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कैसी डिजिटल बैंकिंग यहां तो बैंक की शाखा पहुंचने में ही निकल जाता पूरा दिन
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ओंकार सिंह धोनी।
- फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत। नेपाल सीमा से लगे पंचेश्वर में प्रस्तावित बांध की चर्चा देशभर में है लेकिन इस खूबसूरत गांव के लोग बैंकिंग सुविधा से वंचित हैं। बैंक की शाखा तक पहुंचने के लिए उन्हें 32 किमी दूर किमतोली आना पड़ रहा है। रौसाल, दिगालीचौड़, तामली नीड़, चूका, खिरद्वारी, ककनई, डांडा सहित सीमांत के डेढ़ सौ से अधिक गांवों में रहने वालों की कमोबेश यही स्थिति है। बैंकों से दूरी वाले इन गांवों के लोग बैंक का काम निपटा कर दूसरे दिन ही घर लौट पाते हैं। बैंक सुविधा से वंचित अधिकतर गांवों में संचार सेवा समेत अन्य मूलभूत सुविधाओं की भी कमी है।
देश में डिजिटल बैंकिंग का खूब शोर है लेकिन सीमांत के इस जिले में अभी परंपरागत बैंकिंग प्रणाली भी ठीक से काम नहीं कर पा रही है। चंपावत जिले में 17 बैंकों की कुल 62 शाखाएं हैं। इस साल जून तक 4,49,971 खाताधारकों की इन बैंकों की जमा राशि दो हजार पांच सौ सत्तावन करोड़ रुपये हैं लेकिन इनमें से 80 प्रतिशत शाखाएं शहरी क्षेत्र या ब्लॉक मुख्यालयों में हैं।
इसका खामियाजा दूरस्थ क्षेत्र के लोगों को बैंकिंग असुविधा के रूप में भुगतना पड़ रहा है। जनधन के खातों से लेकर पेंशन, छात्रवृत्ति या समाज कल्याण की योजनाओं का लाभ पाने के लिए गुमदेश, तल्लादेश, तल्लापाल क्षेत्र में स्थित जिले के डेढ़ सौ से अधिक गांवों के 30000 से अधिक लोगों का बैंक तक पहुंचना आसान नहीं है। कठौती गांव के लोगों को पगडंडी समेत कच्ची, पक्की सड़क मिलाकर 76 किमी दूर टनकपुर जाना पड़ता है। इसके लिए यहां के कई गांवों के लोग का दो दिन का समय लगता है। किराये, खाने, ठहरने के लिए 900 रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़ते हैं।
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बीसी के 29 पद निष्क्रिय
चंपावत। बैंक ही नहीं बैंक मित्र या बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट (बीसी) के हाल भी इस जिले में ठीक नहीं है। चंपावत जिले में एक-तिहाई बीसी निष्क्रिय हैं। जिले के दूरदराज के क्षेत्रों में बीसी के कुल 95 पद हैं लेकिन इनमें से 29 निष्क्रिय हैं। इस कारण ग्रामीण क्षेत्रों को इस योजना का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है।
नजदीक में बैंक की शाखा न होने से किमतोली, पुलहिंडोला, लोहाघाट तक जाने एवं काम कराकर लौटने में तकलीफ और धन खर्च होता है। लिहाजा न्याय पंचायत स्तर पर कम से कम एक बैंक शाखा जरूर खोली जानी चाहिए। -ओंकार सिंह धोनी, पंचेश्वर।
तल्लापाल के दूरस्थ इलाकों से बैंक तक जाना खर्चीला और पीड़ादायक भी है। कई किमी तक पैदल चलना होता है। बैंक के लिए पैदल और सड़क कुल मिलाकर 76 किमी दूर टनकपुर जाने की मजबूरी होती है। इसमें दो दिन लगते हैं। -भुवन पंत, कठौती।
चंपावत जिले के किसी ग्रामीण क्षेत्र में बैंक की नई शाखा खोलने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है। जिन गांवों के लोग ऐसी मांग करते हैं उनके प्रस्तावों के औचित्य का परीक्षण कर आगे की कार्रवाई की जाती है। बैंकविहीन इलाकों में बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट की व्यवस्था कर सुविधा देने के प्रयास किए जा रहे हैं। -प्रवीण गर्ब्याल, लीड बैंक प्रबंधक, चंपावत।
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देश में डिजिटल बैंकिंग का खूब शोर है लेकिन सीमांत के इस जिले में अभी परंपरागत बैंकिंग प्रणाली भी ठीक से काम नहीं कर पा रही है। चंपावत जिले में 17 बैंकों की कुल 62 शाखाएं हैं। इस साल जून तक 4,49,971 खाताधारकों की इन बैंकों की जमा राशि दो हजार पांच सौ सत्तावन करोड़ रुपये हैं लेकिन इनमें से 80 प्रतिशत शाखाएं शहरी क्षेत्र या ब्लॉक मुख्यालयों में हैं।
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इसका खामियाजा दूरस्थ क्षेत्र के लोगों को बैंकिंग असुविधा के रूप में भुगतना पड़ रहा है। जनधन के खातों से लेकर पेंशन, छात्रवृत्ति या समाज कल्याण की योजनाओं का लाभ पाने के लिए गुमदेश, तल्लादेश, तल्लापाल क्षेत्र में स्थित जिले के डेढ़ सौ से अधिक गांवों के 30000 से अधिक लोगों का बैंक तक पहुंचना आसान नहीं है। कठौती गांव के लोगों को पगडंडी समेत कच्ची, पक्की सड़क मिलाकर 76 किमी दूर टनकपुर जाना पड़ता है। इसके लिए यहां के कई गांवों के लोग का दो दिन का समय लगता है। किराये, खाने, ठहरने के लिए 900 रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़ते हैं।
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बीसी के 29 पद निष्क्रिय
चंपावत। बैंक ही नहीं बैंक मित्र या बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट (बीसी) के हाल भी इस जिले में ठीक नहीं है। चंपावत जिले में एक-तिहाई बीसी निष्क्रिय हैं। जिले के दूरदराज के क्षेत्रों में बीसी के कुल 95 पद हैं लेकिन इनमें से 29 निष्क्रिय हैं। इस कारण ग्रामीण क्षेत्रों को इस योजना का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है।
नजदीक में बैंक की शाखा न होने से किमतोली, पुलहिंडोला, लोहाघाट तक जाने एवं काम कराकर लौटने में तकलीफ और धन खर्च होता है। लिहाजा न्याय पंचायत स्तर पर कम से कम एक बैंक शाखा जरूर खोली जानी चाहिए। -ओंकार सिंह धोनी, पंचेश्वर।
तल्लापाल के दूरस्थ इलाकों से बैंक तक जाना खर्चीला और पीड़ादायक भी है। कई किमी तक पैदल चलना होता है। बैंक के लिए पैदल और सड़क कुल मिलाकर 76 किमी दूर टनकपुर जाने की मजबूरी होती है। इसमें दो दिन लगते हैं। -भुवन पंत, कठौती।
चंपावत जिले के किसी ग्रामीण क्षेत्र में बैंक की नई शाखा खोलने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है। जिन गांवों के लोग ऐसी मांग करते हैं उनके प्रस्तावों के औचित्य का परीक्षण कर आगे की कार्रवाई की जाती है। बैंकविहीन इलाकों में बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट की व्यवस्था कर सुविधा देने के प्रयास किए जा रहे हैं। -प्रवीण गर्ब्याल, लीड बैंक प्रबंधक, चंपावत।