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मां पूर्णागिरि शक्तिपीठ: देवी भक्ति को उमड़ेंगे श्रद्धालु

Sat, 14 Oct 2023 11:39 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत Updated Sat, 14 Oct 2023 11:39 PM IST
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Maa Purnagiri Shaktipeeth: Devotees will flock to worship the Goddess
नवरात्र के लिए सजा मां पूर्णागिरि का देवी दरबार। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
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चंपावत। शारदीय नवरात्र के लिए देवी मंदिर सज गए हैं। नवरात्र रविवार से शुरू हो रहे हैं। चंपावत जिले में मुख्य रूप से दो देवी धाम हैं। सबसे अइधक श्रद्धालु मां पूर्णागिरि धाम में उमड़ते हैं। एसडीएम आकाश जोशी का कहना है कि मेले की सभी व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई है।
पूर्णागिरि धाम (चंपावत)। नेपाल सीमा से लगे पहाड़ी जिले चंपावत के मैदानी हिस्से टनकपुर से 22 किलोमीटर दूर पूर्णागिरि देवी का दरबार आस्था का धाम है। साढ़े पांच हजार फीट ऊंची पहाड़ी पुण्यागिरि (पवित्र पहाड़ी) पर स्थित मां पूर्णागिरि शक्तिपीठ को देवी सती की नाभि स्थली के रूप में भी माना जाता है। देवी धाम में नवरात्र में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़ते हैं। पूर्णागिरि मंदिर समिति के अध्यक्ष पंडित किशन तिवारी बताते हैं कि देवी मां अपने भक्तों की मनोकामना को फलीभत करती है।
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मान्यता: शिव महापुराण के अनुसार कनखल में मां पार्वती के पिता राजा दक्ष प्रजापति ने महायज्ञ में अपनी पुत्री पार्वती के पति भगवान शंकर को न्यौता नहीं दिया। पति के इस अपमान से क्रोधित पार्वती यज्ञ स्थल पहुंचीं और अपमान का प्रतिकार करते हुए यज्ञ के हवन कुंड में कूद कर सती हो गई। रौद्र रूप में आए भगवान शंकर अपनी पत्नी पार्वती के शव को लेकर ब्रह्मांड में विचरण करने लगे। शंकर के इस रूप को देख देवी-देवताओं में भय फैल गया। तब भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से देवी सती के शरीर के 51 टुकड़े कर दिए। मान्यता है कि पुण्य शिखर पर देवी सती की नाभि गिरी थी, इस कारण मां पूर्णागिरि शक्तिपीठ को देवी सती की नाभि स्थली के रूप में भी माना जाता है।
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इस तरह पहुंचेंगे पूर्णागिरि धाम:
मैदानी क्षेत्रों के ज्यादातर भक्त टनकपुर तक पहुंचने के लिए रेल मार्ग का उपयोग करते हैं। टनकपुर से 19 किलोमीटर दूर सड़क मार्ग से भैरो मंदिर तक पहुंचते हैं। यहां से तीन किलोमीटर की पैदल दूरी को पार कर पहाड़ी के शिखर पर स्थित देव मां के दर्शन करते हैं।

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देवीधुरा मां बाराही देवी का आशीर्वाद लेते हैं दूरदराज के भक्त
चंपावत। चंपावत से 57 किलोमीटर दूर देवीधुरा का मां बाराही धाम बगवाल के लिए मशहूर हैं। देवी मां बाराही धाम में सबसे मुख्य मेला रक्षाबंधन के दिन चार (वालिग, लमगड़िया, चम्याल और गहरवाल) खामों के बीच बगवाल होती है। इसके अलावा नवरात्र में भी देवीभक्त मन्नत मांगने के लिए बाराही धाम पहुंचते हैं।
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