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छात्र नमन जोशी ने शुरू की अनूठी पहल
अमर उजाला ब्यूराे चंपावत।
Updated Fri, 04 May 2018 10:38 PM IST
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चंपावत जीजीआईसी में हिंदी संवाद कार्यक्रम में जानकारी देते नमन जोशी।
- फोटो : अमर उजाला
आज जिस प्रकार हिंदी भाषा और प्रादेशिक भाषाओं का महत्व और उनका प्रभुत्व भारत देश में कम हो रहा है, वह किसी छिपा नहीं है। इसी बात को मुद्दा बनाकर जिले के छात्र नमन जोशी की ओर से अनूठी पहल करते हुए हिंदी संवाद नाम से एक कार्यक्रम चलाया जा रहा है। जिसके तहत विभिन्न स्कूलों में कार्यक्रम आयोजित कर छात्र-छात्राओं को हिंदी भाषा के महत्व और उसके इतिहास की जानकारी दी जा रही है। हिंदी संवाद कार्यक्रम की टीम स्कूल दर स्कूल जाकर छात्र-छात्राओं को उपयोगी जानकारी दे रही है।
नमन जोशी के अनुसार उनका हिंदी संवाद कार्यक्रम दो भागों में विभाजित है। पहले भाग में वह हिंदी भाषा के प्रति अपनी मानसिकता और दृष्टिकोण को छात्र-छात्राओं के समक्ष रखते हैं और साथ ही साथ इसी भाग में हिंदी एवं प्रादेशिक भाषाओं की महत्वता और उसके इतिहास से भी छात्र-छात्राओं को अवगत कराया जाता है। जबकि दूसरे भाग में छात्र-छात्राएं अपनी मानसिकता और दृष्टिकोण को रखते हैं। इस कार्यक्रम में अन्य सामाजिक मुद्दों पर भी छात्र-छात्राओं और शिक्षकों से भी वार्तालाप की जा रही है। अब तक राधेहरि इंटर कालेज टनकपुर, जीजीआईसी टनकपुर, एबीसी आल्मामैटर, मल्लिकार्जुन स्कूल और जीजीआईसी चंपावत में अब तक कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं।
हिंदी संवाद कार्यक्रम टीम में शामिल हैं युवा
छात्रों में हिंदी भाषा के प्रति रुचि बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित हिंदी संवाद कार्यक्रम की टीम में जिले के तमाम युवा शामिल हैं। जिनमें नीरज पुजारी, मोहित खर्कवाल, योगेश पुनेठा, नीरज जोशी, हरीश जोशी आदि स्कूलों में हिंदी भाषा के महत्व और उसके इतिहास की जानकारी दे रहे हैं।
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पूर्व में चलाया गया था बोर्ड से डर नहीं कार्यक्रम
हिंदी संवाद कार्यक्रम के सूत्रधार नमन जोशी महज 14 वर्ष की आयु में ही मेड एलियन नामक उपन्यास लिखकर चर्चा में आए थे। इसके अलावा वह दो सालों से बोर्ड से डर नहीं (बीएसडीएन) कार्यक्रम भी चला रहे हैं। जिसके तहत वह दसवीं और बारहवीं कक्षा के बोर्ड परीक्षार्थियों के मन से बोर्ड परीक्षा के खौफ को हटाते हैं।
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नमन जोशी के अनुसार उनका हिंदी संवाद कार्यक्रम दो भागों में विभाजित है। पहले भाग में वह हिंदी भाषा के प्रति अपनी मानसिकता और दृष्टिकोण को छात्र-छात्राओं के समक्ष रखते हैं और साथ ही साथ इसी भाग में हिंदी एवं प्रादेशिक भाषाओं की महत्वता और उसके इतिहास से भी छात्र-छात्राओं को अवगत कराया जाता है। जबकि दूसरे भाग में छात्र-छात्राएं अपनी मानसिकता और दृष्टिकोण को रखते हैं। इस कार्यक्रम में अन्य सामाजिक मुद्दों पर भी छात्र-छात्राओं और शिक्षकों से भी वार्तालाप की जा रही है। अब तक राधेहरि इंटर कालेज टनकपुर, जीजीआईसी टनकपुर, एबीसी आल्मामैटर, मल्लिकार्जुन स्कूल और जीजीआईसी चंपावत में अब तक कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं।
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हिंदी संवाद कार्यक्रम टीम में शामिल हैं युवा
छात्रों में हिंदी भाषा के प्रति रुचि बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित हिंदी संवाद कार्यक्रम की टीम में जिले के तमाम युवा शामिल हैं। जिनमें नीरज पुजारी, मोहित खर्कवाल, योगेश पुनेठा, नीरज जोशी, हरीश जोशी आदि स्कूलों में हिंदी भाषा के महत्व और उसके इतिहास की जानकारी दे रहे हैं।
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पूर्व में चलाया गया था बोर्ड से डर नहीं कार्यक्रम
हिंदी संवाद कार्यक्रम के सूत्रधार नमन जोशी महज 14 वर्ष की आयु में ही मेड एलियन नामक उपन्यास लिखकर चर्चा में आए थे। इसके अलावा वह दो सालों से बोर्ड से डर नहीं (बीएसडीएन) कार्यक्रम भी चला रहे हैं। जिसके तहत वह दसवीं और बारहवीं कक्षा के बोर्ड परीक्षार्थियों के मन से बोर्ड परीक्षा के खौफ को हटाते हैं।