चंपावत। कोरोना वायरस संक्रमण के खतरे से बचने के लिए उत्तराखंड में 22 मार्च से जारी लॉकडाउन ने भले ही कारोबारी व अन्य तमाम गतिविधियों पर भारी चोट की है, लेकिन इससे कुछ नई राह भी निकली है। लॉकडाउन ने कई जगह लोगों की छिपी प्रतिभा को भी उभारा है। चंपावत के एक युवा उद्यमी कैलाश पांडेय लॉकडाउन में घर में रहकर काष्ठकला की अपनी प्रतिभा को निखार रहे हैं। लॉकडाउन की अवधि में वह लकड़ी में सात कलाकृतियों को उकेर चुके हैं।
पांडेय बताते हैं कि 21 दिनी लॉकडाउन के एलान के बाद 25 मार्च से उन्होंने पहले से रखी लकड़ियों को आकार देने की सोची। इससे वक्त का भी परिवार के बीच रचनात्मक उपयोग हुआ। इसी सोच के साथ उन्होंने लकड़ियों की विभिन्न आकृतियों को ठीकठाक कर ब्रश व रंग से नया रूप देना शुरू किया। शुरुआत में दिक्कत आई। कलाकृति को ठीक करने में वक्त भी ज्यादा लगा। मगर धीरे-धीरे अभ्यास से ये काम आसान होता गया। काष्ठकला की ये आकृतियां पशु-पक्षी, गुड़िया, गणेशनुमा आकार को लिए हुए हैं। अब तक सात आकृतियां बना चुके कैलाश अपनी इस खूबी को नई ऊंचाई देना चाहते हैं।