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पहली जन सुनवाई में नहीं सुनाई दिए विरोध के स्वर

Wed, 09 Aug 2017 10:51 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, चंपावत।
अमर उजाला ब्यूरो, चंपावत। Updated Wed, 09 Aug 2017 10:51 PM IST
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The voice of protest at the first hearing was not heard
जन सुनवाई के दौरान आपत्तियां दर्ज कराते जनप्रतिनिधि। - फोटो : अमर उजाला

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जिले में पांच नदियों के संगम पंचेश्वर में बहुउद्देशीय बांध परियोजना को लेकर बुधवार को आयोजित पहली जन सुनवाई में विरोध के स्वर सुनाई नहीं दिए। प्रस्तावित बांध के डूब क्षेत्र में आने वाले दूरदराज इलाकों से आए अधिकांश ग्रामीणों ने बांध के समर्थन में बात कही। अलबत्ता सभी लोगों का कहना था कि विकास के लिए बांध का निर्माण जरूरी है, लेकिन सदियों से अपनी जिस जमीन पर रह रहे हैं, उसके छूटने का मलाल होना लाजिमी है। अधिकांश लोगों ने बेहतर पुनर्वास और विस्थापितों की मंशा के अनुरूप ठोस विस्थापन का आश्वासन देने पर बांध का पूरी तरह से समर्थन करने का ऐलान किया।

बहुउद्देशीय बांध निर्माण को लेकर बाराकोट ब्लॉक मुख्यालय में आयोजित पहली पर्यावरणीय जन सुनवाई को लेकर प्रभावित क्षेत्र के लोगों में कौतूहल का माहौल था। डूब क्षेत्र के गांवों के लोग सुबह से ही सुनवाई स्थल पर पहुंचना शुरू हो गए थे। हर किसी के मन में सैकड़ों आशंकाएं और सवाल थे कि बांध की डीपीआर के अनुरूप प्रभावित क्षेत्र के लोगों को उनकी भूमि, मकान और अन्य संपत्ति का मुआवजा किस तरह और किस रूप में प्राप्त होगा। जन सुनवाई के दौरान विरोध की आशंका को देखते हुए पुलिस बल की व्यापक तैनाती की गई थी, लेकिन पूरी जन सुनवाई के दौरान विरोध संबंधी कोई भी बात सामने नहीं आई। अलबत्ता एक-दो जनप्रतिनिधियों ने बड़े बांध की खामियां गिनाते हुए इसके प्रतीकात्मक विरोध का ऐलान किया। वहीं लोगों की नाराजगी इस बात को लेकर थी कि जन सुनवाई की प्रक्रिया के लिए प्रशासन की ओर से उन्हें पर्याप्त समय नहीं दिया गया।
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पंचेश्वर बांध प्राधिकरण में भारत की ओर से सीईओ अशोक खाया और नेपाल के सीईओ महेंद्र गुरूंग, जिलाधिकारी डा.अहमद इकबाल, विधायक पूरन सिंह फर्त्याल, ब्लॉक प्रमुख निर्मल माहरा, योगेश मेहता, हयात सिंह माहरा, विधायक प्रतिनिधि मुकेश कलखुड़िया के अलावा वाप्कोस कंपनी के अधिकारियों ने डूब क्षेत्र के ग्रामीणों की ओर से उठाई जा रही आशंकाओं का समाधान किया। कहा गया कि जन सुनवाई में दर्ज की गई सभी आपत्तियों और शिकायतों को केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। आपत्तियों के निस्तारण के बाद ही पंचेश्वर बांध निर्माण की कार्रवाई शुरू की जाएगी। बता दें कि चंपावत जिले में पहली जन सुनवाई के बाद पिथौरागढ़ जिले में 11 अगस्त और अल्मोड़ा जिले में 20 अगस्त को पर्यावरणीय जनसुनवाई होना प्रस्तावित है।
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पर्यावरणीय जनसुनवाई पर बहुत कम बोले लोग 
चंपावत। पंचेश्वर बांध परियोजना की पर्यावरणीय जन सुनवाई के लिए बुलाई गई प्रभावित गांवों के ग्रामीणों की बैठक में बहुत कम लोग पर्यावरणीय जन सुनवाई पर बोले। डूब क्षेत्र के ग्रामीणों की आपत्तियां उनके विस्थापन, पूर्वजों की अचल संपत्ति, धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों, स्कूल, पंचायती संस्थाओं आदि को लेकर थी, जबकि दिल्ली से आए एक गैर सरकारी संगठन के प्रतिनिधि ने महाशीर मछली के संरक्षण के साथ ही बांध विरोधी मुहिम चलाने वाले विमल भाई ने जरूर पर्यावरणीय सरोकारों से संबंधित आपत्तियों को उठाया।



सुनवाई में कम रही महिला प्रतिनिधियों की संख्या
चंपावत। पंचेश्वर बांध की जन सुनवाई में अपेक्षा के अनुरूप त्रिस्तरीय पंचायत की महिला प्रतिनिधियों की संख्या बेहद कम रही। विविल की ग्राम प्रधान सीता देवी ने जरूर प्रमुखता से अपनी बातों को रखा। महिलाओं की अपेक्षा पुरुष जनप्रतिनिधियों ने बड़ी बेबाकी से अपनी बातों को रखा। जन सुनवाई स्थल पर हो रही कार्रवाई के व्यापक प्रसारण के लिए जगह-जगह स्क्रीन लगा कर वहां लोगों के बैठने की व्यवस्था की गई थी।
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