फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Champawat News ›   rice value low

बनबसा, टनकपुर में कम हुई धान की खरीद

Tue, 13 Feb 2018 10:05 PM IST
अमर उजाला ब्यूूूूराे चंपावत।
अमर उजाला ब्यूूूूराे चंपावत। Updated Tue, 13 Feb 2018 10:05 PM IST
विज्ञापन

बनबसा-टनकपुर क्षेत्र में तोल बंद होने तक इस वर्ष केवल 8976 क्विंटल ही धान की खरीद हो पाई, जबकि क्षेत्र में 12 हजार क्विंटल का खरीद लक्ष्य रखा गया था। इसके अलावा पिछले वर्ष की अपेक्षा इस बार धान की खरीद 2578 क्विंटल कम हो पाई है। खरीद लक्ष्य 12000 क्विंटल के सापेक्ष इस बार धान की खरीद 3024 क्विंटल कम हुई है। खरीद कम होने के पीछे फसल का उत्पादन कम होना माना जा रहा है।

विज्ञापन


चंपावत जिले की तराई बनबसा-टनकपुर में देय लक्ष्य 12 हजार क्विंटल के सापेक्ष तोल बंद होने तक केवल 8976 क्विंटल धान की खरीद हुई है। एक सप्ताह पहले खरीद बंद होने तक बनबसा में 6030 और टनकपुर में 2946 क्विंटल ही धान खरीदा जा सका। साधन सहकारी समिति के सचिव दीनानाथ वर्मा ने बताया कि वर्ष 2016 में बनबसा-टनकपुर से 12 हजार खरीद लक्ष्य के सापेक्ष 11554 क्विंटल धान खरीदा गया था। किसानों के अनुसार इस बार धान की खरीद कम होने के पीछे फसल का उत्पादन कम होना रहा है।
विज्ञापन


राज्य बागवानी पुरस्कार प्राप्त प्रगतिशील किसान पुष्कर कापड़ी का कहना है कि पिछले वर्षों तक सरकार से भुगतान समय पर नहीं होने से किसान ने अपने धान व्यापारियों के हाथों बेच दिए। नई पीढ़ी का खेती के प्रति उदासीन होने से बटाईदार का आधा उत्पाद अपने यहां ले जाने से भी सरकारी कांटे में कम फसल पहुंची है।
विज्ञापन
विज्ञापन


किसान जगत सिंह मिताड़ी का मानना है कि परंपरागत खेती में हो रहे नुकसान से किसान अपनी जमीन सब्जी उत्पादकों को किराए पर दे रहा है, इससे फसल का उत्पादन क्षेत्र में पूर्व की अपेक्षा कम हो रहा है। कै. हरीश कापड़ी का मानना है कि छोटे और मझोले किसान खरीद केंद्र पर बारी आने में होने वाली देरी एवं ट्रैक्टर-ट्राली का अधिक किराया वहन करने के चलते अपना गल्ला व्यापारियों को बेच देते हैं। क्षेत्र में जिस गति से प्लाटिंग कर कृषि भूमि पर भवन निर्माण किए जा रहे हैं, उससे आने वाले समय में खेती कम होगी, जो खाद्यान्न कम होने का संकेत भी है।


क्षेत्र में कम हो रही है कृषि भूमि
बनबसा में 813.101 हेक्टेयर कृषि भूमि है, जिसमें लगान वसूला जाता है। इस भूमि में से करीब 150 हेक्टेयर भूमि पिछले ढाई दशकों में बेची जा चुकी है, जिसमें कंकरीट के जंगल खड़े हो गए हैं। करीब 175 हेक्टेयर कृषि भूमि पर बागान लगाए जा चुके हैं और करीब सौ हेक्टेयर भूमि पर सब्जी उगाई जा रही है। यहां 24.636 हेक्टेयर वन भूमि पर भी खेती की जाती है, जबकि टनकपुर में 368.178 हेक्टेयर कृषि भूमि है, जिसमें से करीब 70 हेक्टेयर भूमि पर सब्जी उत्पादन और करीब इतनी ही भूमि पर बागान लगाए गए हैं। बनबसा के पटवारी वीरेंद्र कुमार और टनकपुर के भुवन जोशी ने बताया कि बिक चुकी कृषि भूमि पर भी लगान वसूला जा रहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed