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Champawat News: परंपरागत दन-कालीन में लुभा रहा ऊं पर्वत का डिजायन
Fri, 11 Apr 2025 11:01 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
Updated Fri, 11 Apr 2025 11:01 PM IST
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डीडीहाट (पिथौरागढ़)। कभी सीमांत क्षेत्र के ऊन और सूत से बने दन, कालीन काफी प्रसिद्ध थे। लोग कारीगरों के घर पहुंच इन्हें खरीदते थे लेकिन बाद में इनकी मांग कम हो गई।
अब हस्तशिल्पी एक बार फिर से स्थानीय कारोबार को बढ़ावा देने के लिए नए डिजायन अपना रहे हैं। डीडीहाट की महिलाओं ने पारंपरिक तरीके से बनाए जाने वाले दन-कालीन, आसन में प्रसिद्ध ऊं पर्वत का डिजायन बनाना शुरू कर दिया है।
डीडीहाट, धारचूला, मुनस्यारी की जनजाति और अनुसूचित जाति की महिलाएं पारंपरिक तरीके से ऊन, सूत से दन-कालीन बनाते थे। आधुनिकता के इस दौर में मशीन से बनने वाले दन-कालीन ने सीमांत के लघु उद्योग को हाशिए पर ला दिया। मशीन से बनने वाले दन-कालीन का मुकाबला करने के लिए डीडीहाट की महिलाओं ने ऊं पर्वत की आकृति वाले कालीन, दन को परंपरागत तरीके से बनाना शुरू कर दिया है।
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रांच की मदद से बनने वाले इन दन-कालीन की मांग को बढ़ाने के लिए महिलाएं अब सोशल मीडिया की भी मदद ले रही हैं। पारंपरिक दन बनाने वाली राधा देवी का कहना है कि सोशल मीडिया में ऊं पर्वत वाला सोफा में बिछाने वाला आसन का वीडियो डालने के बाद लोग अब इसी डिजायन के दन-कालीन की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इससे उन्हें काफी प्रेरणा मिली है। उन्होंने लोगों की मांग के अनुरूप डिजायन बनाने शुरू कर दिए हैं। उनका कहना है कि इससे सीमांत के इस कारोबार को फिर से नई पहचान मिलेगी।
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अब हस्तशिल्पी एक बार फिर से स्थानीय कारोबार को बढ़ावा देने के लिए नए डिजायन अपना रहे हैं। डीडीहाट की महिलाओं ने पारंपरिक तरीके से बनाए जाने वाले दन-कालीन, आसन में प्रसिद्ध ऊं पर्वत का डिजायन बनाना शुरू कर दिया है।
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डीडीहाट, धारचूला, मुनस्यारी की जनजाति और अनुसूचित जाति की महिलाएं पारंपरिक तरीके से ऊन, सूत से दन-कालीन बनाते थे। आधुनिकता के इस दौर में मशीन से बनने वाले दन-कालीन ने सीमांत के लघु उद्योग को हाशिए पर ला दिया। मशीन से बनने वाले दन-कालीन का मुकाबला करने के लिए डीडीहाट की महिलाओं ने ऊं पर्वत की आकृति वाले कालीन, दन को परंपरागत तरीके से बनाना शुरू कर दिया है।
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रांच की मदद से बनने वाले इन दन-कालीन की मांग को बढ़ाने के लिए महिलाएं अब सोशल मीडिया की भी मदद ले रही हैं। पारंपरिक दन बनाने वाली राधा देवी का कहना है कि सोशल मीडिया में ऊं पर्वत वाला सोफा में बिछाने वाला आसन का वीडियो डालने के बाद लोग अब इसी डिजायन के दन-कालीन की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इससे उन्हें काफी प्रेरणा मिली है। उन्होंने लोगों की मांग के अनुरूप डिजायन बनाने शुरू कर दिए हैं। उनका कहना है कि इससे सीमांत के इस कारोबार को फिर से नई पहचान मिलेगी।