित हो रहे हैं जिसके लिए पानी की आवश्यकता थी। बारिश होने से आलू के पौधों में अच्छी बढ़त होगी। हालांकि कहीं-कहीं भारी बारिश और ओलावृष्टि से फसलों, फलों को नुकसान पहुंचा है।उन्होंने बताया कि पूर्व में ओलावृष्टि से फल-पौधों को आंशिक नुकसान पहुंचा था। यदि अब ओलावृष्टि होती है तो इससे काफी नुकसान होगा। उन्होंने किसानों को सब्जी और फलों को ओलों की मार से बचाने एंटी हेलनेट (ओलों की मार से बचाने वाली जाली) का प्रयोग करने की सलाह दी है। कहा कि बारिश के बाद जमीन में नमी पर्याप्त है। किसान तैयार पौधों की नर्सरी को खेतों में लगा सकते हैं।
चंपावत तापमान
अधिकतम 13 डिग्री सेल्शियस, न्यूनतम 08 डिग्री सेल्शियस
बाक्स
कहां कितनी हुई बारिश
चंपावत-20 एमएम
पाटी-11 एमएम
लोहाघाट-07 एमएम
बनबसा-22 एमएम
बाक्स
गेहूं की खड़ी फसल को पहुंचा नुकसान
चंपावत। भारी बारिश के कारण जिले के मैदानी क्षेत्र टनकपुर और बनबसा में जल भराव की स्थिति से लोगों को जूझना पड़ा। तराई क्षेत्र में खेतों में खड़ी गेहूं की फसल को काफी नुकसान पहुंचा है। जिले के लधियाघाटी, क्वैरालाघाटी और पंचेश्वर आदि क्षेत्रों में भी गेहूं की फसल को नुकसान पहुंचा है। संवाद
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लंबे समय बाद क्षेत्र में झमाझम बारिश होने से किसानों के चेहरे खिल गए हैं। करीब छह महीने बाद सोमवार से रुक-रुक कर हो रही बारिश से किसानों ने राहत की सांस ली है। बारिश से दम तोड़ रही फसलों में नई जान आई है। सहायक उद्यान अधिकारी आशीष रंजन खर्कवाल का कहना है कि यह बारिश आलू की फसल के लिए बेहद लाभकारी है। वर्तमान में आलू के बीज अंकुरित हो रहे हैं जिसके लिए पानी की आवश्यकता थी। बारिश होने से आलू के पौधों में अच्छी बढ़त होगी। हालांकि कहीं-कहीं भारी बारिश और ओलावृष्टि से फसलों, फलों को नुकसान पहुंचा है।उन्होंने बताया कि पूर्व में ओलावृष्टि से फल-पौधों को आंशिक नुकसान पहुंचा था। यदि अब ओलावृष्टि होती है तो इससे काफी नुकसान होगा। उन्होंने किसानों को सब्जी और फलों को ओलों की मार से बचाने एंटी हेलनेट (ओलों की मार से बचाने वाली जाली) का प्रयोग करने की सलाह दी है। कहा कि बारिश के बाद जमीन में नमी पर्याप्त है। किसान तैयार पौधों की नर्सरी को खेतों में लगा सकते हैं।
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अधिकतम 13 डिग्री सेल्शियस, न्यूनतम 08 डिग्री सेल्शियस
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कहां कितनी हुई बारिश
चंपावत-20 एमएम
पाटी-11 एमएम
लोहाघाट-07 एमएम
बनबसा-22 एमएम
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गेहूं की खड़ी फसल को पहुंचा नुकसान
चंपावत। भारी बारिश के कारण जिले के मैदानी क्षेत्र टनकपुर और बनबसा में जल भराव की स्थिति से लोगों को जूझना पड़ा। तराई क्षेत्र में खेतों में खड़ी गेहूं की फसल को काफी नुकसान पहुंचा है। जिले के लधियाघाटी, क्वैरालाघाटी और पंचेश्वर आदि क्षेत्रों में भी गेहूं की फसल को नुकसान पहुंचा है। संवाद
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