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शौचालय बिन चंपावत के ऐतिहासिक देवालय
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लोहाघाट का प्रसिद्घ ऋषेश्वर महादेव मंदिर।
- फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत/लोहाघाट। उत्तराखंड के कई जिलों की तरह चंपावत भी 2016 में ओडीएफ (खुले में शौच से मुक्त) हो चुका है, लेकिन ओडीएफ के ये दावे जमीन पर नहीं, सिर्फ कागजों की शोभा बने हैं। पहले शौचालय, फिर देवालय की थीम देकर खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शौचालयों की महत्ता को दर्शाने के साथ लोगों को जागरूक किया, लेकिन कई ऐतिहासिक देवालयों में शौचालय नहीं है। श्रद्धालु या अतिथि ही नहीं, महंत और संत भी खुले में शौच जाने को अब भी मजबूर हैं। 1962 से पूर्व तक कैलाश मानसरोवर यात्रा पथ का हिस्सा रहे लोहाघाट के ऋषेश्वर मंदिर और कालसर्प योग के लिए प्रसिद्ध डिप्टेश्वर मंदिर और धर्मशाला में आने वाले लोग नदी के समीप शौच जाने को मजबूर हैं।
अयोध्या में देश की पहचान से जुड़े राम मंदिर की राह प्रशस्त करने वाली भाजपा सरकार दिल्ली ही नहीं, देहरादून में भी है। चंपावत जिला पंचायत से लेकर चार में से तीन नगर निकायों तक में उसी का राज है, लेकिन लोहावती नदी के किनारे स्थित ऋषेश्वर, गंडकी नदी के किनारे डिप्टेश्वर और लोहाघाट के देवीधार मंदिर की ही बात करें तो कहीं भी एक अदद शौचालय नहीं हैं।
पौराणिक महत्व के ऋषेश्वर मंदिर की मान्यता है कि कैलाश पर्वत जाते वक्त भगवान शिव लोगों को न्याय देने के लिए अपने गण बेताल को यहां छोड़ गए थे। इन मंदिरों में भागवत पुराण, शिव पुराण, श्रीकृष्ण लीला सहित तमाम आयोजन होते हैं। इनमें संत-महंत, श्रद्धालुओं और अन्य अतिथियों के लिए धर्मशाला और हॉल भी हैं। कोरोना काल को छोड़ दें तो सामान्य रूप से यहां हर साल सवा लाख लोगों की आवाजाही होती है, लेकिन इन मंदिरों की धर्मशालाओं में अतिथियों के लिए शौचालय की व्यवस्था तक नहीं है। एडीएम टीएस मर्तोलिया का कहना है कि प्रस्ताव आने पर जरूरी कार्यवाही की जाएगी।
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कोट
डिप्टेश्वर मंदिर कालसर्प योग का प्रमुख धार्मिक स्थल है। मंदिर परिसर में एक भी शौचालय व स्नानागार नहीं होने से दिक्कत हो रही है। कई बार इस जरूरत को जन प्रतिनिधियों के समक्ष भी उठाया जा चुका है। -महंत बाल योगी,
डिप्टेश्वर मंदिर।
कोट
मंदिर की धर्मशाला में शौचालय और मूत्रालय की व्यवस्था नहीं होने से असुविधा के साथ श्रद्धालुओं की आस्था भी प्रभावित होती है। लोग खुले में शौच जाने को मजबूर हैं। -प्रहलाद सिंह मेहता, अध्यक्ष, ऋषेश्वर महादेव मंदिर समिति।
कोट
ऋषेश्वर मंदिर और धर्मशाला की दिक्कत को देखते हुए जिला पंचायत शौचालय, मूत्रालय और स्नानागार की व्यवस्था करा रहा है। एक अटैच शौचालय-स्नानागार के अलावा तीन-तीन मूत्रालय और शौचालय के साथ ही दो स्नानागार बनाएगा। तीन माह के भीतर यह काम पूरा करा लिया जाएगा। -ज्योति राय, अध्यक्ष, जिला पंचायत।
जिले में 405 नए शौचालय बनेंगे
चंपावत जिले में 2012 से अब तक 50 हजार से अधिक शौचालय बनाए जा चुके हैं। स्वजल परियोजना के परियोजना निदेशक विलाल युनूस का कहना है कि 2012 के सर्वे के अनुसार जिले में 49209 परिवारों के लिए शौचालय बनाने का लक्ष्य नवंबर 2016 में हासिल किया जा चुका है। 3057 लाभार्थियों को बजट नहीं होने से भुगतान नहीं किया जा सका है। इसके बाद विभिन्न गांवों में पृथक होने वाले परिवार और प्रवासी भी शौचालय की मांग कर रहे हैं। इस तरह के अब तक 405 आवेदन आ चुके हैं।
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अयोध्या में देश की पहचान से जुड़े राम मंदिर की राह प्रशस्त करने वाली भाजपा सरकार दिल्ली ही नहीं, देहरादून में भी है। चंपावत जिला पंचायत से लेकर चार में से तीन नगर निकायों तक में उसी का राज है, लेकिन लोहावती नदी के किनारे स्थित ऋषेश्वर, गंडकी नदी के किनारे डिप्टेश्वर और लोहाघाट के देवीधार मंदिर की ही बात करें तो कहीं भी एक अदद शौचालय नहीं हैं।
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पौराणिक महत्व के ऋषेश्वर मंदिर की मान्यता है कि कैलाश पर्वत जाते वक्त भगवान शिव लोगों को न्याय देने के लिए अपने गण बेताल को यहां छोड़ गए थे। इन मंदिरों में भागवत पुराण, शिव पुराण, श्रीकृष्ण लीला सहित तमाम आयोजन होते हैं। इनमें संत-महंत, श्रद्धालुओं और अन्य अतिथियों के लिए धर्मशाला और हॉल भी हैं। कोरोना काल को छोड़ दें तो सामान्य रूप से यहां हर साल सवा लाख लोगों की आवाजाही होती है, लेकिन इन मंदिरों की धर्मशालाओं में अतिथियों के लिए शौचालय की व्यवस्था तक नहीं है। एडीएम टीएस मर्तोलिया का कहना है कि प्रस्ताव आने पर जरूरी कार्यवाही की जाएगी।
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डिप्टेश्वर मंदिर कालसर्प योग का प्रमुख धार्मिक स्थल है। मंदिर परिसर में एक भी शौचालय व स्नानागार नहीं होने से दिक्कत हो रही है। कई बार इस जरूरत को जन प्रतिनिधियों के समक्ष भी उठाया जा चुका है। -महंत बाल योगी,
डिप्टेश्वर मंदिर।
कोट
मंदिर की धर्मशाला में शौचालय और मूत्रालय की व्यवस्था नहीं होने से असुविधा के साथ श्रद्धालुओं की आस्था भी प्रभावित होती है। लोग खुले में शौच जाने को मजबूर हैं। -प्रहलाद सिंह मेहता, अध्यक्ष, ऋषेश्वर महादेव मंदिर समिति।
कोट
ऋषेश्वर मंदिर और धर्मशाला की दिक्कत को देखते हुए जिला पंचायत शौचालय, मूत्रालय और स्नानागार की व्यवस्था करा रहा है। एक अटैच शौचालय-स्नानागार के अलावा तीन-तीन मूत्रालय और शौचालय के साथ ही दो स्नानागार बनाएगा। तीन माह के भीतर यह काम पूरा करा लिया जाएगा। -ज्योति राय, अध्यक्ष, जिला पंचायत।
जिले में 405 नए शौचालय बनेंगे
चंपावत जिले में 2012 से अब तक 50 हजार से अधिक शौचालय बनाए जा चुके हैं। स्वजल परियोजना के परियोजना निदेशक विलाल युनूस का कहना है कि 2012 के सर्वे के अनुसार जिले में 49209 परिवारों के लिए शौचालय बनाने का लक्ष्य नवंबर 2016 में हासिल किया जा चुका है। 3057 लाभार्थियों को बजट नहीं होने से भुगतान नहीं किया जा सका है। इसके बाद विभिन्न गांवों में पृथक होने वाले परिवार और प्रवासी भी शौचालय की मांग कर रहे हैं। इस तरह के अब तक 405 आवेदन आ चुके हैं।