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Champawat News: स्कूल में न लैब है ना ही कंप्यूटर पढ़ाने वाले शिक्षक
Mon, 06 Jan 2025 10:46 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
Updated Mon, 06 Jan 2025 10:46 PM IST
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चंपावत। जीआईसी बनवाल गांव शिक्षकों की कमी से जूझ रहा है। विगत चार वर्ष से प्रधानाचार्य का प्रभार भी शिक्षक के हवाले है। जीआईसी बिनवाल गांव में वर्तमान में छात्र संख्या 105 है। इसमें 56 छात्राएं और 45 छात्र हैं।
विद्यालय में परेवा, धरसों, गौलडांडा कुल्यालगांव और बिनवाल गांव ग्राम पंचायत के बच्चे पढ़ाई के लिए आते हैं। हाईस्कूल में गणित, अंग्रेजी, सामाजिक विज्ञान और कला के अध्यापक नहीं हैं। यहां पर दो अतिथि शिक्षक और चार पूर्णकालिक शिक्षकों को मिलाकर छह शिक्षक है।
इसी प्रकार इंटर में भी राजनीतिक शास्त्र, अर्थशास्त्र, अंग्रेजी, जीव विज्ञान, रसायनिक विज्ञान, भौतिक विज्ञान के प्राध्यापक नहीं हैं। यहां पर एक प्रवक्ता पूर्णकालिक हिंदी विषय में है। इसके अलावा दो गेस्ट टीचर संस्कृत और भूगोल पढ़ाते हैं। विद्यालय में कंप्यूटर पढ़ाने वाला कोई नहीं है। लैब भी नहीं हैं। इन अव्यवस्थाओं के बीच बच्चों के लिए पढ़ाई आसान नहीं हो रही है।
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विद्यालय पहुंचने के लिए बच्चों को एक से पांच किमी तक पैदल दूरी तय करना पड़ता है। अभिभावकों का कहना है यदि विद्यालय का यही हाल रहा तो आगे और भी छात्र संख्या कम हो जाएगी। इन्हीं दिक्कतों के चलते पांच वर्ष पूर्व यहां पहले भी एक प्राइमरी पाठशाला स्कूल बंद हो चुका है।
नारायण नाथ ने कहा कि विद्यालय में शिक्षकों की कमी है। पेयजल की व्यवस्था भी नहीं है। विद्यालय की छत कभी भी गिर सकती है। यहां पर व्यवस्थाओं का दुरुस्त करने की जरूरत है।
भूपाल गिरी ने कहा कि विद्यालय में हमेशा ही शिक्षकों की कमी रहती है। विद्यालय में छात्र-छात्राएं बड़ी दूर से पैदल चलकर आते-जाते हैं। विद्यालय आने-जाने में ही पूरा दिन निकल जाता है। इसके अलावा यहां सुविधाओं का भी अभाव है।
प्रभारी प्रधानाचार्य नवीन चंद्र का कहना है कि अति दुर्गम क्षेत्र में होने के कारण यहां सुविधाएं कम और परेशानियां अधिक है। शौचालय में पानी की कमी होने से छात्र-छात्राओं को परेशानी हो रही है।
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विद्यालय में परेवा, धरसों, गौलडांडा कुल्यालगांव और बिनवाल गांव ग्राम पंचायत के बच्चे पढ़ाई के लिए आते हैं। हाईस्कूल में गणित, अंग्रेजी, सामाजिक विज्ञान और कला के अध्यापक नहीं हैं। यहां पर दो अतिथि शिक्षक और चार पूर्णकालिक शिक्षकों को मिलाकर छह शिक्षक है।
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इसी प्रकार इंटर में भी राजनीतिक शास्त्र, अर्थशास्त्र, अंग्रेजी, जीव विज्ञान, रसायनिक विज्ञान, भौतिक विज्ञान के प्राध्यापक नहीं हैं। यहां पर एक प्रवक्ता पूर्णकालिक हिंदी विषय में है। इसके अलावा दो गेस्ट टीचर संस्कृत और भूगोल पढ़ाते हैं। विद्यालय में कंप्यूटर पढ़ाने वाला कोई नहीं है। लैब भी नहीं हैं। इन अव्यवस्थाओं के बीच बच्चों के लिए पढ़ाई आसान नहीं हो रही है।
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विद्यालय पहुंचने के लिए बच्चों को एक से पांच किमी तक पैदल दूरी तय करना पड़ता है। अभिभावकों का कहना है यदि विद्यालय का यही हाल रहा तो आगे और भी छात्र संख्या कम हो जाएगी। इन्हीं दिक्कतों के चलते पांच वर्ष पूर्व यहां पहले भी एक प्राइमरी पाठशाला स्कूल बंद हो चुका है।
नारायण नाथ ने कहा कि विद्यालय में शिक्षकों की कमी है। पेयजल की व्यवस्था भी नहीं है। विद्यालय की छत कभी भी गिर सकती है। यहां पर व्यवस्थाओं का दुरुस्त करने की जरूरत है।
भूपाल गिरी ने कहा कि विद्यालय में हमेशा ही शिक्षकों की कमी रहती है। विद्यालय में छात्र-छात्राएं बड़ी दूर से पैदल चलकर आते-जाते हैं। विद्यालय आने-जाने में ही पूरा दिन निकल जाता है। इसके अलावा यहां सुविधाओं का भी अभाव है।
प्रभारी प्रधानाचार्य नवीन चंद्र का कहना है कि अति दुर्गम क्षेत्र में होने के कारण यहां सुविधाएं कम और परेशानियां अधिक है। शौचालय में पानी की कमी होने से छात्र-छात्राओं को परेशानी हो रही है।