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न पास में रुपये, न खाने का सामान, झोला टांगा और पैदल आगे बढ़ गए उप्र के मजदूर

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sun, 29 Mar 2020 08:54 PM IST
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Neither the money nearby, nor the food items, the bag and the foot went ahead
शाबास:75 किमी दूर पिथौरागढ़ से पैदल आए उप्र के दिहाड़ी मजदूरों ने भूखे होने के बावजूद सोशल डिस्टें? - फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत। पहली बार 75 किमी फासला पैदल तय किया है। 30 घंटे में ये मंजिल हासिल हुई है, लेकिन अभी उनकी असल मंजिल उनका घर बहुत दूर है। हाथ, कंधे और पीठ में थैला डाल आगे बढ़ रहे इन मजदूरों के पास न रुपये हैं और नहीं खाने का कोई सामान, लेकिन कोरोना वायरस के डर व पिथौरागढ़ में भूखे रहने के अंदेशे से उन्हें पैदल ही आगे बढ़ने की हिम्मत मिली। अलबत्ता चंपावत छतार में पुलिस द्वारा दी गई फ्रूटी, चाय व बिस्कुट से उनकी जान में जान आई। ये कहना है उप्र के बरहाइच (378 किमी) , लखीमपुर (245 किमी) व हरदोई (294 किमी) जिले के 13 मजदूरों का।
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भवन निर्माण का काम करने वाले ये मजदूर (राजेश, राम विलास, सर्वेश, मंशाराम, बबलू, रमेश कुमार, संबारी, राजीव राम, त्रिभुवन, नीरज, बबलू राम, रामू व दुसई)शुक्रवार की रात दो बजे पिथौरागढ़ से चुपचाप अपने गांवों के लिए निकल पड़े। लॉकडाउन के बाद से वे बे-काम थे। बचा हुई राशन व रुपये दोनों बृहस्पतिवार को हो चुके थे। कहीं से मदद नहीं मिलने पर अपने गांव को ही निकलने की ठान ली। पिथौरागढ़ से ग्यारहदेवी तक का फासला सुबह होते-होते तय किया। शनिवार पूरे दिन चलते रहे, लेकिन थकान से बचने के लिए करीब एक किमी के बीच रुकते रहे।
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बबलू कहते हैं कि तीन मजदूरों के पांव जवाब देने लगे, तो शाम सवा तीन बजे बापरू के नजदीक 45 मिनट रुकने के बाद फिर चले। शनिवार दिन भर चलते-चलते मजदूर खूना व मानेश्वर के बीच में सड़क के नजदीक पहाड़ी में रात करीब आठ बजे जमीन पर पसर गए। पेट खाली होने के साथ थके होने से तुरंत ही नींद आ गई, रात कब बीती, यह भी पता नहीं चला।
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रविवार सुबह मानेश्वर से वे चंपावत की ओर बढ़ चले। छतार में पुलिस के बैरियर में पूछताछ के बाद चाय-पानी मिला। छतार के पुराने निष्प्रयोज्य पुल में कुछ देर कमर सीधी कर ये मजदूर फिर सुबह नौ बजे आगे बढ़ गए। मजदूरों का कहना है कि वाहन नहीं मिलने पर वे पैदल ही आगे बढ़ते रहेंगे, ताकि घर पहुंच कर खाने की फिक्र से तो बच जाएंगे।
जीआईसी चौक में खिलाए केले
छतार से तीन किमी दूर चंपावत जीआईसी चौक में सभासद मोहन भट्ट व आदर्श भट्ट ने मजदूरों को केले खिलाए। दरोगा सोनू सिंह ने मजदूरों को जीजीआईसी में बनाए लंगर में भोजन कराया। और सोशल डिस्टेंसिंग की जानकारी दी।

रास्ते में नहीं मिली कोई मदद
75 किमी में रास्ते में इन मजदूरों को कोई मदद नहीं मिली। लोगों के बस चंद सवाल थे-कहां जा रहे हो?, कहां के रहने वाले हो? सट के मत चलो? मगर किसी के पास उनके सवालों का और उनकी भूख का कोई जवाब नहीं था। किसी ने रास्ते में खाने को न पूछा और न कुछ दिया।

पिथौरागढ़ से दो दिन से चलकर चंपावत पहुंचे उप्र के मजदूर।

पिथौरागढ़ से दो दिन से चलकर चंपावत पहुंचे उप्र के मजदूर।- फोटो : CHAMPAWAT

पिथौरागढ़ से पैदल चंपावत आते उत्तर प्रदेश के मजदूर।

पिथौरागढ़ से पैदल चंपावत आते उत्तर प्रदेश के मजदूर।- फोटो : CHAMPAWAT

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